जब श्रीबाबू की गिरफ्तारी से उबल पड़ा था मुंगेर! थाने में आगजनी और बलूचिया दस्ते के खौफनाक जुल्म की पूरी दास्तान

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शहीद स्मारक मुंगेर | Prabhat Khabar Network

महात्मा गांधी के 'करो या मरो' के आह्वान पर मुंगेर के क्रांतिवीरों ने ब्रिटिश सत्ता को चुनौती दी. श्रीबाबू के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट पर तिरंगा फहराने निकले क्रांतिकारियों पर गोरखा पुलिस ने बर्बर लाठीचार्ज किया. दमन के बावजूद, स्वतंत्रता की मशाल जलती रही.

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8 अगस्त 1942 को जब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने 'करो या मरो' और 'अंग्रेजों भारत छोड़ो' का ऐतिहासिक आह्वान किया, तो उसकी गूंज मुंगेर की धरती पर भी गगनभेदी साबित हुई. बिहार केशरी और बाद में बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री बने डॉ. श्रीकृष्ण सिंह (श्रीबाबू) के नेतृत्व में मुंगेर के क्रांतिवीरों ने ब्रिटिश सत्ता की चूलें हिला दी थीं. हाथ में तिरंगा थामे जब सैकड़ों क्रांतिकारी मुंगेर कलेक्ट्रेट पर झंडा फहराने आगे बढ़े, तो अंग्रेजी हुकूमत ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दी थीं.

'कलेक्ट्रेट पर लहराएंगे तिरंगा': श्रीबाबू का वह ऐतिहासिक आह्वान

भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले मुंगेर के स्वतंत्रता सेनानी राणा ऋषिदेव सिंह उस ऐतिहासिक दिन की यादें ताजा करते हुए बताते हैं:

  • महद्दीपुर से निकला जत्था: 1942 के आंदोलन के दौरान श्रीबाबू के नेतृत्व में क्रांतिकारियों की एक विशाल टोली मुंगेर शहर स्थित मध्य विद्यालय महद्दीपुर से तिरंगा लेकर निकली.
  • कलेक्ट्रेट कूच का संकल्प: श्रीबाबू ने खुले तौर पर ऐलान किया था कि ब्रिटिश गुलामी के प्रतीक को चुनौती देते हुए मुंगेर कलेक्ट्रेट की छत पर भारत का तिरंगा फहराया जाएगा.
2. स्वतंत्रता सेनानी राणा ऋषिदेव सिंह  | Prabhat Khabar Network
स्वतंत्रता सेनानी राणा ऋषिदेव सिंह | Prabhat Khabar Network

मकससपुर में गोरखा पुलिस से टकराव और गिरफ्तारी

क्रांतिकारियों के इस संकल्प की भनक लगते ही अंग्रेजी प्रशासन में हड़कंप मच गया:

  • रास्ते में रोका गया जत्था: जैसे ही सैकड़ों की संख्या में लोग महद्दीपुर से आगे बढ़े, खनका मोड़ से पहले मकससपुर मस्जिद के पास भारी हथियारों से लैस गोरखा पुलिस ने रास्ता रोक लिया.
  • बर्बर लाठीचार्ज और पथराव: गोरखा पुलिस और स्वतंत्रता सेनानियों के बीच तीखी तकरार हुई. पुलिस ने निहत्थे क्रांतिकारियों पर बेरहमी से लाठियां बरसाना शुरू कर दिया. जवाब में क्रांतिकारियों ने भी पीछे हटने से इनकार करते हुए पथराव कर दिया.
  • श्रीबाबू की गिरफ्तारी और कई घायल: इस हिंसक टकराव में गोरखा पुलिस ने डॉ. श्रीकृष्ण सिंह को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस के लाठीचार्ज में महद्दीपुर के धर्मवीर सिंह सहित कई क्रांतिकारी लहूलुहान हो गए और उनका सिर फट गया.

बलूचिया दस्ते का खौफनाक दमन और भूमिगत संघर्ष

श्रीबाबू की गिरफ्तारी के बाद ब्रिटिश हुकूमत का दमन और तेज हो गया:

  • घरों पर बलूचिया दस्ते की छापेमारी: आंदोलनकारियों के परिवारों को प्रताड़ित करने के लिए पुलिस का 'बलूचिया दस्ता' घरों में घुसने लगा. क्रांतिकारियों को मजबूरी में रिश्तेदारों और जंगलों में छिपकर दिन बिताने पड़े.
  • सूर्यगढ़ा थाने में लगाई आग: ब्रिटिश दमन से गुस्साए क्रांतिवीरों ने तत्कालीन मुंगेर जिले के सूर्यगढ़ा थाने को आग के हवाले कर अंग्रेजी सत्ता को सीधी चुनौती दी.
  • 1947 तक भूमिगत रहकर लड़ाई: जेल से रिहा होने के बाद भी श्रीबाबू के नेतृत्व में गुप्त बैठकें होती रहीं और मुंगेर के सैकड़ों दीवाने 1947 में देश के आजाद होने तक भूमिगत रहकर स्वाधीनता आंदोलन की मशाल जलाते रहे.



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राणा गौरी शंकर

लेखक के बारे में

By राणा गौरी शंकर

राणा गौरी शंकर प्रिंट माध्यम में 32 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत दैनिक आज से की. अभी प्रभात खबर के मुंगेर कार्यालय में कार्यरत हैं. सामाजिक सरोकार, अपराध, शिक्षा, राजनीतिक खबरों में रुचि रखते हैं.

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