अजीत डोभाल के पाकिस्तान में वो 7 साल, जिनकी वजह से उनसे आज भी डरता है पाकिस्तान
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 12 Jul 2025 2:29 PM
अजीत डोभाल ,आईआईटी मद्रास
Ajit Doval : अजीत डोभाल को खुफिया दुनिया का जेम्स बांड कहा जाता है, जिन्होंने अपनी रणनीतियों से अपने दुश्मनों को हमेशा मात दी. उन्होंने पाकिस्तान में जो 7 साल बिताए, उस दौरान उनकी कई अहम जानकारियां इकट्ठी कीं, जो भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए बहुत ही खास हैं. डोभाल ने देश को सुरक्षित करने के लिए हमेशा काम किया है, उन्होंने आईआईटी मद्रास में यह कहा कि हमने पाकिस्तान के सिर्फ उन्हीं जगहों को निशाना बनाया, जो आतंकवादियों को प्रशिक्षित कर रहे थे.
Table of Contents
Ajit Doval : राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने आईआईटी मद्रास के एक कार्यक्रम में शिरकत करते ऑपरेशन सिंदूर पर बात की और बताया कि किस तरह मात्र 23 मिनट में भारत ने पाकिस्तान को घुटनों पर ला दिया था. उन्होंने बताया कि भारत ने सिर्फ और सिर्फ आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया. इस अवसर पर उन्होंने यह भी कहा कि विदेशी मीडिया ने इस पूरे घटनाक्रम की रिपोर्टिंग पक्षपातपूर्ण तरीके से की है. अजीत डोभाल भारतीय सुरक्षा एजेंसी के जेम्स बांड कहे जाते हैं.
अजीत डोभाल को क्यों कहा जाता है जेम्स बांड
अजीत डोभाल ने सात सालों तक पाकिस्तान में अंडरकवर रहकर काम किया था और भारत सरकार को जरूरी जानकारी दी थी. उनका मिशन बहुत ही खतरनाक था, लेकिन उन्होंने इसमें सफलता प्राप्त की थी. एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सवालों का जवाब देते हुए बताया था कि वे कुल 7 सालों तक पाकिस्तान में मौलवी के वेश में रहे थे. इस दौरान खतरा भी रहता था. उन्होंने एक रोचक जानकारी साझा करते हुए बताया कि वो लाहौर में थे और उसी दौरान एक मजार में थे. उन्हें वहां एक आदमी मिला, जो मजार में धार्मिक कार्य किया था, उसने अजीत डोभाल से कहा कि तुम हिंदू हो, अजीत डोभाल ने इनकार किया, इसपर उस इंसान ने उन्हें अपने साथ चलने को कहा. वह उन्हें एक कमरे में लेकर गया और दरवाजा बंद कर दिया. उसने अजीत डोभाल से फिर कहा तुम हिंदू हो, उन्होंने फिर मना किया. तब उसने कहा कि तुम्हारी कान में छेद है, जो एक हिंदू कराता है. तब डोभाल ने उससे कहा कि हां मैं हिंदू था अब नहीं हूं, इसपर उस इंसान ने कहा कि तुम आज भी हिंदू हो. मैं तुम्हें सलाह दे रहा हूं कि इसे सही करवा लो, क्योंकि इस तरह से घूमने में खतरा है. मैं यह बात इसलिए कह रहा हूं मैं खुद भी हिंदू हूं,मेरे पूरे परिवार को यहां मार दिया गया. मैं आज किसी तरह से अपनी जान बचाकर रह रहा हूं. उन्होंने अपनी आलमारी खोलकर उससे शिवजी और दुर्गाजी जी की प्रतिमा दिखाई. उन्होंने उस कार्यक्रम में यह भी बताया था कि वे जहां के रहने वाले हैं, वहां जन्म के बाद पहले के दौर में कानों में छेद कर दिया जाता था, इसलिए उनके कानों में भी छेद थे. बाद में अजीत डोभाल ने उस छेद को सर्जरी के जरिए छुपाया था. अजीत डोभाल के जीवन पर एक किताब भी लिखी गई है, जिसका नाम है-“Ajit Doval: The Indian James Bond”. यह किताब प्रदीप कुमार रे ने लिखी है. इस किताब में अजीत डोभाल के पाकिस्तान प्रवास पर बात की गई है. अजीत डोभाल को खुफिया दुनिया का योद्धा कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने किसी भी परिस्थिति में हार नहीं मानी. उन्होंने अपने पाकिस्तान मिशन में इतनी खुफिया जानकारी जमा कर ली है कि आज भी पाकिस्तान उनके नाम से घबराता है.

अजीत डोभाल ने खास मिशन
यूं तो अजीत डोभाल का सभी मिशन खास होता था, लेकिन अगर उनमें से भी खास की चर्चा करनी हो, तो निश्चित तौर पर सबसे पहला नाम पाकिस्तान मिशन का ही आएगा. हालांकि खुफिया मिशन होने की वजह से उसके बारे में कुछ ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन इतना पता है कि उन्होंने कुल 7 साल पाकिस्तान में बिताए. वो भी एक मुस्लिम के वेश में. उनके बारे में यह कहा जाता है कि उन्होंने स्थानीय लोगों से दोस्ती कर ली थी और अपने मिशन को सफल बनाया था. स्वर्ण मंदिर में किए गए ऑपरेशन ब्लू स्टार में ही अजीत डोभाल ने मंदिर के अंदर जाकर छुपे बैठे आतंकवादियों से सांठगांठ की और उसके बात उनकी पूरी योजना की जानकारी सरकार को दी. उनकी जानकारी के आधार पर ही 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार का सफलता पूर्वक अंजाम किया जा सका था. 1990 में हुए कंधार विमान अपहरण के बाद उन्होंने आतंकवादियों से बातचीत में अहम भूमिका निभाई, वे उस टीम का नेतृत्व कर रहे थे. इसके बाद पाकिस्तान के खिलाफ हुए सर्जिकल स्ट्राइक में भी उनकी अहम भूमिका रही.
अजीत डोभाल का बायोडाटा जानिए
अजीत डोभाल उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के रहने वाले हैं. उनका जन्म 20 जनवरी 1945 को हुआ है. उन्होंने शुरुआती शिक्षा दिल्ली और राजस्थान में ली. उसके बाद उन्होंने आगरा विश्वविद्यालय से इकोनाॅमिक्स में मास्टर्स किया. 1968 में वे केरल कैडर के आईपीएस अधिकारी के रूप में भारतीय पुलिस सेवा में शामिल हुए. कुछ ही दिनों में उन्हें इंटेलिजेंस ब्यूरो में नियुक्त किया गया. उसके बाद से उन्होंने भारत की सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई और आज के समय में भारत के विशेष सुरक्षा सलाहकार हैं.
Also Read : बिहार में मतदाता सूची के अपडेशन पर क्यों हो रही राजनीति? जानिए क्या है सच
कानूनन क्या होगी बच्चे की जाति अगर माता-पिता अलग जाति के हैं और परिस्थितियां कुछ इस तरह की हैं…
सिर्फ बिहारी महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 35% आरक्षण का लाभ, जानिए कैसे तय होगा बिहार का डोमिसाइल
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










