कलकत्ता हाईकोर्ट को 164 साल बाद मिला नया एड्रेस, इस वकील के नाम पर रखा गया सड़क का नाम

कलकत्ता हाईकोर्ट की फाइल फोटो.
Calcutta High Court: कलकत्ता हाईकोर्ट को 164 साल बाद नया एड्रेस मिला है. देश की सबसे पुरानी न्यायिक इमारत अब 3 एस्प्लेनेड रोड (पश्चिम) के पते पर नहीं, बल्कि इसका नया पता 3 जस्टिस राधा विनोद पाल सरानी पथ हो गया है.
मुख्य बातें
Calcutta High Court: कोलकाता: कलकत्ता हाईकोर्ट का पता बदल गया है. 164 वर्षों से 3 एस्प्लेनेड रोड (पश्चिम) इसका पता हुआ करता था. इस शताब्दी पुरानी इमारत का नया पता अब नंबर 3 जस्टिस राधा विनोद पाल सरानी पथ कर दिया गया है. यह देश की सबसे पुरानी इमारत है. कलकत्ता हाईकोर्ट का नाम नहीं बदला है, बल्कि उसके सामने की सड़क का नाम बदल दिया गया है. यह ब्रिटिश इतिहास में एक महत्वपूर्ण बदलाव है. सड़क का नया नाम बंगाल के एक न्यायाधीश के नाम पर रखा गया है. देश का पहला उच्च न्यायालय 1 जुलाई, 1862 को स्ट्रैंड रोड पर बनाया गया था. उस वक्त से आज तक कलकत्ता उच्च न्यायालय का पता यही एस्प्लेनेड रोड था. अब इस सड़क का नाम बदल गया है.
अभिषेक बनर्जी ने की थी पहल
इस नाम परिवर्तन के पीछे सांसद अभिषेक बनर्जी की सोच बतायी जा रही है. पिछले साल, जापान के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ जापान गए सांसद अभिषेक बनर्जी ने राधाबिनोद पाल के प्रति लोगों के प्रेम और सम्मान को महसूस किया. अभिषेक उस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे जिसे भारत ने सिंदूर अभियान के बाद विभिन्न देशों में भेजा था. उस दौरान वे जापान भी गए थे. बाद में, कोलकाता लौटने पर, अभिषेक बनर्जी ने प्रस्ताव दिया कि एक सड़क का नाम इस विद्वान वकील के नाम पर रखा जाए. इसके बाद, नगरपालिका ने इस सड़क का नाम बदलकर राधाबिनोद पाल के नाम पर कर दिया. गुरुवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय ने इस नाम परिवर्तन के संबंध में अधिसूचना जारी की.
कौन थे राधाबिनोद पाल
न्यायमूर्ति राधाबिनोद पाल एक बंगाली न्यायविद हैं, जो कभी कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति रह चुके हैं. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद युद्ध अपराधों की सुनवाई के लिए गठित अंतर्राष्ट्रीय सैन्य न्यायाधिकरण में उन्हें न्यायाधीश नियुक्त किया गया था. राधाबिनोद पाल का नाम जापानी इतिहास में सम्मान के साथ याद किया जाता है. उन्हें जापान और भारतीय के बीच मित्रता के प्रतीक के रूप में जाना जाता है. जापान के टोक्यो शहर में न्यायमूर्ति राधाबिनोद पाल के नाम पर एक संग्रहालय और एक सड़क है. उनकी एक प्रतिमा भी है. एक जापानी विश्वविद्यालय में उनके नाम पर एक शोध केंद्र भी है.
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By Ashish Jha
डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.
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