बंगाल में औद्योगिकीकरण के लिए तैयार हो रहा ब्लूप्रिंट, अशोक लाहिड़ी ने शुरू किया काम

Author Ashish Jha
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मुख्य सचिवालय

Bengal News: यह याद रखना ज़रूरी है कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर सबसे ज़्यादा रोज़गार के मौके देता है. युवा पीढ़ी के स्किल डेवलपमेंट और रोज़गार पैदा करने पर ध्यान देने का प्लान है. इस मामले में प्रवासी श्रमिकों का ध्यान रखा जा रहा है.

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Bengal News: कोलकाता. चुनाव के दौरान भाजपा नेताओं ने बंगाल में औद्योगिकरण को लेकर लोगों के सामने कई सारे वादे किये थे. अब इसे अमली जामा पहनाने के लिए नीति आयोग के सदस्य अशोक लाहिड़ी ने इस योजना पर काम शुरू कर दिया है. अशोक लाहिड़ी भाजपा के पूर्व विधायक भी रह चुके हैं. सत्ता में आने के बाद उद्योग व अर्थव्यवस्था को चंगा करने के लिए दीर्घकालीक योजना का ब्लूप्रिंट तैयार किया जा रहा है. अशोक लाहिड़ी कहते हैं कि नीति आयोग पश्चिम बंगाल के लिए मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई चेन, इंफ्रास्ट्रक्चर, नदी-आधारित व्यापार और रोजगार पर फोकस करते हुए एक लंबे समय का इंडस्ट्रियलाइजेशन रोडमैप तैयार कर रहा है. कोलकाता को भारत के ”एक्ट ईस्ट” के गेटवे के तौर पर स्थापित किया जायेगा.

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दूसरा सबसे अमीर राज्य था बंगाल

केंद्र सरकार लाहिड़ी की मदद से बंगाल के उद्योग को आगे बढ़ाना चाह रही है. केंद्र से निर्देश मिलने के बाद अशोक ने औद्योगिकरण के लिए रोडमैप तैयार करने के लिए शुरुआती बातचीत शुरू कर दी है. आजादी के समय जीडीपी के मामले में पश्चिम बंगाल भारत का दूसरा सबसे अमीर राज्य था. लगातार गिरावट के बाद राज्य अब छठे नंबर पर आ गया है. यह राज्य इंडस्ट्री और फैक्ट्रियों के ज़रिए शहरीकरण शुरू करने वाले शुरुआती राज्यों में से एक था. कई लोग उद्योग के हासिये पर चले जाने के लिए मजदूर यूनियन की ज़्यादतियों, राजनीतिक अस्थिरता और अराजकता, प्रशासनिक गलतियों को जिम्मेदार मानते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि साल्टलेक और न्यूटाउन के आइटी हब ने आइटी सेक्टर में कुछ उम्मीद जगायी है. इसके अलावा कृषि और एग्रो-बेस्ड इंडस्ट्रीज़ में भी उम्मीद है.

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नयी पहल की ज़रूरत

नीति आयोग के कार्य से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि बंगाल का नया औद्योगिकीकरण मुख्य रूप से चार बड़े सेक्टर्स पर फोकस कर रहा है. उनमें से एक है सप्लाई चेन और कम्युनिकेशन. यह राज्य भारत को बांग्लादेश, नेपाल और भूटान जैसे देशों से जोड़ता है. कोलकाता और हल्दिया पोर्ट की संचरना और कार्गो कॉरिडोर की हालत की जांच की जा रही है. मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर निश्चित रूप से एक बहुत जरूरी जगह है. इंजीनियरिंग, केमिकल, टेक्सटाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्रीज़ को फिर से खड़ा करने के लिए नयी पहल की ज़रूरत है. कुछ नीति निर्धारक पूर्वी भारत के मिनरल बेल्ट से जुड़े एक सेमीकंडक्टर कॉरिडोर की भी बात कर रहे हैं.

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