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विजया सम्मिलनी में महिलाओं की उपस्थिति बढ़ाने पर तृणमूल का जोर

Updated at : 31 Oct 2024 8:38 PM (IST)
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विजया सम्मिलनी में महिलाओं की उपस्थिति बढ़ाने पर तृणमूल का जोर

राज्य में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भाजपा व अन्य विपक्षी दल तृणमूल कांग्रेस पर लगातार हमले बोल रहे हैं. इधर, तृणमूल सांगठनिक स्तर पर ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को पार्टी में जोड़ने पर ध्यान देने में जुटी है. यही वजह है कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों में तृणमूल की ओर से आयोजित विजया सम्मिलनी में भी महिलाओं की उपस्थिति बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है.

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कोलकाता.

राज्य में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भाजपा व अन्य विपक्षी दल तृणमूल कांग्रेस पर लगातार हमले बोल रहे हैं. इधर, तृणमूल सांगठनिक स्तर पर ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को पार्टी में जोड़ने पर ध्यान देने में जुटी है. यही वजह है कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों में तृणमूल की ओर से आयोजित विजया सम्मिलनी में भी महिलाओं की उपस्थिति बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है.

मंत्री व तृणमूल महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य का कहना है कि उनकी पार्टी द्वारा आयोजित विजया सम्मिलनी में शामिल होने वाले लोगों में महिलाओं की उपस्थिति करीब दो-तिहाई हो रही है. उनका दावा है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रति राज्य की महिलाओं का विश्वास बना हुआ है. तृणमूल के विजया सम्मिलनी में शामिल होने वाली महिलाओं की संख्या इसी बात का संकेत है. इधर, भाजपा नेता अग्रिमित्रा पाल का कहना है कि आरजी कर मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में हुई घटना को लेकर आंदोलन का राज्यभर की महिलाओं ने समर्थन किया है, जिससे तृणमूल को धक्का लगा है.

जूनियर डॉक्टरों के आंदोलन पर मंत्री शोभनदेव का कटाक्ष

बशीरहाट.

हाड़ोवा में तृणमूल कांग्रेस की ओर से आयोजित विजया सम्मेलन में पहुंचे मंत्री शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने आरजी कर कांड के खिलाफ जूनियर डॉक्टरों के आंदोलन पर कटाक्ष किया. उन्होंने इसे नक्सलियों का आंदोलन बताया. मंत्री ने कहा कि जूनियर डॉक्टरों के आंदोलन को संगठित करने के लिए करोड़ों रुपये जुटाये गये.

इस आंदोलन में भाजपा को कोई खास जगह नहीं मिली. इसे नक्सलियों और माकपा ने अपने कब्जे में ले लिया था. आंदोलन के दौरान दुर्घटना में घायल एक युवक की इलाज के अभाव में मौत का आरोप लगाते हुए मंत्री ने कहा कि एक मां, जिसके बेटे के दोनों पैर कट गये थे, उसने डॉक्टर के पैर पकड़कर कहा था कि बचा लो बेटा. लेकिन डॉक्टर ने उसका इलाज नहीं किया. मां की आंखों के सामने उसके बेटे की मौत हो गयी थी. आप कैसे डॉक्टर बने हैं?

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को डॉक्टर तैयार करने में लाखों खर्च करने पड़ते हैं. आज ये लोग सरकार का काम किये बगैर आंदोलन कर रहे हैं. इनके आंदोलन में महंगे खाने आये. भोजन के लिए 11 बैंक खातों में पैसा जमा कराया गया है. कहते हैं कि आंदोलन हो रहा है. लेकिन वास्तव में आंदोलन के नाम पर करोड़ों रुपये का लेनदेन हुआ है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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