PHOTOS : 'मैं अटल बिहारी हूं'..अटल जी का बिहार से क्या था रिश्ता? जेपी आंदोलन से लेकर नीतीश कुमार तक, तस्वीरों में जानिए पूरी कहानी

अटल बिहारी वाजपेयी की फाइल फोटो

अटल बिहारी वाजपेयी का बिहार से नाता
अटल बिहारी वाजपेयी
पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म भले ही ग्वालियर में हुआ था, लेकिन उनके राजनीतिक जीवन में बिहार की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. जेपी आंदोलन के दौर से लेकर केंद्र में NDA सरकार बनने और नीतीश कुमार के साथ उनके राजनीतिक रिश्ते तक, बिहार अटल जी की राजनीति के कई महत्वपूर्ण पड़ावों से जुड़ा रहा. खास बात यह है कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुद अटल जी के साथ अपने रिश्ते और बिहार के विकास में उनके सहयोग को कई बार सार्वजनिक मंचों से याद किया है.

अटल बिहारी वाजपेयी फाइल फोटो
अटल बिहारी वाजपेयी
अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में हुआ था. उनका जन्मस्थान बिहार नहीं था और उनका पारिवारिक मूल भी बिहार से नहीं था, लेकिन एक राजनेता के रूप में उनका बिहार से संपर्क कई दशकों तक बना रहा. बिहार से उनका रिश्ता किसी एक घटना तक सीमित नहीं था. कभी वे संसद में बिहार के सवालों को लेकर सक्रिय दिखाई दिए, तो कभी राज्य की राजनीति में सहयोगी दलों के साथ रणनीति बनाते नजर आए. बाद के वर्षों में नीतीश कुमार के साथ उनका राजनीतिक रिश्ता इस संबंध का सबसे चर्चित अध्याय बना.

जेपी आंदोलन के दौर में बिहार बना राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र
जेपी आंदोलन
1974 में बिहार से शुरू हुआ छात्र आंदोलन आगे चलकर जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति आंदोलन का बड़ा आधार बना. इस आंदोलन ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार के खिलाफ विपक्षी ताकतों को एक मंच पर आने का अवसर दिया. बिहार के छात्र आंदोलन से निकले कई युवा आगे चलकर देश की राजनीति के बड़े चेहरे बने. अटल बिहारी वाजपेयी इस दौर में विपक्ष के प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं में थे. इसलिए बिहार में चल रहे आंदोलन और राष्ट्रीय विपक्ष की राजनीति के बीच उनका संपर्क महत्वपूर्ण था, हालांकि यह कहना ज्यादा सटीक होगा कि अटल जी जेपी आंदोलन के प्रत्यक्ष छात्र नेता नहीं थे, बल्कि वे उस दौर के राष्ट्रीय विपक्षी नेतृत्व का हिस्सा थे.

संसद में संबोधन करते अटल जी
अटल बिहारी वाजपेयी
अटल जी और बिहार के रिश्ते को समझने के लिए संसद का एक रिकॉर्ड बेहद महत्वपूर्ण है. 7 मार्च 1975 को अटल बिहारी वाजपेयी ने लोकसभा में जयप्रकाश नारायण और अन्य लोगों के हस्ताक्षर वाली एक याचिका पेश की. संसदीय रिकॉर्ड के अनुसार, इस याचिका में बिहार और गुजरात के चुनाव, सामाजिक-आर्थिक अधिकार, लोकतांत्रिक अधिकार और नागरिक स्वतंत्रता, स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव, सत्ता के विकेंद्रीकरण, शिक्षा सुधार और राजनीतिक भ्रष्टाचार खत्म करने जैसे मुद्दे उठाए गए थे. यानी आपातकाल लगने से पहले ही बिहार के राजनीतिक घटनाक्रम और जेपी के नेतृत्व में उठ रहे सवाल राष्ट्रीय संसद तक पहुंच रहे थे और अटल जी उस संसदीय प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे.

