मुंबई हिट एंड रन केस : आरोपी मिहिर शाह के पिता राजेश शाह को एकनाथ शिंदे ने पार्टी के उपनेता पद से हटाया
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 10 Jul 2024 2:49 PM
पीड़ित परिवार
Mumbai BMW Hit and Run Case : मिहिर शाह ने पुलिस के सामने यह स्वीकार किया है कि जिस वक्त बीएमडब्ल्यू गाड़ी से हादसा हुआ उस वक्त गाड़ी वो चला रहा था.
Mumbai BMW Hit and Run Case : मुंबई के हिट एंड रन केस में बड़ी कार्रवाई की गई है. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने राजेश शाह को पार्टी के उपनेता पद से हटा दिया है. राजेश शाह का बेटा मिहिर शाह इस घटना का मुख्य आरोपी है. मिहिर शाह की गिरफ्तारी के बाद एकनाथ शिंदे ने यह बड़ा फैसला किया है. मिहिर शाह की गिरफ्तारी घटना के दो दिन बाद मंगलवार रात को हुई है.
मिहिर शाह ने स्वीकारा गाड़ी वही चला रहा था
टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के अनुसार मिहिर शाह ने पुलिस की पूछताछ में यह स्वीकार किया है कि जिस वक्त बीएमडब्ल्यू गाड़ी से यह हादसा हुआ उस वक्त गाड़ी वे खुद चला रहा था. मिहिर शाह जिसकी उम्र 24 साल है उसने जिस बार में शराब पी थी उसपर भी कार्रवाई हुई है. बीएमसी ने आज उस बार के कई हिस्सों पर बुलडोजर चलवा दिया है, जो गैरकानूनी तरीके से बने हुए थे.
100 मीटर तक महिला को घसीटा
मिहिर शाह ने रविवार की सुबह को सात बजे एक स्कूटी सवार दंपती को अपनी बीएमडब्ल्यू कार से ठोकर मार दी थी और करीब सौ मीटर तक स्कूटी सवार महिला कार की बोनट के साथ खिंचती चली गई. बावजूद इसके मिहिर शाह ने गाड़ी नहीं रोकी, अंतत: महिला की सड़क पर गिर कर मौत हो गई. दुर्घटना के बाद से मिहिर शाह फरार था. उसने अपना फोन बंद कर दिया था, जिसकी वजह से उसकी गिरफ्तारी नहीं हो पा रही थी. अचानक मंगलवार की सुबह उसका एक फोन नंबर एक्टिव हुआ, जिसकी मदद से उसे दुर्घटना के 60 घंटे बाद गिरफ्तार किया गया.
नए आपराधिक कानून में मिहिर शाह पर बनेगा गैरजमानती केस
मिहिर शाह हिट एंड रन के मामले का दोषी है और उसने घटना के बाद इस अपराध को छुपाने की कोशिश भी की, इसलिए उसपर नए आपराधिक कानूनों के अनुसार बड़ा मामला बन सकता है, जो गैर जमानती होगा. मिहिर शाह ने अपने दोस्तों के साथ शनिवार की रात को पार्टी शुरू की थी. पुलिस यह पता करने की कोशिश कर रही है कि आखिर पार्टी में क्या-क्या परोसा गया था और उस पार्टी में कौन-कौन शामिल थे. राज्य में 25 साल से कम उम्र का व्यक्ति बार में व्हिस्की, रम और वोदगा का सेवन नहीं कर सकता है.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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