कॉकरोच जनता पार्टी का जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी, सोनम वांगचुक भी होंगे शामिल; शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 06 Jun 2026 12:38 PM
कॉकरोच जनता पार्टी का जंतर-मंतर पर प्रदर्शन
Cocroach Janta Party : अभिजीत दिपके सोशल मीडिया से निकलकर अब रियल वर्ल्ड में आ गए हैं. उनके नेतृत्व में कॉकरोच जनता पार्टी दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना दे रही है और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांग रही है. जब अभिजीत दिपके दिल्ली पहुंचे तो उनके हाथ में बाबा साहेब भीम राव अंबेडकर की बाॅयोग्राफी थी.
Cockroach Janta Party : दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है. यह विरोध प्रदर्शन पिछले कुछ समय से परीक्षाओं में हो रही गड़बड़ी के विरोध में आयोजित किया गया है. कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दिपके इस विरोध प्रदर्शन के लिए शनिवार सुबह दिल्ली पहुंचे हैं. इस विरोध प्रदर्शन में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की जा रही है.
नीट यूजी पेपर लीक और सीबीएसई के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम में हुई गड़बड़ी
नीट यूजी पेपर लीक से युवाओं में काफी निराशा है और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है. CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम का इस्तेमाल क्लास 12 बोर्ड परीक्षाओं के मूल्यांकन और री-इवैल्यूएशन दोनों के लिए किया गया था. बाद में जब विवाद बढ़ा तो सीबीएसई के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया गया है.
सोनम वांगचुक भी प्रदर्शन में शामिल होंगे
लद्दाख के 59 साल के एक्टिविस्ट, जिन्हें सितंबर में गिरफ्तार किया गया था और छह महीने तक हिरासत में रखा गया था, उन्होंने अपने एक्स पोस्ट में यह कहा था कि मैं छह जून को दिल्ली के प्रोटेस्ट में शामिल होऊंगा. उनका कहना है कि जब चीजें गलत हो रही हैं, तो जिम्मेदार मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए.
कैसे बना CJP और कौन हैं अभिजीत दिपके ?
कॉकरोच जनता पार्टी का सोशल मीडिया एकाउंट तब बनाया गया था जब चीफ जस्टिस ने एक केस की सुनवाई के दौरान कुछ लोगों पर टिप्पणी करते हुए उन्हें कॉकरोच बताया था. इस एकाउंट को बनाने वाले अभिजीत दिपके 30 साल के हैं और महाराष्ट्र के रहने वाले हैं. उन्होंने पुणे से जर्नलिज्म में अंडरग्रेजुएट डिग्री ली है. वहां अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद, वे हायर एजुकेशन के लिए यूनाइटेड स्टेट्स चले गए थे. उन्होंने हाल ही में बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशन्स में दो साल की मास्टर डिग्री पूरी की है. 2020 से 2023 तक, उन्होंने आम आदमी पार्टी के साथ काम किया, जहां वे सोशल मीडिया मैनेजमेंट और इलेक्शन कैंपेन एक्टिविटीज में शामिल थे.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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