निजी स्कूल में वित्तीय अनियमितता के मामले में पांच जगह इडी की छापेमारी
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 04 Sep 2024 12:50 AM
न्यूअलीपुर, कसबा समेत पांच जगहों पर रेड, अभियान के दौरान मौजूद थे सीएपीएफ के जवान भी
कोलकाता. महानगर के एक निजी स्कूल में करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितता की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (इडी) ने मंगलवार को महानगर के अलग-अलग स्थानों पर अभियान चलाया. यह छापेमारी स्कूल के पूर्व पदाधिकारियों व उससे जुड़े लोगों के ठिकानों पर हुई है. न्यू अलीपुर, कसबा समेत पांच जगहों पर केंद्रीय जांच एजेंसी के अधिकारियों ने अभियान चलाया. इस दौरान संबंधित लोगों से पूछताछ के अलावा कुछ दस्तावेज भी जब्त किये गये. इडी के अभियान के दौरान सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (सीएपीएफ) के जवान भी साथ में थे. दरअसल यह मामला पुराना है. स्कूल के ट्रस्टी बोर्ड के पूर्व सदस्य कृष्णा दमानी पर लंबे समय से भ्रष्टाचार करने का आरोप है, जिसकी जांच पहले कोलकाता पुलिस के हाथों में थी. मामले में दमानी को करोड़ों रुपये की वित्तीय हेराफेरी के आरोप में गिरफ्तार भी किया गया था. इडी इस बात की जांच कर रही है कि भ्रष्टाचार की राशि कहां, किनके बैंक खातों में, किसके जरिये और कैसे स्थानांतरित किये गये थे. बैंक खातों से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है. मंगलवार सुबह करीब 6.30 बजे इडी की एक टीम सीएपीएफ के जवानों के साथ न्यू अलीपुर के ब्लॉक-बी के नलिनी रंजन एवेन्यू स्थित निजी स्कूल की पूर्व परिचालन समिति के पूर्व चेयरमैन सुशील कुमार डागा के ठिकाने पर पहुंची. केंद्रीय जांच एजेंसी के अधिकारियों की एक अन्य टीम कसबा के कायस्थपाड़ा इलाका स्थित एक मकान में पहुंची. वह मकान केके मालवीय नामक एक शख्स का बताया जा रहा है. राज्य में सरकारी व सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में हुई नियुक्ति घोटाले की जांच पहले ही इडी व सीबीआइ कर रहे हैं. इसी बीच, इस वर्ष फरवरी में महानगर में एक निजी स्कूल में करोड़ों रुपये की अनियमितता की घटना सामने आयी. इडी की जांच के दायरे में स्कूल के ट्रस्टी बोर्ड के पूर्व सदस्य दमानी के अलावा अन्य चार लोग भी हैं. उक्त स्कूल में शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्तियों के नाम पर करीब 20 करोड़ रुपये की हेराफेरी करने के आरोप है. इतना ही नहीं, मुकुंदपुर में स्कूल के एक कैंपस निर्माण के दौरान भी वित्तीय अनियमितता के आरोप हैं. आशंका जतायी जा रही है कि वित्तीय अनियमितता का परिमाण 100 करोड़ रुपये से भी ज्यादा का हो सकता है.
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