Google का 15 अरब डॉलर AI डेटा सेंटर, विशाखापत्तनम बनेगा नया टेक हब

Published by :Rajeev Kumar
Published at :28 Apr 2026 9:10 PM (IST)
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Google AI Data Center India Visakhapatnam

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव विशाखापत्तनम में Google Cloud India AI Hub के शिलान्यास समारोह के दौरान सभा को संबोधित कर रहे हैं / फोटो पीटीआई से

Meta Excerpt: Google का मेगा AI डेटा सेंटर प्रोजेक्ट विशाखापत्तनम को AI सिटी में बदल सकता है. जानें इसकी क्षमता, निवेश, और कैसे बदलेगा भारत का डिजिटल और टेक भविष्य.

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भारत की डिजिटल दौड़ अब एक नए स्तर पर पहुंचने वाली है. Google के 15 अरब डॉलर के मेगा एआई डेटा सेंटर प्रोजेक्ट ने देश के टेक मैप पर बड़ा बदलाव संकेत दिया है. केंद्रीय मंत्री Ashwini Vaishnaw के मुताबिक इस प्रोजेक्ट के पूरा होते ही Visakhapatnam एक उभरता हुआ AI हब बन जाएगा. यह सिर्फ एक डेटा सेंटर नहीं, बल्कि भारत के डिजिटल भविष्य की नई नींव माना जा रहा है.

विशाखापत्तनम बनेगा AI सिटी

आंध्र प्रदेश के तारलुवाड़ा इलाके में इस बड़े प्रोजेक्ट की शुरुआत हो चुकी है. सरकार का कहना है कि यह हाइपरस्केल डेटा सेंटर शहर की पहचान बदल देगा. AI आधारित सेवाओं, स्टार्टअप्स और टेक कंपनियों के लिए यह नया केंद्र बन सकता है.

मंत्री ने साफ कहा कि यह प्रोजेक्ट भारत को ग्लोबल AI रेस में मजबूत स्थिति दिलाने में मदद करेगा. आने वाले समय में विशाखापत्तनम सिर्फ एक पोर्ट सिटी नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी इनोवेशन का बड़ा केंद्र बन सकता है.

कितना बड़ा है यह प्रोजेक्ट?

यह डेटा सेंटर करीब 1 गीगावाट क्षमता का होगा, जो इसे भारत के सबसे बड़े टेक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में शामिल करता है. इस प्रोजेक्ट को AdaniConneX और Airtel Nxtra के साथ मिलकर विकसित किया जा रहा है.

इसके लिए करीब 600 एकड़ जमीन आवंटित की गई है, जिससे साफ है कि इसका स्केल कितना बड़ा है. इतना बड़ा निवेश भारत में डेटा प्रोसेसिंग और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर को नई ताकत देगा.

AI और डिजिटल सेवाओं में बड़ा बदलाव

AI का असर अब शिक्षा, हेल्थकेयर, लॉजिस्टिक्स और खेती तक पहुंच चुका है. इस डेटा सेंटर के जरिए इन सभी सेक्टर में बेहतर और तेज सेवाएं मिल सकती हैं.

बड़े पैमाने पर डेटा प्रोसेसिंग होने से कंपनियों को भारत में ही एडवांस AI सॉल्यूशंस विकसित करने का मौका मिलेगा. इससे देश में टेक इनोवेशन और स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी बड़ा बूस्ट मिल सकता है.

ग्लोबल कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर असर

इस प्रोजेक्ट के साथ समुद्री केबल नेटवर्क भी जोड़ा जा रहा है, जिससे भारत की कनेक्टिविटी यूरोप, अफ्रीका, पश्चिम एशिया और अमेरिका तक मजबूत होगी.

सरकार का मानना है कि यह कदम भारत को डिजिटल और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में ग्लोबल हब बनाने की दिशा में आगे बढ़ाएगा. साथ ही, टेक कंपनियों को देश में सर्वर और GPU निर्माण के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है.

भारत की टेक पावर को मिलेगा नया बूस्ट

भारत पहले ही आईटी सर्विसेज में दुनिया में मजबूत पहचान बना चुका है. अब फोकस इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप मैन्युफैक्चरिंग पर है.

सरकार की नीतियां और बड़े निवेश मिलकर भारत को एक भरोसेमंद टेक्नोलॉजी पार्टनर बना रहे हैं. ऐसे में यह डेटा सेंटर प्रोजेक्ट सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं, बल्कि भारत की डिजिटल ताकत का प्रतीक बन सकता है.

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Rajeev Kumar

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By Rajeev Kumar

राजीव, 14 वर्षों से मल्टीमीडिया जर्नलिज्म में एक्टिव हैं. टेक्नोलॉजी में खास इंटरेस्ट है. इन्होंने एआई, एमएल, आईओटी, टेलीकॉम, गैजेट्स, सहित तकनीक की बदलती दुनिया को नजदीक से देखा, समझा और यूजर्स के लिए उसे आसान भाषा में पेश किया है. वर्तमान में ये टेक-मैटर्स पर रिपोर्ट, रिव्यू, एनालिसिस और एक्सप्लेनर लिखते हैं. ये किसी भी विषय की गहराई में जाकर उसकी परतें उधेड़ने का हुनर रखते हैं. इनकी कलम का संतुलन, कंटेंट को एसईओ फ्रेंडली बनाता और पाठकों के दिलों में उतारता है. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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