वेयरहाउस के किराये में भी होता है लाखों का घपला

Published at :25 Nov 2017 6:21 AM (IST)
विज्ञापन
वेयरहाउस के किराये में भी होता है लाखों का घपला

अपनी जगह दूसरों को देते हैं कई ब्रोकर 16 रुपये प्रति बोरी किराये का एक हिस्सा पा जाते हैं वापस वेयरहाउस में चाय रखने में गड़बड़ी पर ही हुई ब्रोकर कंपनियों पर कार्रवाई वेयर हाउसों का किराया टी बोर्ड और टी ऑक्शन कमेटी करते हैं निर्धारित सिलीगुड़ी : चाय उद्योग के कारोबार से बागान मालिक, […]

विज्ञापन

अपनी जगह दूसरों को देते हैं कई ब्रोकर

16 रुपये प्रति बोरी किराये का एक हिस्सा पा जाते हैं वापस
वेयरहाउस में चाय रखने में गड़बड़ी पर ही हुई ब्रोकर कंपनियों पर कार्रवाई
वेयर हाउसों का किराया टी बोर्ड और टी ऑक्शन कमेटी करते हैं निर्धारित
सिलीगुड़ी : चाय उद्योग के कारोबार से बागान मालिक, छोटे चाय पत्ता उत्पादक, बॉटलीफ फैक्ट्रियां, बागान की टी फैक्ट्रियां, बायर, सेलर, ट्रेडर्स व ब्रोकर्स जुड़े होते हैं. टी बोर्ड, टी ऑक्शन कमेटी चाय उद्योग को नियंत्रित करने का काम करती हैं. साथ ही पांच बायर, पांच सेलर, पांच ब्रोकर, टी बोर्ड का प्रतिनिधि और डीएम को मिलाकर कुल 17 प्रतिनिधि सदस्यों की एक गवर्निंग बॉडी है. इनके नियंत्रण में ही चाय नीलामी की पूरी प्रक्रिया होती है. चाय की बोली की प्रक्रिया ऑनलाइन होती है. नीलामी हुई चाय की बोरियां टी बोर्ड से लाइसेंस प्राप्त और टी ऑक्शन कमेटी से रजिस्टर्ड टी वेयरहाउसों (चाय गोदामों) में ही रखने का प्रावधान है.
हाल ही में टी ऑक्शन कमेटी ने जिन चार ब्रोकर कंपनियों गुड प्वाइंट टी ब्रोकर्स, कंटेमप्ररी ब्रोकर प्राइवेट लिमिटेड, पारकुन इंडिया लिमिटेड व टी चैम्पियन प्राइवेट लिमिटेड के चाय नीलामी में शामिल होने पर दो सप्ताह के लिए रोक लगायी है. इसकी वजह वेयरहाउसों में इन चारों ब्रोकर कंपनियों की चाय की बोरियों के रखरखाव में कमेटी द्वारा खामी पाया जाना है. इन कंपनियों के मालिकों का दावा है कि चाय के सीजन में हमेशा ही इस तरह की परेशानी चाय कारोबारियों को झेलनी पड़ती है. वेयरहाउसों में हर सीजन में ही बोरियों को रखने का अतिरिक्त दबाव बना रहता है. मजबूरन ब्रोकरों को वेयरहाउस में दूसरे ब्रोकरों की खाली जगहों पर बोरियों को रखना पड़ता है. इसी की वजह से उपरोक्त चार ब्रोकर कंपनियों पर कार्रवाई की गयी.
टी वेयरहाउसों में चाय की बोरियों को रखने का किराया टी बोर्ड और टी ऑक्शन कमेटी निर्धारित करते हैं. फिलहाल 16 रुपये प्रति बोरी किराया निर्धारित है. आरोप है कि कई कारोबारी वेयरहाउसों के किराये में भी घपला कर रहे हैं. विश्वस्त सूत्रों की मानें तो किराये में घपले का यह खेल वेयरहाउस के मालिक और चाय की बोरियां रखनेवाले कारोबारी आपसी सांठगांठ से करते हैं. वेयरहाउस का किराया 16 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से कारोबारी भुगतान तो कर देते हैं, लेकिन बाद में पांच रुपये से 10 रुपये तक प्रति बोरी के हिसाब से किराया काटकर बाकी रुपया वापस भी ले लेते हैं.
उदाहरण के लिए, एक टी ब्रोकर को चाय की 50 हजार बोरियां वेयरहाउस में रखवानी हैं. 16 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से आठ लाख रुपये किराया का भुगतान वेयरहाउस को करना होगा और अगर पांच रुपये प्रति बोरा के हिसाब से रुपये वापस मिलता है तो किराये का यह आंकड़ा 2.50 लाख रुपये होता है. किराये में घपले का यह खेल लाखों रुपये में खेला जाता है.
गुड प्वाइंट टी ब्रोकर्स से नहीं जुड़े हैं रामावतार बरेलिया : रामावतार बरेलिया न तो गुड प्वाइंट टी ब्रोकर्स के मालिक हैं और न ही पार्टनर. श्री बरेलिया को काफी करीब से पहचानने वालों का भी दावा है कि उनका इस कंपनी से कोई लेना-देना ही नहीं है. श्री बरेलिया सिलीगुड़ी के चेकपोस्ट स्थित अरुण टी वेयर हाउस के मालिक हैं.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola