सहायक आचार्य नियुक्ति पर झारखंड हाइकोर्ट का बड़ा फैसला, JSSC को सीट सुरक्षित रखने का आदेश

झारखंड हाईकोर्ट
Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने सहायक आचार्य नियुक्ति परीक्षा के संशोधित रिजल्ट को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए JSSC को प्रार्थियों के लिए सीट सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है. टेट पात्रता परीक्षा में आरक्षण के लाभ और संशोधित मेरिट लिस्ट से जुड़े इस विवाद की अगली सुनवाई 7 जुलाई को होगी. पूरी कानूनी रिपोर्ट यहां पढ़ें.
Jharkhand High Court, रांची (राणा प्रताप की रिपोर्ट): झारखंड उच्च न्यायालय ने सहायक आचार्य प्रतियोगिता परीक्षा के संशोधित रिजल्ट और नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े विवाद पर एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है. जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने अगस्त 2025 में जारी संशोधित मेरिट लिस्ट को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) को स्पष्ट निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता अभ्यर्थियों के लिए पद सुरक्षित रखे जाएं. अदालत ने यह अंतरिम राहत प्रार्थियों का पक्ष सुनने के बाद प्रदान की है.
क्या है पूरा विवाद?
मामले की जड़ में राज्य सरकार द्वारा मेरिट लिस्ट में किया गया वह संशोधन है, जिसके कारण पूर्व में चयनित कई अभ्यर्थी नियुक्ति की दौड़ से बाहर हो गए. प्रार्थी आशा कुमारी एवं अन्य की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि जेएसएससी द्वारा जारी प्रारंभिक मेरिट लिस्ट में उनका चयन हो चुका था. उनके नामों की अनुशंसा सरकार को भेजी जा चुकी थी और जिला स्तर पर काउंसलिंग की प्रक्रिया भी पूरी हो गई थी. विवाद तब शुरू हुआ जब सरकार ने यह निर्णय लिया कि आरक्षित वर्ग के जिन अभ्यर्थियों ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) में आरक्षण का लाभ लिया है, उन्हें सहायक आचार्य की मुख्य नियुक्ति प्रक्रिया में दोबारा आरक्षण का लाभ नहीं दिया जाएगा. इस नीतिगत बदलाव के कारण सामान्य कोटि में चयनित कई आरक्षित अभ्यर्थी वापस अपनी कोटि में आ गए, जिससे पहले से चयनित अभ्यर्थियों का नाम अंतिम सूची से बाहर हो गया.
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अदालत में दी गई दलीलें
सुनवाई के दौरान प्रार्थियों की ओर से वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार और उनकी टीम ने दलील दी कि जेटेट (JTET) केवल एक पात्रता परीक्षा है. नियुक्ति नियमावली या इसके विज्ञापन में कहीं भी यह उल्लेख नहीं है कि पात्रता परीक्षा में आरक्षण का लाभ लेने से मुख्य नियुक्ति पर कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. उन्होंने तर्क दिया कि पात्रता परीक्षा के अंकों का लाभ लेने का नियुक्ति प्रक्रिया के आरक्षण से कोई कानूनी संबंध नहीं है.
अगली सुनवाई 7 जुलाई को
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन ने पक्ष रखते हुए मामले की विस्तृत व्याख्या के लिए समय मांगा. अदालत ने महाधिवक्ता के आग्रह को स्वीकार करते हुए मामले की अगली विस्तृत सुनवाई के लिए 7 जुलाई 2026 की तिथि निर्धारित की है. तब तक के लिए जेएसएससी को विवादित सीटों पर यथास्थिति बनाए रखने और प्रार्थियों के हित में सीट सुरक्षित रखने का आदेश दिया गया है. इस आदेश के बाद अब नियुक्तियों के अंतिम भविष्य पर फैसला जुलाई में होने वाली सुनवाई के दौरान होगा.
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By Sameer Oraon
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