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डुआर्स से पलायन कर रहे श्रमिक

Updated at : 13 Sep 2019 1:48 AM (IST)
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डुआर्स से पलायन कर रहे श्रमिक

10 महीने से बंद है डुआर्स का मुजनाई चाय बागान बागान के युवा पढ़ाई छोड़ काम की तलाश में निकले कालचीनी : लगभग 10 महीने से अलीपुरद्वार जिले के मदारीहाट ब्लॉक स्थित मुजनाई चाय बागान बंद पड़ा हुआ है. पैसे के अभाव से भूख के मारे यहां के चाय श्रमिक देश के अन्य-अन्य राज्यों में […]

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10 महीने से बंद है डुआर्स का मुजनाई चाय बागान

बागान के युवा पढ़ाई छोड़ काम की तलाश में निकले

कालचीनी : लगभग 10 महीने से अलीपुरद्वार जिले के मदारीहाट ब्लॉक स्थित मुजनाई चाय बागान बंद पड़ा हुआ है. पैसे के अभाव से भूख के मारे यहां के चाय श्रमिक देश के अन्य-अन्य राज्यों में पलायन हो रहे हैं. बंद मुजनाई चाय बागान में पुरुषों की संख्या शून्य होती जा रही है. उल्लेखनीय है कि विगत 2018 के दिसंबर महीने से मुजनाई चाय बागान बंद पड़ा हुआ है, जिसके कारण यहां के लगभग हजारों चाय श्रमिक परिवारों का भविष्य अनिश्चित हो गया है.

चुनाव से पहले बागान में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं का आना जाना रहा एवं उनके द्वारा यहां के श्रमिकों को आश्वासन दिया गया था कि जल्द बागान खुल जाएगी, लेकिन बागान खुलना तो दूर की बात है अब बागान में नेताओं का चेहरा देखने तक को नहीं मिल रहा. वहीं बागान बंद होने के कारण यहां के चाय श्रमिकों की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय हो चुकी है. इसी बीच भूख के मारे यहां के चाय श्रमिक देश के विभिन्न राज्यों में जा चुके हैं.

बागान में श्रमिकों की संख्या दिन-प्रतिदिन कम की जा रही है एवं जो श्रमिक अभी भी बागान में निवास कर रहे हैं, वे किसी तरह आधे पेट खाकर बंद बागान खुलने की आस में अपना दिन यापन कर रहे हैं. वही यह भी जानकारी प्राप्त हुई है कि बागान के कुछ छात्र-छात्राएं आर्थिक अभाव से पढ़ाई लिखाई छोड़कर काम के खोज में इधर-उधर भटक रहे हैं. वहीं इस विषय में श्रमिकों ने बताया कि बागान की बंद होने के साथ-साथ हम पर इस तरह पहाड़ टूटा कि हम करे तो क्या करें.

बागान बंद होने से हमारे बच्चे पेट के लिए पढ़ाई लिखाई छोड़कर काम की खोज में इधर-उधर भटक रहे हैं. कितने श्रमिक यहां से अन्य राज्यों में पलायन कर चुके हैं, आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण चिकित्सा के अभाव में अबतक कितने श्रमिकों की जान चली गयी और जितने भी श्रमिक अभी यहां निवास कर रहे है वे बिना खाए बागान खुलने की आश में दिन यापन कर रहे हैं. श्रमिकों ने फिर कहा कि हमें और कुछ नहीं चाहिए सिर्फ हमारा बंद बागान जल्द से जल्द खोल दिया जाये, जिससे हम अपना परिवार चला पाए एवं अपने बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल बना सके.

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