अलग राज्य के गठन में कई बाधाओं का हवाला, अब सवा करोड़ गोरखाओं की बात करने में जुटी भाजपा

Published at :13 Dec 2017 9:59 AM (IST)
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अलग राज्य के गठन में कई बाधाओं का हवाला, अब सवा करोड़ गोरखाओं की बात करने में जुटी भाजपा

सिलीगुड़ी: दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में अलग गोरखालैंड राज्य की मांग में जारी आंदोलन के बीच भाजपा ने सिर्फ पहाड़ के 10 से 12 लाख गोरखाओं की नहीं बल्कि पूरे देश में रह रहे सवा करोड़ गोरखाओं के हक और सुरक्षा की बात की है. इससे जाहिर है कि पहाड़ पर गोरखालैंड राज्य की मांग को […]

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सिलीगुड़ी: दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में अलग गोरखालैंड राज्य की मांग में जारी आंदोलन के बीच भाजपा ने सिर्फ पहाड़ के 10 से 12 लाख गोरखाओं की नहीं बल्कि पूरे देश में रह रहे सवा करोड़ गोरखाओं के हक और सुरक्षा की बात की है. इससे जाहिर है कि पहाड़ पर गोरखालैंड राज्य की मांग को लेकर आंदोलन की अगुवाई कर रहे गोजमुमो के विमल गुरूंग को तगड़ा झटका लगा है.

हाल में ही में हुए आंदोलन तथा 104 दिनों तक पहाड़ बंद के दौरान हुई हिंसक घटनाओं को लेकर एक दर्जन से भी अधिक मुकदमा दर्ज होने के बाद श्री गुरूंग भूमिगत हो गए हैं और सुप्रीम कोर्ट में उनका मुकदमा चल रहा है. गोजमुमो में भी इसबीच दो भाग हो चुका है. विमल गुरूंग से अलग होकर विनय तमांग गोजमुमो के बॉस बने हैं. उन्होंने अलग राज्य की मांग को लेकर आंदोलन को तिलांजलि दे दी है. जबकि विमल गुट के तमाम नेता यो तो गिरफ्तार हो चुके हैं या फिर भूमिगत हो गए हैं. इसलिए विमल गुट के किसी नेता से इस बात पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल पा रही है. भाजपा के इस नये स्टैंउ का अंदाजा हाल में संपन्न भाजपा में गोरखा पदाधिकारियों की बैठक के बाद लगा है. सिलीगुड़ी में दो दिनों पहले ही भाजपा के गोरखा पदाधिकारियों की एक बैठक हुई थी. इसमें कई प्रस्ताव पारित किए गए.


मिली जानकारी के अनुसार इस प्रस्ताव में कहा गया है कि भारत के सवा करोड़ से ऊपर गोरखाओं के राष्ट्रीय पहचान संकट के मुद्दे पर बहुत सालों से आन्दोलन चल रहा है. राष्ट्रीय पहचान सुनिश्चित न होने के कारण अपनी ही मातृभूमि में राष्ट्रभक्त गोरखा जाति के लोग खुद को दोयम दर्जे का नागरिक और असुरक्षित महसूस करते हैं. बैठक में पारित प्रस्ताव में आगे कहा गया है कि राष्ट्रीय शासन में भागीदारी ही एक ऐसा उपाय है जिससे गोरखाओं की राष्ट्रीय पहचान पुख्ता की जा सकती है. गोरखालैंड की मांग के आधार में भी मूलत: यही सोच है .हांलाकि इस मांग में कई बाधाएं भी है. प्रस्ताव में साफ कहा गया है कि दार्जिलिंग पहाड़ पर अलग राज्य बनने से देश की सुरक्षा को खतरा होने की आशंका है. उसमें कहा गया है कि राजनीतिक रूप से संवेदनशील अन्तरराष्ट्रीय सीमान्त क्षेत्र में गोरखालैंड जैसे छोटे राज्य के गठन से राष्ट्रीय सुरक्षा में आंच आने की आशंका और बंगाल के साथ सत्ता-संघर्ष की संभावना है.इसके साथ ही गोरखाओं की राष्ट्रीय पहचान और राजनैतिक सुरक्षा की इस मांग में भारत के डेढ़ करोड़ में से केवल 10-12 लाख गोरखाओं को ही प्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है. इससे भी नया राज्य का बन पाना संभव नहीं दिखता.
इससे पहले गोरखा-भाजपा पदाधिकारियों की राष्ट्रीय चिंतन सभा में डीबी चौहान, अध्यक्ष, सिक्किम भाजपा, मुख्य अतिथि पंचानंद रावत, प्रभारी, भाजपा (सिक्किम), विशिष्ट अतिथिगण में आरपी शर्मा, लोकसभा सांसद (असम), सीपी गिरि, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, हाम्रो स्वाभिमान, किशोर उपाध्याय, राज्य सचिव भाजपा (असम), भास्कर शर्मा, विधायक भाजपा (असम), गणेश लिम्बू, विधायक भाजपा (असम), प्रतिनिधियों में असम, मेघालय, मिजोरम, मणिपुर, अरुणाचल, सिक्किम, पश्चिम बंगाल, उत्तराखण्ड के भाजपा में गोरखा नेता शामिल हुए.
विशेषज्ञ कमेटी का किया गया गठन
इस चिंतन सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि भारत के हर प्रान्त में जिले स्तर से लेकर राज्य स्तर तक भाजपा संगठन में गोरखाओं का योगदान रहा है. इसके अलावा कल्याण आश्रम, विद्या भारती, सरस्वती शिशु मन्दिर, हाम्रो स्वाभिमान और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे भाजपा सहयोगी संस्थाओं में भी दीर्घ काल से गोरखाओं का जुड़ाव रहा है .इसी बात को मद्दे नजर रखते हुए गोरखा भारती विचार मंच ने भारत के सारे गोरखा-भाजपाई पदाधिकारियों और भाजपा के सहयोगी संस्थाओं में पदासीन गोरखाओं को लेकर एक राष्ट्रीय चिन्तन सभा का आयोजन किया गया है. इसी चिंतन सभा में एक विशेषज्ञ कमिटी का भी गठन किया गया. इस कमेटी में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष तथा विधायक दिलिप घोष के अलावा,डी.बी.चौहान, प्रदेश अध्यक्ष, सिक्किम,आर.पी.शर्मा, लोकसभा सांसद, असम,श्रीमती राज्यलक्ष्मी शाह, लोकसभा सांसद, उत्तराखण्ड,किशोर उपाध्याय, सचिव-राज्य समिति, असम,भाष्कर शर्मा, विधायक, भाजपा,गणेश लिम्बू, विधायक, असम,सी. पी. गिरी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, हाम्रो स्वाभिमान,बी.बी.छेत्री, नन्दिनी थापा, मनोज देवान, गंगा प्रसाद शर्मा, सी.के.श्रेष्ठ, राष्ट्रीय संयोजक, गोरखा भारती विचार मंच का नाम शामिल है. इस संबंध श्री श्रेष्ठ ने बताया कि इस चिंतन बैठक में गोरखाओं की समस्याओं को लेकर विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया.
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