डायमंड हार्बर या बंगाल का ‘ल्यारी’? अभिषेक बनर्जी के गढ़ का क्या है पाकिस्तान कनेक्शन?

Published by :Mithilesh Jha
Published at :30 Apr 2026 5:53 PM (IST)
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Lyari of Bengal Diamond Harbour West Bengal Election 2026

Lyari of Bengal: बंगाल चुनाव 2026 खत्म होने के बाद डायमंड हार्बर पर छिड़ा विवाद. जानें क्यों बीजेपी अभिषेक बनर्जी के क्षेत्र की तुलना पाकिस्तान के ‘ल्यारी’ से कर रही है. क्या है ‘डायमंड हार्बर मॉडल’?

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Lyari of Bengal: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के अंतिम चरण के मतदान के बीच डायमंड हार्बर एक बार फिर विवादों के केंद्र में है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के इस निर्वाचन क्षेत्र को ‘बंगाल का ल्यारी’ (Lyari of Bengal) करार दिया है.

बंगाल चुनाव के विमर्श में कैसे आया ‘ल्यारी’

मुख्य विपक्षी दल भाजपा के इस तीखे हमले ने बंगाल की राजनीति में भूचाल ला दिया है. लेकिन सवाल है कि आखिर पाकिस्तान के कराची का एक इलाका ‘ल्यारी’ बंगाल के चुनावी विमर्श में कैसे आ गया और भाजपा इसके जरिये क्या संदेश देना चाहती है?

क्या है ‘ल्यारी’ कनेक्शन? क्यों हो रही तुलना?

‘ल्यारी’ पाकिस्तान के कराची का वह इलाका है, जो अपनी संगठित हिंसा, गैंगवार और समानांतर प्रशासन के लिए दुनिया भर में बदनाम है. भाजपा का आरोप है कि डायमंड हार्बर में भी कुछ वैसा ही माहौल है. भाजपा का दावा है कि डायमंड हार्बर में पश्चिम बंगाल की कानून-व्यवस्था नहीं, बल्कि ‘अभिषेक बनर्जी का अपना कानून’ चलता है.

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विपक्ष के लिए नो-एंट्री, डराने-धमकाने की राजनीति

भाजपा का आरोप है कि जिस तरह ल्यारी में बाहरी दखल मुमकिन नहीं था, उसी तरह डायमंड हार्बर में विपक्षी उम्मीदवारों को डराया जाता है. उनके एजेंटों को बूथों से बाहर निकाल दिया जाता है. भाजपा का यह भी कहना है कि यहां ‘डायमंड हार्बर मॉडल’ के नाम पर डराने-धमकाने की राजनीति को संस्थागत रूप दे दिया गया है.

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अजय पाल शर्मा और ‘सिंघम’ फैक्टर

इस तुलना के बीच आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा की तैनाती ने आग में घी का काम किया. निर्वाचन आयोग ने ‘सिंघम’ के नाम से मशहूर शर्मा को विशेष रूप से इस इलाके में तैनात किया, ताकि ‘ल्यारी’ जैसे हालात न बनें.

तृणमूल कांग्रेस ने किया पलटवार

तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा के इस उपनाम (ल्यारी) पर कड़ी आपत्ति जतायी है. टीएमसी का कहना है कि डायमंड हार्बर विकास का मॉडल है, जिसे भाजपा अपनी हार के डर से बदनाम कर रही है. अभिषेक बनर्जी ने इसे बंगाल की जनता का अपमान बताया है.

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Lyari of Bengal: क्यों अहम है डायमंड हार्बर की जंग?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ‘ल्यारी’ शब्द का इस्तेमाल कर दो निशाना साध रही है. पहला, यह क्षेत्र मुस्लिम बहुल है. इसलिए ध्रुवीकरण की कोशिश. दूसरा, अभिषेक बनर्जी की छवि को एक ‘बाहुबली’ नेता के तौर पर पेश करना. टीएमसी का तर्क है कि डायमंड हार्बर में हुए विकास कार्यों और चुनावी मार्जिन ने भाजपा को मानसिक रूप से हरा दिया है.

वोटिंग के दिन दिखा तनाव

29 अप्रैल को मतदान के दौरान भी फालता और डायमंड हार्बर के अन्य क्षेत्रों में जबर्दस्त खींचतान देखी गयी. भाजपा ने ईवीएम पर टेप चिपकाने के आरोप लगाये, तो टीएमसी ने केंद्रीय बलों की ज्यादती का मुद्दा उठाया. ‘ल्यारी’ के इस टैग ने जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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