कटवा में ‘लाल गढ़’ पर दीदी का कब्जा, क्या युवा और किसान बिगाड़ेंगे खेल? जानें अजय-हुगली के संगम का सियासी मिजाज

Published by :Mithilesh Jha
Published at :30 Apr 2026 7:02 AM (IST)
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Katwa Assembly Election 2026

Katwa Assembly Election 2026: पूर्व बर्धमान के कटवा विधानसभा क्षेत्र में टीएमसी और भाजपा के बीच कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है. आलू-धान के गिरते दाम और रोजगार की कमी बनी चुनाव का बड़ा मुद्दा. जानें क्या है रवींद्रनाथ चटर्जी का चुनावी इतिहास.

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Katwa Assembly Election 2026: पश्चिम बंगाल के ऐतिहासिक शहर कटवा में इस बार चुनावी पारा सातवें आसमान पर है. कभी वामपंथ का अभेद्य दुर्ग रहा यह क्षेत्र अब तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भाजपा के बीच हाई-वोल्टेज मुकाबले का गवाह बन रहा है.

विकास और रोजगार के पैमाने पर उम्मीदवारों को तौल रहा वोटर

अजय और हुगली नदियों के संगम पर स्थित यह सामरिक क्षेत्र आज अपनी सांस्कृतिक विरासत से ज्यादा किसानों के संकट और युवाओं की टूटती आकांक्षाओं के कारण चर्चा में है. चुनावी शोर के बीच यहां का वोटर इस बार विकास और रोजगार के पैमाने पर उम्मीदवारों को तौल रहा है. नवाबों के दौर में मुर्शिदाबाद का ‘प्रवेश द्वार’ कहा जाने वाला कटवा आज विकास के द्वार खुलने की बाट जोह रहा है.

रवींद्रनाथ चटर्जी का दबदबा बनाम विपक्ष की चुनौती

कटवा की राजनीति में रवींद्रनाथ चटर्जी एक बड़ा नाम हैं. कांग्रेस के दिग्गज रहे चटर्जी अब टीएमसी के खेमे में हैं और लगातार जीत दर्ज कर रहे हैं. वर्ष 1996 से अपनी धाक जमाने वाले चटर्जी 2016 में टीएमसी में शामिल हुए और कांग्रेस उम्मीदवार को महज 911 वोटों से हराया. 2021 में भाजपा को उन्होंने 9,155 मतों से शिकस्त दी.

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कटवा में इस बार त्रिकोणीय मुकाबला

कटवा विधानसभा सीट पर इस बार रवींद्रनाथ चटर्जी के सामने भाजपा की कृष्णा घोष और माकपा के संजीब दास मैदान में हैं. मुकाबला मुख्य रूप से सत्ताधारी दल और भगवा खेमे के बीच होता दिख रहा है.

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ग्राउंड रिपोर्ट: एआई (AI) का सपना और रोजगार का सूखा

कटवा के युवाओं में आधुनिक तकनीक को लेकर जबर्दस्त उत्साह है, लेकिन संसाधनों की कमी उन्हें खल रही है. हुगली वीमेंस कॉलेज की छात्रा प्रियंका अधिकारी ने कहा कि वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में करियर बनाना चाहती हैं, लेकिन कोलकाता तक में सही अवसर नहीं मिल रहे हैं. युवाओं का मानना है कि शहर की बुनियादी सुविधाएं दम तोड़ रही हैं, जिसके कारण उन्हें पलायन के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.

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खेती का गणित : आलू और धान की कीमतों ने किसानों की तोड़ी कमर

कटवा की उपजाऊ मिट्टी पर पसीना बहाने वाला किसान आज खुद को ठगा महसूस कर रहा है. मंडियों में आलू 650-700 रुपए प्रति क्विंटल बिक रहा है, जिससे लागत भी नहीं निकल रही. किसान दूधकुमार जाना के मुताबिक, व्यापारियों की मनमानी के आगे वे बेबस हैं.

एमएसपी (MSP) की हकीकत

धान का समर्थन मूल्य 2,203 रुपए होने के बावजूद किसान बिचौलियों को कम दाम पर फसल बेचने को मजबूर हैं. मुर्शली गांव के किसान पुषन मंडल ने बताया कि कर्ज के बोझ के कारण आधी फसल साहूकार के पास चली जाती है.

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Katwa Assembly Election 2026: सामाजिक और भौगोलिक समीकरण

कटवा का चुनावी गणित काफी दिलचस्प है. यहां 65.40 प्रतिशत ग्रामीण और 34.60 प्रतिशत शहरी मतदाता हैं. अनुसूचित जाति की 27.41 प्रतिशत हिस्सेदारी और 21.80 प्रतिशत मुस्लिम आबादी चुनाव परिणाम तय करने में निर्णायक भूमिका निभायेगी.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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