रांची विवि को हाईकोर्ट का अल्टीमेटम: ILS की बदहाली पर बरसे जस्टिस, कहा- 8 जून तक सुधारें व्यवस्था वरना…

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Jharkhand High Court

झारखंड हाईकोर्ट, Pic Credit- Jharkhand High Court WEB Photo GALLERY

Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने रांची विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज (ILS) में व्याप्त कमियों पर सख्त नाराजगी जताई है. बीसीआई की रिपोर्ट में बिना लॉ बैकग्राउंड के निदेशक और शिक्षकों की कमी जैसी गंभीर बातें सामने आने के बाद कोर्ट ने 8 जून तक सुधार का आदेश दिया है.

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रांची, (राणा प्रताप की रिपोर्ट): झारखंड उच्च न्यायालय ने रांची विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज (ILS) की बदहाली और वहां संसाधनों के घोर अभाव पर कड़ा रुख अपनाया है. अदालत ने संस्थान में फैकल्टी और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन को आगामी 8 जून तक सभी कमियों को दूर करने का अंतिम अल्टीमेटम दिया है. अदालत ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर सुधार सुनिश्चित कर अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) पेश की जाए.

BCI की रिपोर्ट ने खोली व्यवस्था की पोल

अदालत के पिछले आदेश के आलोक में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) की टीम ने 5 मई को संस्थान का व्यापक निरीक्षण किया था. सुनवाई के दौरान जब बीसीआई की निरीक्षण रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत की गई, तो उसमें संस्थान की शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए. रिपोर्ट में बताया गया कि संस्थान के वर्तमान निदेशक विधि (Law) पृष्ठभूमि से नहीं हैं, जो एक कानूनी शिक्षण संस्थान के लिए अनिवार्य है. संस्थान में स्थायी निदेशक की नियुक्ति नहीं की गई है और शिक्षकों (फैकल्टी) की संख्या भी न्यूनतम आवश्यकता से काफी कम है. साथ ही कार्यरत शिक्षकों को यूजीसी (UGC) के निर्धारित मानक के अनुरूप वेतनमान नहीं दिया जा रहा है. छात्रों के व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए मूट कोर्ट की व्यवस्था संतोषजनक नहीं है और लाइब्रेरी में आवश्यक कानूनी पुस्तकों का भी भारी अभाव पाया गया है.

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छात्रों के भविष्य से जुड़ा है मामला

उल्लेखनीय है कि यह याचिका विद्यार्थी अंबेश चौबे एवं अन्य की ओर से दायर की गई थी. छात्रों ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि पर्याप्त बुनियादी सुविधाओं और योग्य शिक्षकों के अभाव में उनका शैक्षणिक भविष्य अधर में लटका हुआ है. इससे पूर्व 10 अप्रैल को हुई सुनवाई में कोर्ट ने बीसीआई को इस संस्थान का निष्पक्ष निरीक्षण करने का निर्देश दिया था, जिसके बाद अब विश्वविद्यालय की लापरवाही खुलकर सामने आ गई है.

अगली सुनवाई 9 जून को

हाईकोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अब अगली सुनवाई के लिए 9 जून 2026 की तिथि निर्धारित की है. अब देखना यह होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन कोर्ट द्वारा दी गई संक्षिप्त मोहलत के भीतर इन गंभीर कमियों को कैसे दूर करता है. यदि समय पर सुधार नहीं किए गए, तो विश्वविद्यालय को अदालत की अवमानना और सख्त कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है.

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समीर उरांव

लेखक के बारे में

By समीर उरांव

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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