सुप्रीम ऑडर भी रहा बेअसर, चुनाव आयोग और बंगाल सरकार के बीच विवाद बरकरार

Updated at : 13 Feb 2026 12:57 PM (IST)
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सुप्रीम ऑडर भी रहा बेअसर, चुनाव आयोग और बंगाल सरकार के बीच विवाद बरकरार

SIR in Bengal: आयोग का दावा है कि उसे अभी तक पूरी जानकारी नहीं मिली है. 8,505 लोगों की एक सूची व्हाट्सएप पर आयोग को भेजी गई है. इनमें से 2,000 लोगों के बारे में राज्य सरकार ने जानकारी नहीं दी है.

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SIR in Bengal: कोलकाता: सुप्रीम ऑडर भी बेअसर रहा. चुनाव आयोग और बंगाल सरकार के बीच अधिकारियों की सूची का विवाद बरकरार है. पिछली सुनवाई में इस संबंध में राज्य को विशेष निर्देश भी दिए गए थे. सर्वोच्च न्यायालय के उस आदेश के बाद भी विवाद का समाधान नहीं हुआ है. चुनाव आयोग ने राज्य सरकार के खिलाफ फिर से बड़ी शिकायत दर्ज कराई है. हालांकि 8505 अधिकारियों की सूची भेजी जा चुकी है, लेकिन कई अधिकारियों की जानकारी अभी तक आयोग तक नहीं पहुंची है.

आयोग ने की राज्य सरकार की शिकायत

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से ठीक 24 घंटे पहले, राज्य सरकार ने जल्दबाजी में आयोग को 8,505 लोगों के नाम सौंप दिए. बाद में सुनवाई में आयोग ने कहा कि नाम सौंपने के बावजूद उन अधिकारियों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि उन 8,505 ग्रुप बी अधिकारियों की सूची वाली रिपोर्ट मंगलवार शाम 5 बजे तक डीईओ और ईआरओ को सौंपी जाए. उनकी जानकारी की जांच की जाएगी और यह निर्णय लिया जाएगा कि किसे काम सौंपा जाएगा.

अब तक 2000 नामों का नहीं मिला डिटेल

मंगलवार को मिले इस आदेश का शुक्रवार हो गया. आयोग का दावा है कि उसे अभी तक पूरी जानकारी नहीं मिली है. 8,505 लोगों की एक सूची व्हाट्सएप पर आयोग को भेजी गई है. इनमें से 2,000 लोगों के बारे में राज्य सरकार ने जानकारी नहीं दी है. इतना ही नहीं, आयोग को यह भी पता चला है कि इनमें से 500 लोग पहले से ही एयरो (पर्यवेक्षक) के रूप में काम कर रहे हैं. सवाल यह उठता है कि एयरो के रूप में काम करते हुए कोई व्यक्ति माइक्रोऑब्जर्वर के रूप में कैसे काम कर सकता है?

भाजपा ने साधा ममता सरकार पर निशाना

भाजपा इस मुद्दे पर राज्य सरकार को निशाना बना रही है. भाजपा नेता सजल घोष ने कहा- इसके बावजूद राज्य सरकार ने 500 लोगों के नाम भेजे हैं. दरअसल, चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में झूठ बोला है. सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य से कहा- हमने 4 तारीख को नामों की सूची मांगी थी. नाम 7 तारीख को दिए गए. नाम 4 या 5 तारीख को भी दिए जा सकते थे. हम इस मुद्दे पर कोई बहस नहीं चाहते. अगर बहस होती है, तो हमें मुख्य सचिव को निर्देश देना होगा.

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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