बंगाल में SIR: हर दिन 1.75 से 2 लाख लोगों के दस्तावेज जांच रहे 700 जज, 47 लाख आपत्तियों का हुआ निपटारा
West Bengal Voter List Sir Update Supreme Court Bengal Elections 2026
West Bengal Voter List SIR Update: सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में चल रही SIR प्रक्रिया पर संतोष जताया. 19 अपीलेट ट्रिब्यूनल्स के गठन की बात कही. कहा कि 7 अप्रैल तक सभी 60 लाख आपत्तियों पर फैसला हो जाने की उम्मीद है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका पर अब 6 अप्रैल को सुनवाई होगी.
West Bengal Voter List SIR Update: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले मतदाता सूची (Voter List) पर मचे घमासान के बीच सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक बेहद महत्वपूर्ण आदेश जारी किया. चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत की पीठ ने बंगाल में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया की प्रगति पर संतोष जताते हुए बताया कि कुल 60 लाख आपत्तियों में से 47.4 लाख का निपटारा किया जा चुका है. 700 जज हर दिन 1.75 लाख से 2 लाख मामलों की जांच कर रहे हैं.
19 ट्रिब्यूनल बनेंगे, रिटायर्ड जज संभालेंगे काम
वोटर लिस्ट से नाम हटने या गलत तरीके से जुड़ने की शिकायतों को सुनने के लिए चुनाव आयोग ने 19 अपीलीय न्यायाधिकरणों (अपीलेट ट्रिब्यूनल) के गठन की अधिसूचना जारी कर दी है. इन न्यायाधिकरणों की अध्यक्षता हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस और रिटायर्ड जज करेंगे.
चीफ जस्टिस ने दिये स्पष्ट आदेश
CJI ने आदेश दिया कि इन ट्रिब्यूनल्स को चुनाव आयोग के उन रिकॉर्ड्स तक पूरी पहुंच दी जाये, जिनमें नामों को हटाने या जोड़ने के ‘कारण’ दर्ज हैं. कोर्ट ने जोर देकर कहा कि जिन लोगों के नाम काटे गये हैं, उन्हें भी नाम हटाने का ठोस कारण बताया जाना चाहिए.
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West Bengal Voter List SIR Update: 7 अप्रैल तक फाइनल होगी लिस्ट
सुनवाई के दौरान कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पत्रों का संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि 7 अप्रैल तक सभी लंबित आपत्तियों पर फैसला हो जायेगा. इसी के मद्देनजर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका सहित अन्य याचिकाओं पर अगली सुनवाई अब 6 अप्रैल को होगी.
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45 प्रतिशत नाम कटने का डर, वकीलों ने जतायी चिंता
ममता बनर्जी और अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए वरिष्ठ वकीलों ने चिंता जतायी कि बंगाल में नाम हटाये जाने की दर लगभग 45 प्रतिशत है. यह बहुत अधिक है. उन्होंने एक बार फिर प्रक्रिया पर सवाल उठाये. इस पर चीफ जस्टिस ने कहा- ट्रिब्यूनल्स को अपना काम करने दें. ऐसा नहीं है कि आपके पास कोई कानूनी रास्ता नहीं बचा है. अपनी शिकायतें ट्रिब्यूनल के सामने रखें.
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कोर्ट ने कहा- तकनीकी आशंकाओं में न उलझें
चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ ने कुछ आशंकाओं को ‘अत्यधिक तकनीकी’ बताते हुए खारिज कर दिया. कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि प्रक्रिया में शामिल न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों के मानदेय का भुगतान समय पर सुनिश्चित किया जाए.
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By मिथिलेश झा
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