ट्रंप टैरिफ के बीच पीएम मोदी के चीन दौरे पर टिकीं हैं दुनिया की नजरें, क्या है चीनी मीडिया की राय

Published by : Rajneesh Anand Updated At : 30 Aug 2025 6:19 PM

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा

PM Modi China Visit : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एसईओ समिट में हिस्सा लेने के लिए चीन पहुंच गए हैं. भारत-चीन के बदलते रिश्ते पर पूरे विश्व की नजर है. सभी यह जानना चाहते हैं कि क्या पीएम मोदी का यह चीन दौरा ट्रंप टैरिफ का जवाब बनकर उभरेगा? चीनी मीडिया भी भारत-चीन की दोस्ती की वकालत कर रहा है.

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PM Modi China Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन की यात्रा पर शनिवार 30 अगस्त को तियानजिन पहुंचे. वे लगभग 7 साल बाद, तब यहां पहुंचे हैं जब ट्रंप टैरिफ की वजह से भारत-अमेरिका संबंधों में खटास आ गई है. पूरी दुनिया पीएम मोदी की इस यात्रा पर नजर गड़ाए हुए है, क्योंकि वे एससीओ समिट में हिस्सा लेने के लिए चीन पहुंचे हैं, वहां रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन भी पहुंचने वाले हैं. भारत-चीन के पिछले कुछ सालों के संबंधों पर अगर ध्यान दें, तो पाएंगे कि यह काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है. दोनों देश कई बार एक दूसरे के आमने-सामने खड़े दिखे हैं, खासकर सीमा विवाद को लेकर. हालांकि पिछले कुछ समय से दोनों देश रिश्तों में गरमाहट लाने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे में भारत-चीन के संबंधों पर क्या कहता है चीनी मीडिया.

चीन की मीडिया पर सरकार का नियंत्रण

चीन एक ऐसा देश है, जहां की मीडिया पर उनकी सरकार और कम्युनिस्ट पार्टी का नियंत्रण होता है. इसका अर्थ यह है कि मीडिया वही लिखता और कहता है जो सरकार की नीति होती है. वहां की बड़ी एजेंसियां जैसे शिन्हुआ (Xinhua), पीपल्स डेली (People’s Daily), ग्लोबल टाइम्स (Global Times) असल में पार्टी और सरकार के ही अंग हैं. इनके रिपोर्ट सरकारी नीति पर ही आधारित होते हैं, इसका अर्थ यह हुआ कि मीडिया वही कहेगी जो सरकार कह रही होगी.

चीनी मीडिया भारत के साथ दोस्ती पर कर रहा है फोकस

चीनी अखबार चाइना डेली ने लिखा है कि भारत और चीन को मिलकर वैश्विक चुनौतियों का सामना करना चाहिए. पीएम मोदी के चीन दौरे को इसकी शुरुआत के रूप में चीनी मीडिया देख रहा है. भारत दौरे पर आए विदेश मंत्री वांग यी की यात्रा को लेकर भी चीनी मीडिया ने दोस्ती की ओर कदम ही बताया है. चीनी मीडिया का मानना है कि अमेरिका जिस प्रकार विश्व पर अपनी धाक जमाने की कोशिश कर रहा है, उस परिस्थिति में भारत-चीन को मित्रता करनी चाहिए. अखबार यह भी कहता है कि ट्रंप टैरिफ ने भारत को यह समझा दिया है कि रणनीतिक स्वायत्ता का क्या और कितना महत्व है.

भारत-चीन दोस्ती का आधार बनेगा एससीओ समिट

चीनी मीडिया एससीओ समिट को भारत-चीन की दोस्ती के आधार के रूप में देखता है. तियानजिन में होने वाले एससीओ शिखर सम्मेलन में यदि कनेक्टिविटी, गैर-कृषि व्यापार और पर्यावरण साझेदारी पर समझौते होते हैं, तो यह एशिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग का नया रास्ता खोल सकता है. चीनी मीडिया यह चाहता है कि भारत-चीन की साझेदारी अन्य क्षेत्रों में भी बढ़े.

अमेरिकी दबाव से मुकाबले के लिए चीन-भारत का साथ जरूरी

राष्ट्रवादी वेबसाइट गुआंचा ने लिखा कि भारत, अमेरिका और चीन दोनों के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है, लेकिन यह जरूरी है कि विश्व पर अमेरिका के दबाव के बीच भारत और चीन अपनी साझेदारी और दोस्ती दोनों बनाएं.

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लेखक के बारे में

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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