पश्चिम बंगाल में सातवें वेतन आयोग का गठन, सरकारी कर्मचारियों के लिए शुभेंदु अधिकारी की बड़ी घोषणा

Author Ashish Jha
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शुभेंदु अधिकारी

Suvendu Adhikari: शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से राज्य के सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी घोषणा की है. सातवें वेतन आयोग का लंबा इंतजार खत्म हुआ. कहा जा रहा है कि इस वेतन आयोग के लागू होने से सभी कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि होगी.

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Suvendu Adhikari: कोलकाता. बंगाल के सभी सरकारी कर्मचारियों, जिनमें शिक्षक भी शामिल हैं, के लिए खुशखबरी है. आखिरकार, पश्विम बंगाल में सातवां वेतन आयोग (7th Pay Commission) का गठन किया जा रहा है. भाजपा के प्रस्ताव में इस वादे का जिक्र किया गया था. अब इसे राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी मिल गई है. सोमवार को, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में नबन्ना में मंत्रिमंडल की बैठक हुई. बैठक में पांच सदस्य उपस्थित थे. सातवें वेतन आयोग का गठन राज्य सरकार के कर्मचारियों, बोर्डों, निगमों, स्थानीय निकायों और शैक्षणिक संस्थानों के वेतन ढांचे में संशोधन करने के लिए किया गया था.

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लंबे समय से था इंतजार

पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों को सातवां वेतन आयोग का लंबे समय से इंतजार था. वेतन आयोग के लागू होते ही सभी कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि होगी. पत्रकारों को संबोधित करते हुए नगर पालिका मंत्री अग्निमित्र पाल ने कहा-राज्य सरकार के कर्मचारियों, बोर्डों, निगमों, स्थानीय निकायों और शैक्षणिक संस्थानों के वेतन ढांचे में संशोधन करने के लिए सातवें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दे दी गई है. हालांकि, मंत्रिमंडल ने बकाया महंगाई भत्ता (डीए) के भुगतान पर कोई निर्णय नहीं लिया है.

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भाजपा ने किया था वादा

भाजपा ने चुनाव से पहले किये वादों में से एक और वादा पूरा किया है. सातवां वेतन आयोग लागू करने का वादा भाजपा के घोषणापत्र में था. भाजपा ने चुनाव प्रचार के दौरान इस वेतन आयोग के गठन की बात बार-बार की थी. नेतृत्व परिवर्तन के बाद कार्यकर्ता इस फैसले की उम्मीद लगाए बैठे थे. इस बार मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के शपथ ग्रहण के डेढ़ सप्ताह के भीतर ही इस वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दे दी गई.

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कर्मचारियों ने फैसले का किया स्वागत

सरकारी कर्मचारियों का कहना है कि अगर सातवां वेतन आयोग गठित और लागू होता है, तो कर्मचारियों के मूल वेतन में एक ही बार में 10,000 से 12,000 टका की वृद्धि हो सकती है. वेतन आयोग के नियमों के अनुसार, सरकार को हर 10 साल में कर्मचारियों के वेतन ढांचे में संशोधन करना होता है. हालांकि, कई बार देखा गया है कि इस नियम का पालन नहीं किया गया है. मोदी सरकार ने 1 जनवरी, 2016 को सातवां वेतन आयोग लागू किया.

न्यूनतम मूल वेतन 18,000 रुपये होंगे

सातवें वेतन आयोग में न्यूनतम मूल वेतन 18,000 रुपये और अधिकतम मूल वेतन 2.5 लाख रुपये है. संग्रामी जमुइत मंच के प्रतिनिधियों ने सातवें वेतन आयोग के गठन का स्वागत किया. हालांकि, संग्रामी जमुइत मंच के प्रतिनिधि उम्मीद कर रहे थे कि सरकार आज बकाया महंगाई भत्ते के बारे में कुछ घोषणा करेगी, लेकिन वे अभी तक निराश नहीं हैं.

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