Lalita Jayanti 2023: माघ पूर्णिमा के दिन मनाई जाएगी ललिता जयंती, जानें-पूजा विधि और महत्व

Lalita Jayanti 2023: भक्तों में मान्यता है कि यदि कोई इस दिन मां ललिता देवी की पूजा भक्ति-भाव सहित करता है तो उसे देवी मां की कृपा अवश्य प्राप्त होती है और जीवन में हमेशा सुख शांति एवं समृद्धि बनी रहती है. 5 फरवरी को माघ माह की पूर्णिमा तिथि है और इसी दिन ललिता जयंती भी मनाई जाती है.
Lalita Jayanti 2023: आने वाले रविवार यानी 5 फरवरी को माघ माह की पूर्णिमा तिथि है और इसी दिन ललिता जयंती भी मनाई जाती है. हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व होता है. पूर्णिमा तिथि पर दान, स्नान, जप और तप करने से पुण्य की प्राप्ति होती है. मां ललिता 10 महाविद्यायों में से एक हैं. मां ललिता को राजराजेश्वरी और मां त्रिपुर सुंदरी के नाम से भी जाना जाता है. मां ललिता की पूजा करने से शक्ति एवं समृद्धि प्राप्त होती है.
भक्तों में मान्यता है कि यदि कोई इस दिन मां ललिता देवी की पूजा भक्ति-भाव सहित करता है तो उसे देवी मां की कृपा अवश्य प्राप्त होती है और जीवन में हमेशा सुख शांति एवं समृद्धि बनी रहती है. मां ललिता मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है. पुराणों के अनुसार आदिशक्तित्रिपुर सुंदरी जगत जननी ललिता माता के मंदिर में दर्शनों एवं पूजन हेतु हजारों श्रद्धालु यहां आते हैं.
सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए आप ललिता देवी जयंती पर ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुंदरीयै नम: के मंत्र का जाप कर सकते हैं.
माता ललिता जयंती के उपलक्ष्य पर अनेक जगहों भव्य मेलों का आयोजन किया जाता है, जिसमें हज़ारों श्रद्धालु श्रद्धा और हर्षोल्लासपूर्वक भाग लेते हैं. मां ललिता देवी मंदिर में हमेशा ही भक्तों का तांता लगा रहता है, परन्तु जयंती के अवसर पर मां की पूजा-आराधना का कुछ विशेष ही महत्व होता है.
यह पूरे भारतवर्ष में मनाया जाता है. पौराणिक मान्यतानुसार इस दिन देवी ललिता भांडा नामक राक्षस को मारने के लिए अवतार लेती हैं. राक्षस भांडा कामदेव के शरीर के राख से उत्पन्न होता है. इस दिन भक्तगण षोडषोपचार विधि से मां ललिता का पूजन करते है. इस दिन मां ललिता के साथ साथ स्कंदमाता और शिव शंकर की भी शास्त्रानुसार पूजा की जाती है.
शक्तिस्वरूपा देवी ललिता को समर्पित ललिता जयंती आश्विन मास के शुक्ल पक्ष को पांचवे नवरात्र के दिन मनाई जाती है. इस शुभ दिन भक्तगण व्रत एवं उपवास का पालन करते हैं यह दिन ललिता जयंती व्रत के नाम से जाना जाता है. देवी ललिता जी का ध्यान रुप बहुत ही उज्जवल व प्रकाश मान है. माता की पूजा श्रद्धा एवं सच्चे मन से की जाती है. शुक्ल पक्ष के समय प्रात:काल माता की पूजा उपासना करनी चाहिए. कालिकापुराण के अनुसार देवी की दो भुजाएं हैं, यह गौर वर्ण की, रक्तिम कमल पर विराजित हैं.
ललिता देवी की पूजा से समृद्धि की प्राप्त होती है. दक्षिणमार्गी शाक्तों के मतानुसार देवी ललिता को चण्डी का स्थान प्राप्त है. इनकी पूजा पद्धति देवी चण्डी के समान ही है तथा ललितोपाख्यान, ललितासहस्रनाम, ललितात्रिशती का पाठ किया जाता है. दुर्गा का एक रूप भी ललिता के नाम से जाना गया है.
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By Shaurya Punj
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