नीतीश कुमार से अटल जी का रिश्ता कैसे बना
अटल बिहारी वाजपेयी और पूर्व सीएम नीतीश कुमार
नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर भी जेपी आंदोलन से जुड़ा रहा. बाद में वे जनता दल की राजनीति से होते हुए अलग राजनीतिक राह पर गए और 1994 में जॉर्ज फर्नांडिस के साथ समता पार्टी बनाई. 1996 के लोकसभा चुनाव में समता पार्टी ने भाजपा के साथ गठबंधन किया. यह गठबंधन आगे चलकर NDA की राजनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बना. नीतीश कुमार इसी राजनीतिक गठजोड़ के जरिए अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में पहुंचे.

अटल सरकार में नीतीश कुमार को मिली अहम जिम्मेदारियां
अटल बिहारी वाजपेयी और नीतीश कुमार
नीतीश कुमार अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाल चुके हैं. वे कृषि से जुड़े मंत्रालय में राज्य मंत्री रहे और बाद में रेल मंत्री भी बने. 1999 में गैसल रेल हादसे के बाद नीतीश कुमार ने रेल मंत्री पद से इस्तीफा देने की पेशकश की. अपने एक संस्मरणात्मक लेख में नीतीश कुमार ने बताया था कि अटल जी शुरुआत में उनका इस्तीफा स्वीकार करने के पक्ष में नहीं थे और उन्हें इस्तीफा स्वीकार करने के लिए काफी आग्रह करना पड़ा.

2000 में नीतीश कुमार पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने
नीतीश कुमार को मिठाई खिलाते अटल जी
बिहार की राजनीति में अटल-नीतीश रिश्ते का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव मार्च 2000 में आया. विधानसभा चुनाव के बाद NDA ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद के लिए आगे किया. 3 मार्च 2000 को नीतीश कुमार ने पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. हालांकि उनके पास बहुमत साबित करने के लिए पर्याप्त संख्या नहीं थी और कुछ ही दिनों बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया.

नीतीश कुमार ने खुद बताया, अटल जी से उन्होंने क्या सीखा
अटल बिहारी वाजयोपी
अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के बाद नीतीश कुमार ने अपने लेख में उनके साथ अपने व्यक्तिगत और राजनीतिक संबंधों को याद किया. उन्होंने लिखा कि अटल जी ने उन्हें सिखाया कि राजनीतिक विरोध के बावजूद विरोधियों के प्रति शिष्टता बरती जा सकती है. नीतीश ने यह भी बताया कि जब बिहार की विकास योजनाओं के लिए केंद्र से संसाधनों या मंजूरी में दिक्कत आती थी, तो वे अटल जी के पास जाते थे और अटल जी उनकी मदद करते थे. नीतीश ने बिहार के लिए अटल सरकार के दौर में हुए बुनियादी ढांचे के कामों का भी विशेष रूप से उल्लेख किया. उन्होंने स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना और बड़े पुलों को बिहार की कनेक्टिविटी के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया.

नीतीश कुमार ने अटल जी को सिर्फ नेता नहीं, मार्गदर्शक की तरह याद किया
अटल बिहारी वाजपेयी
16 अगस्त 2018 में अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के बाद नीतीश कुमार ने उन्हें याद करते हुए कहा कि उनके लिए अटल जी जैसा कोई दूसरा नहीं था. नीतीश ने अपने लेख में अटल जी की राजनीतिक शैली की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने उनसे शासन चलाने, सहयोगियों का सम्मान करने और कठिन सवालों का सामना करने का तरीका सीखा.
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लेखक के बारे में
By साक्षी कुमारी
साक्षी कुमारी को डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 3 वर्षों का अनुभव है. पिछले तीन वर्षों से वह डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं. उन्हें राजनीति, शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सरोकारों और समसामयिक मुद्दों से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग और लेखन का अनुभव है. बिहार की राजनीति और क्षेत्रीय मुद्दों पर उनकी विशेष रुचि है. डिजिटल पत्रकारिता के साथ-साथ उन्हें SEO (Search Engine Optimization) की भी अच्छी समझ है, जिससे वह पाठकों तक समय पर और प्रभावी ढंग से खबरें पहुंचाने में दक्ष हैं. तथ्यपरक, विश्वसनीय और SEO-अनुकूल समाचार तैयार करना उनकी प्रमुख कार्यशैली है.
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