पश्चिम बंगाल का नामकरण : बंगाली में ‘बांग्ला’, अंगरेजी में ‘बंगाल’ होगा नाम
Updated at : 29 Aug 2016 5:56 PM (IST)
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।।कोलकाता से अजय विद्यार्थी ।। कोलकाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा में पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर बंगाली में ‘बांग्ला’ करने और अंग्रेजी में ‘बंगाल’ करने का प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित हुआ, हालांकि कांग्रेस, वाममोरचा व भाजपा ने राज्य का एक साथ दो नाम रखने का प्रस्ताव का विरोध किया. कांग्रेस व वाम मोरचा ने इसके […]
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।।कोलकाता से अजय विद्यार्थी ।।
कोलकाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा में पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर बंगाली में ‘बांग्ला’ करने और अंग्रेजी में ‘बंगाल’ करने का प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित हुआ, हालांकि कांग्रेस, वाममोरचा व भाजपा ने राज्य का एक साथ दो नाम रखने का प्रस्ताव का विरोध किया. कांग्रेस व वाम मोरचा ने इसके खिलाफ विधानसभा से वाकआउट किया. अब इस प्रस्ताव को केंद्र सरकार के पास भेजा जायेगा और लोकसभा में पारित होने के बाद ही नाम परिवर्तन संभव हो जायेगा. विधेयक पारित होने के बाद मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से बातचीत की और प्रस्ताव को शीघ्र ही पारित करवाने का अनुरोध किया.
संसदीय कार्यमंत्री पार्थ चटर्जी ने नियमावली 169 के तहत यह प्रस्ताव पेश किया. प्रस्ताव में कहा गया कि राज्य का नाम बंगाली में ‘बांग्ला’, अंग्रेजी में ‘बंगाल’ होगा. इस प्रस्ताव पर हुई बहस में भाग लेते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा : बांग्ला नाम की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि है. मुझे ‘बंगो’ नाम पर कोई दिक्कत नहीं है. मुझे यह पसंद हैं तथा साहित्यक व सांस्कृतिक रूप से यह नाम महत्वपूर्ण है, लेकिन ज्यादातर लोग ‘बांग्ला’ नाम चाहते हैं. अंग्रेजी में यह ‘बंगाल’ होगा ताकि पड़ोसी देश बांग्लादेश के साथ कोई भ्रम नहीं हो.
उन्होंने कहा : जब भी हम भारत के बाहर या किसी अन्य राज्य में जाते हैं, हम बंगाल के लोग के रूप में जाने जाते हैं. उल्लेखनीय है कि इसके पहले 2009 में वाममोरचा शासन के समय व 2011 में तृणमूल सरकार ने भी राज्य (नाम) परिवर्तन का प्रस्ताव विधानसभा में पारित किया था, लेकिन केंद्र सरकार में आगे नहीं बढ़ सका. सुश्री बनर्जी ने कहा : हमने राज्य का नाम बदलने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन उसे केंद्र ने रोक लिया. इस संबंध में कोई फैसला नहीं हो सकता अतएव हमने राज्य का नाम बदलकर ‘बांग्ला’ करने के लिए एक बार फिर लाने का फैसला किया. बाद में संवाददाताओं से उन्होंने कहा ,जो लोग बस राजनीति के लिए इस नाम परिवर्तन का विरोध कर रहे हैं, उन्हें शर्म करना चाहिए. यह एक ऐतिहासिक भूल है और इतिहास उन्हें नहीं माफ करेगा. ममता ने कहा कि यह मामला अब केंद्र सरकार के पास भेजा जायेगा और तब वह इसे संसद में पेश करेंगी.
उन्होंने कहा, मैं केंद्र सरकार से इस मामले पर आगे बढने का अनुरोध करुंगी ताकि इसे संसद के सामने रखा जा सके. हम इसे यथासंभव रखना चाहते हैं. ममता ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष की उनकी हाल की इस टिप्पणी के लिए आलोचना की कि वह इसे पारित नहीं होने देंगे. उन्होंने कहा : मैं देखूंगी कि कैसे वह रोक सकते हैं. मैं केंद्रीय गृहमंत्री से बात करुंगी. वह (दिलीप घोष) रोकने वाले कौन होते हैं? उन्होंने कहा कि उन्होंने इस संबंध में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से बात की है. उन्होंने कहा : मैंने उनसे कहा कि हमने विधानसभा में इसे पारित कराया है. अब आप इसपर आगे बढाइये.
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