पटना IGIMS में बेहतर इलाज की तैयारी, जांच रिपोर्ट मजबूत करने की पहल

Edited by Karuna Tiwari
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पैथोलॉजी, रेडियोलॉजी जांच को लेकर विशेषज्ञों ने किया मंथन

IGIMS Lab Quality: मरीजों के बेहतर उपचार में चिकित्सकों की विशेषज्ञता के साथ-साथ जांच रिपोर्ट की शुद्धता भी अहम भूमिका निभाती है. इसी उद्देश्य से आईजीआईएमएस के बायोकेमिस्ट्री विभाग की ओर से गुड क्लिनिकल लेबोरेटरी प्रैक्टिस (जीसीएलपी) विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया.

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पटना से आनंद तिवारी की रिपोर्ट
IGIMS Lab Quality:
पटना आईजीआईएमएस के बायोकेमिस्ट्री विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यशाला में डॉक्टरों और अस्पताल कर्मियों को प्रयोगशाला की गुणवत्ता और मानक प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई. कार्यक्रम का उद्घाटन संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) बिंदे कुमार, प्रो. (डॉ.) प्रीत पाल सिंह और प्रो. (डॉ.) ललित मोहन ने किया.

सटीक जांच रिपोर्ट को बताया बेहतर इलाज का आधार

उद्घाटन संबोधन में वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था में सटीक जांच रिपोर्ट ही सही निदान और प्रभावी उपचार का आधार होती है. उन्होंने कहा कि जीसीएलपी के सिद्धांतों का पालन केवल प्रयोगशालाओं की आवश्यकता नहीं, बल्कि मरीजों के हित और स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण दायित्व है.

गुणवत्ता और पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर

कार्यक्रम के आयोजन सचिव डॉ. रवि शेखर ने बताया कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य लैब प्रक्रियाओं में गुणवत्ता, पारदर्शिता और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कार्य संस्कृति को बढ़ावा देना है. उन्होंने कहा कि सैंपल संग्रह, परीक्षण, रिकॉर्ड संधारण और गुणवत्ता नियंत्रण की सही व्यवस्था से जांच परिणामों की विश्वसनीयता बढ़ती है.

विशेषज्ञों ने साझा किए तकनीकी अनुभव

कार्यशाला में प्रो. (डॉ.) शैलेश कुमार, प्रो. (डॉ.) अंजू सिंह, प्रो. (डॉ.) जीउतराम केसरी, एडिशनल प्रोफेसर डॉ. प्रीतम प्रकाश, डॉ. श्वेता कुमारी, डॉ. सौरभ कुमार तथा एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अर्चना भारती ने जीसीएलपी के विभिन्न पहलुओं पर व्याख्यान दिए. विशेषज्ञों ने क्वालिटी मैनेजमेंट सिस्टम, इंटरनल एवं एक्सटर्नल क्वालिटी कंट्रोल, बायोसेफ्टी, सैंपल मैनेजमेंट, डॉक्यूमेंटेशन और डेटा इंटीग्रिटी जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी.

गुणवत्तापूर्ण जांच से बेहतर होंगे स्वास्थ्य परिणाम

वक्ताओं ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण जांच रिपोर्ट बेहतर इलाज की बुनियाद होती है. यदि प्रयोगशाला जांच वैज्ञानिक मानकों और गुणवत्ता प्रक्रियाओं के अनुरूप हो तो चिकित्सक अधिक सटीक निदान कर सकते हैं. इससे उपचार संबंधी निर्णय बेहतर होते हैं और मरीजों की सुरक्षा व स्वास्थ्य परिणामों में भी उल्लेखनीय सुधार आता है.

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By Karuna Tiwari

करुणा तिवारी पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत Doordarshan Bihar के साथ की. 8 वर्षों तक टीवी और डिजिटल माध्यम में सक्रिय रहने के बाद, वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल, बिहार टीम के साथ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें बिहार की राजनीति, ग्राउंड रिपोर्टिंग और सामाजिक मुद्दों में विशेष रुचि है. अपने काम के प्रति समर्पित करुणा हर दिन कुछ नया सीखने और बेहतर करने की कोशिश करती हैं.

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