सिलीगुड़ी में श्रीमद् भागवत कथा का हुआ आगाज

Published at :28 Nov 2017 10:46 AM (IST)
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सिलीगुड़ी में श्रीमद् भागवत कथा का हुआ आगाज

सिलीगुड़ी. वृंदावनधाम निवासी ब्रजरसिक पंडित श्री बिहारीलालजी के अगुवायी में सोमवार से सिलीगुड़ी में संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा का आगाज रंगारंग कलश यात्रा से हुआ. लाल-पीली साड़ियों में दुल्हन की तरह सुसज्जित युवतियां-महिलाएं जहां कलश के साथ कलश यात्रा में शामिल हुयीं वहीं, बड़ी संख्या में श्रीकृष्ण भक्त युवक-पुरुष भी एक ही रंग के कुर्ता-पयजामा […]

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सिलीगुड़ी. वृंदावनधाम निवासी ब्रजरसिक पंडित श्री बिहारीलालजी के अगुवायी में सोमवार से सिलीगुड़ी में संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा का आगाज रंगारंग कलश यात्रा से हुआ. लाल-पीली साड़ियों में दुल्हन की तरह सुसज्जित युवतियां-महिलाएं जहां कलश के साथ कलश यात्रा में शामिल हुयीं वहीं, बड़ी संख्या में श्रीकृष्ण भक्त युवक-पुरुष भी एक ही रंग के कुर्ता-पयजामा धारण कर कलश यात्रा में शामिल हुए. आठ दिवसीय कथा आयोजक कमेटी सिलीगुड़ी जिंदल परिवार के मुख्य यजमान विकास जिंदल उर्फ जुगनू व अभिषेक जिंदल उर्फ मोंटी श्रीमद भागवत को सिर पर रखकर कलश यात्रा में पैदल चले.

यात्रा में शामिल भक्तों द्वारा लगाये गये भगवान श्रीकृष्ण और श्रीमद् भागवत के जयकारों से पूरा शहर गूंजायमान हो उठा. यह रंगारंग कलश यात्रा शहर के खालपाड़ा के श्रीराधा-कृष्ण ठाकुरबाड़ी से शुरु हुई और अग्रसेन रोड स्थित बनिक भवन में पहुंचकर धर्मसभा में तब्दील हो गयी. ब्रजरसिक पंडित श्री बिहारीलालजी ने श्रीमद् भागवत को व्यासपीठ पर रखकर पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की.

बिहारीजी ने भागवत की महिमा का किया संगीतमय बखान
कथा के पहले दिन श्री बिहारीजी ने भागवत की महिमा का संगीतमय बखान किया. उन्होंने कहा कि परमात्मा से आत्मा के मिलन का और मोक्ष प्राप्ति का सबसे सुगम मार्ग भागवत ही है. हर रोज सच्चे मन से भागवत का अध्ययन करना या फिर श्रवण करने मात्र से ही मुक्ति मिल जाती है. इंसान का हर कष्ट, दुख हरनेवाली है भागवत कथा. भव्य व अलौकिक व्यासपीठ पर विराजमान ब्रजरसिक श्री बिहारीजी ने कहा कि भागवत की महिमा जितनी भी की जाये कम है.

इंसान की पूरी जिंदगी का सार है श्रीमद् भागवत. श्री बिहारीजी ने पूरी कथा के दौरान कई दफा भजन-गीतों के मारफत भी भागवत की महिमा का संगीतमय बखान किया और भक्तों ने भी भागवत की महिमा के सागर में आस्था व आनंद की डुबकी लगायी. आठ दिवसीय कथा के पहले दिन भारी तादाद में भक्तों ने कथा श्रवण किया. साथ ही पड़ोसी राज्य बिहार के किशनगंज, ठाकुरगंज व अन्य जगहों से भी बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए. आठ दिवसीय कथा के दौरान भक्तों को किसी तरह की तकलीफ न हो इसका भी पूरा ख्याल रखा गया है. इसके तहत समुचित इंतजाम किया गया है.
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