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दुष्कर्म पीड़िता की मौत होने या कोमा में जाने पर दोषी को 10 दिन में होगी फांसी

Updated at : 04 Sep 2024 1:25 AM (IST)
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दुष्कर्म पीड़िता की मौत होने या कोमा में जाने पर दोषी को 10 दिन में होगी फांसी

राज्य विधानसभा ने दुष्कर्म रोधी विधेयक सर्वसम्मति से किया पारित, भाजपा ने किया समर्थन

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कोलकाता. राज्य विधानसभा ने मंगलवार को विपक्ष के पूर्ण समर्थन के साथ दुष्कर्म रोधी विधेयक सर्वसम्मति से पारित कर दिया. हालांकि, विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के विधेयक में प्रस्तावित संशोधन को स्वीकार नहीं किया गया. राज्य के कानून मंत्री मलय घटक ने यह विधेयक पेश किया. इसके मसौदे में दुष्कर्म पीड़िता की मौत होने या उसके स्थायी रूप से अचेत अवस्था (कोमा) में चले जाने की सूरत में दोषियों के लिए मृत्युदंड का प्रावधान किया गया है. इसके अतिरिक्त, मसौदे में प्रावधान किया गया है कि दुष्कर्म और सामूहिक दुष्कर्म के दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दी जाये और उन्हें पेरोल की सुविधा न दी जाये. ‘अपराजिता महिला एवं बाल विधेयक (पश्चिम बंगाल आपराधिक कानून एवं संशोधन) विधेयक 2024’ नाम के इस प्रस्तावित कानून का उद्देश्य दुष्कर्म और यौन अपराधों से संबंधित नये प्रावधानों के जरिये महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा मजबूत करना है. गौरतलब है कि शहर के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में पिछले महीने एक प्रशिक्षु चिकित्सक के साथ दुष्कर्म और हत्या की घटना के बाद सोमवार को विधानसभा का दो दिवसीय विशेष सत्र बुलाया गया था. इस सत्र में सत्ता पक्ष के साथ विपक्ष के लगभग सभी विधायकों ने हिस्सा लिया. विधेयक पर करीब दो घंटे तक चर्चा हुई. विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी, भाजपा विधायक शिखा चटर्जी और अग्निमित्रा पाल ने चर्चा में भाग लिया. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और संसदीय कार्यमंत्री शोभन देव चट्टोपाध्याय ने सत्ता पक्ष की तरफ से चर्चा में हिस्सा लिया. अब विधानसभा से पारित इस विधेयक को राज्यपाल डॉ सीवी आनंद बोस के पास भेजा जायेगा. राज्यपाल इस बिल पर हस्ताक्षर कर राष्ट्रपति को भेजेंगे. राष्ट्रपति की सहमति पर ही यह विधेयक कानून का रूप लेगा.

केंद्रीय कानून में संशोधन ला सकती है राज्य सरकार : मुख्यमंत्री

आरजी कर की घटना के बाद अपराधियों को कड़ी सजा देने के लिए एक नया विधेयक पेश किया गया है. ”भारतीय न्याय संहिता” से अलग राज्य सरकार ने अधिक कड़े कानून लागू करने के लिए विधेयक को विधानसभा से पारित कराया है. ऐसे में विपक्ष के कई लोगों ने सवाल उठाया कि केंद्रीय कानून के बावजूद राज्य अलग-अलग विधेयक क्यों ला रहे हैं? मंगलवार को विधानसभा के विधेयक पेश किये जाने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बताया कि नये बिल में क्या-क्या बदलाव किये गये हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि नये बिल में सजा बढ़ाने, त्वरित जांच और त्वरित न्याय पर जोर दिया गया है. उन्होंने कहा: नया कानून यह सुनिश्चित करेगा कि यौन उत्पीड़न के लिए कड़ी से कड़ी सजा हो.

विधेयक को कानून का रूप देने के लिए विपक्ष राज्यपाल से करे अपील

मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष राज्यपाल से कहे कि वह बिना किसी देरी के इस विधेयक पर हस्ताक्षर करें. उन्होंने कहा कि इसका प्रभावी क्रियान्वयन राज्य सरकार की जिम्मेदारी होगी. सुश्री बनर्जी ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज की जूनियर महिला डॉक्टर से दुष्कर्म एवं हत्या की जघन्य घटना पर दुख जताते हुए कहा: हम सीबीआइ से न्याय चाहते हैं और दोषियों के लिए फांसी की मांग करते हैं. सदन में थोड़े हंगामे के बाद विधेयक को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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