नर्सिंगहोम पर लापरवाही बरतने का आरोप

सिलीगुड़ी. नवजात की मौत पर एक परिवार वालों ने निजी अस्पताल पर चिकित्सा में लापरवाही का आरोप लगाया है. जन्म के दस दिन बाद स्वस्थ बच्चे की अचानक मौत से परिवार सदमे में हैं. किसी परिवार का पहला बच्चा डॉक्टरों की लापरवाही से मारा जाये, तो पीड़ित परिवार के दुख का अंदाजा लगा पाना भी […]
सिलीगुड़ी. नवजात की मौत पर एक परिवार वालों ने निजी अस्पताल पर चिकित्सा में लापरवाही का आरोप लगाया है. जन्म के दस दिन बाद स्वस्थ बच्चे की अचानक मौत से परिवार सदमे में हैं. किसी परिवार का पहला बच्चा डॉक्टरों की लापरवाही से मारा जाये, तो पीड़ित परिवार के दुख का अंदाजा लगा पाना भी मुश्किल है. यह दर्दनाक घटना जलपाईगुड़ी शहर के रायकत पाड़ा निवासी शिवेंदु पाल के साथ घटी है.
उन्होंने सिलीगुड़ी के हाकिमपाड़ा में स्थित मित्रा नर्सिंग होम के खिलाफ लापरवाही के आरोप पर जिला मुख्य स्वास्थअधिकारी(सीएमओएच) से शिकायत करने के साथ राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी पत्र लिखा है.परिवार ने मुख्यमंत्री से इंसाफ की गुहार लगायी है.
मिली जानकारी के अनुसार पेशे से मेडिकल रिपरजेंटेटिव शिवेंदु पाल की पत्नी को पहला बच्चा होने वाला था. गर्भधारण के शुरूआती दौर में उन्होंने जलपाईगुड़ी के ही एक चिकित्सक से सलाह ले रहे थे. आठवें महीने उनकी पत्नी की हालत बिगड़ने पर डॉक्टर ने उन्हें मित्रा नर्सिंगहोम में भर्ती कराने की सलाह दी. परामर्श के मुताबिक शिवेंदु ने गर्भवती पत्नी को बीते 20 अक्तूबर की सुबह नर्सिंगहोम में भर्ती कराया. उसी रात करीब 12 बजे महिला ने एक बच्चे को जन्म को दिया. हांलाकि यह बच्चा समय से पहले आंठवे महीने में ही जन्म ले लिया था. जन्म के समय बच्चे का वजन 2 किलो 190 ग्राम के करीब था. समय से पहले जन्म होने की वजह से मित्रा नर्सिंग होम के डॉक्टरों ने उसे आठ दिनों तक ऑबजरवेशन में रखा.
28 अक्तूबर को डॉक्टर ने बच्चे को जनरल वार्ड में सिफ्ट कर दिया. जबकि 30 अक्तूबर की शाम को बच्चा अचानक मर गया. पत्रकारों को संबोधित करते हुए शिवेंदु ने बताया कि 30 अक्तूबर को नर्सिंग होम की एक आया बच्चे को चम्मच से मां का ही दूध पिला रही थी. उसी समय बच्चे की हालत बिगड़ गयी. कुछ ही देर बाद डाक्टर ने दो वाक्य (आई ट्राई माइ बेस्ट बट आइ एम सॉरी) बोल कहर भरा खबर सुनाया. शिवेंदु पाल ने मित्रा नर्सिंग होम पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि बच्चे की देखरेख कर रहे डॉक्टर ने हमेशा ही बात को बदल-बदल कर बताया. कभी डॉक्टर कहते थे कि बच्चे को निमोनिया है, कभी कहते कि कैल्सशयम का अभाव है तो कभी ब्लड इन्फेक्शन है. बच्चे की मौत की जानकारी देते समय डॉक्टर ने स्वीकार किया कि गले में दूध अटकने की वजह से मौत हुयी है. जबकि डेथ सर्टिफिकेट में मौत का कारण निमोनिया बताया गया है.
बच्चे की मौत के लिए पूरी तरह से अस्पताल प्रबंधन जिम्मेदार है. उन्होंने आगे कहा कि हमारे परिवार का जो खो गया वह वापस तो नहीं आ सकता लेकिन अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्यवायी आवश्य होनी चाहिए ताकि भविष्य में किसी दूसरी मां को कोख सूनी होने का दुख ना झेलना पड़े. उन्होंने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ जिला मुख्य स्वास्थ अधिकारी, सिलीगुड़ी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराने के साथ राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी घटना से अवगत कराया है.
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