Ahmedabad Plane Crash: फ्लाइट में कौन सी सीट होती है सबसे सुरक्षित? जानें कहां बैठने से बच सकती है जान

Author :Ankit Anand
Published by :Ankit Anand
Updated at :12 Jun 2025 11:12 PM
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Ahmedabad Plane Crash

Ahmedabad Plane Crash

Ahmedabad Plane Crash: अहमदाबाद में हुई प्‍लेन क्रैश की घटना के बाद से सोशल मीडिया पर लोग इस तरह की घटनाओं को लेकर अधिक जानकारी तलाशने लगे हैं. इसी दौरान एक सवाल बार-बार लोगों के मन में आ रहा है कि प्‍लेन हादसे की स्थिति में किस सीट पर बैठना सबसे सुरक्षित माना जाता है? आज हम इसी सवाल का जवाब आपको देने जा रहे हैं.

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Ahmedabad Plane Crash: गुरुवार 12 जून को अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की एक फ्लाइट हादसे का शिकार हो गई. विमान में कुल 242 यात्री सवार थे. यह दुर्घटना इतनी भयानक थी कि इसने न केवल देश को बल्कि पूरी दुनिया को हैरान कर दिया. हादसे की गंभीरता को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि किसी का बच पाना बेहद मुश्किल रहा होगा. हालांकि इसकी असली तस्वीर समय के साथ ही सामने आएगी. इस बीच, कई लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या प्लेन क्रैश के समय कोई ऐसी खास सीट होती है, जिस पर बैठने से जान बचने की संभावना अधिक होती है?

सीट बुक करते वक्त इन बातों का रखें ध्यान  

फ्लाइट की टिकट बुक करते समय अक्सर हम यह ध्यान में रखते है कि विंडो सीट हो, यात्रा के दौरान आरामदायक अनुभव मिले और चढ़ने-उतरने में सुविधा हो. लेकिन एक अध्ययन के अनुसार, विमान की कुछ सीटें अन्य सीटों की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित मानी जाती हैं और हैरानी की बात यह है कि ये सीटें अक्सर कम कीमत पर भी उपलब्ध होती हैं.

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आंकड़े क्या कहते हैं? 

अमेरिका की नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (NTSB) ने 1971 से अब तक हुई 20 प्रमुख विमान दुर्घटनाओं का विश्लेषण किया. इस शोध में देखा गया कि किन यात्रियों की जान बची और किन्हें जान गंवानी पड़ी. नतीजों में सामने आया कि जो यात्री विमान के पिछले हिस्से में बैठे थे, उनकी जीवित बचने की संभावना 69% तक थी. इसके मुकाबले, विमान के अगली ओर बैठे यात्रियों की बचने की संभावना केवल 49% पाई गई. वहीं, विमान के पंखों के पास वाली सीटों पर बैठे यात्रियों के लिए यह संभावना 59% थी.

Ahmedabad Plane Crash: कौन सी सीट है सबसे सुरक्षित 

साल 2015 में टाइम मैगजीन द्वारा किए गए एक विश्लेषण में एफएए (FAA) डेटा के आधार पर खुलासा हुआ कि विमान के पिछले हिस्से में बैठने वाले यात्रियों की मौत की संभावना सबसे कम होती है. रिपोर्ट के मुताबिक, जब विमान की लैंडिंग में गड़बड़ी होती है या कोई हल्का टकराव होता है, तो सबसे ज्यादा असर उसके अगले हिस्से पर पड़ता है. ऐसे में पीछे की सीटें तुलनात्मक रूप से ज्यादा सुरक्षित मानी जाती हैं. एविएशन सेफ्टी विशेषज्ञ डैनियल क्वासी अडजेकम ने भी इस बात की पुष्टि की है और बताया कि हादसों के दौरान विमान का अगला हिस्सा संरचनात्मक रूप से ज्यादा टूट-फूट का शिकार होता है.

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अंकित आनंद, डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. उन्हें पत्रकारिता में 2 साल से अधिक का अनुभव है और इस दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई है. अंकित मुख्य रूप से स्मार्टफोन लॉन्च, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी खबरें, गैजेट्स रिव्यू और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विषयों पर काम करते हैं. इसके साथ ही वह ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ी जरूरी और ट्रेंडिंग खबरों को भी कवर करते हैं. वह कार और बाइक से जुड़ी हर खबर को सिर्फ एक एंगल से नहीं, बल्कि टेक्निकल, यूजर एक्सपीरियंस और मार्केट ट्रेंड्स जैसे हर पहलू से समझकर पेश करते हैं. उनकी लेखन शैली सरल, स्पष्ट और यूजर्स-फर्स्ट अप्रोच पर बेस्ड है, जिसमें Gen Z की पसंद और उनकी डिजिटल समझ को भी ध्यान में रखा जाता है. बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मीडिया और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे टेक और ऑटो जर्नलिज्म की ओर अपना फोकस बढ़ाया. शिक्षा पूरी करने के बाद अंकित ने Zee News में करीब 1 साल तक काम किया, जहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क वर्क, कंटेंट रिसर्च और न्यूज राइटिंग की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उन्हें तेजी से बदलते न्यूज रूम माहौल में काम करने की क्षमता और खबरों को सरल तरीके से प्रस्तुत करने की कला सिखाई. अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की लाइफस्टाइल और फैसलों को भी असर डालती हैं. इसी सोच के साथ वह SEO-ऑप्टिमाइज्ड, रिसर्च-बेस्ड और सरल भाषा में कंटेंट तैयार करते हैं, ताकि पाठकों को सही और उपयोगी जानकारी आसानी से मिल सके.

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