आरजी कर को छोड़ 24 अस्पतालों ने भेजा प्रस्ताव

आरजी कर की घटना के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य के सरकारी अस्पतालों में आधारभूत सुविधाओं को लेकर रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था. इस बाबत 24 सरकारी मेडिकल कॉलेजों, अस्पतालों और स्कूल ऑफ ट्रॉपिकल ने बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए अपने-अपने प्रस्ताव भेज दिये हैं.
संवाददाता, कोलकाता
आरजी कर की घटना के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य के सरकारी अस्पतालों में आधारभूत सुविधाओं को लेकर रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था. इस बाबत 24 सरकारी मेडिकल कॉलेजों, अस्पतालों और स्कूल ऑफ ट्रॉपिकल ने बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए अपने-अपने प्रस्ताव भेज दिये हैं. सिर्फ आरजी कर मेडिकल कॉलेज की ओर से अब तक प्रस्ताव नहीं भेजा गया है. अस्पतालों ने सुरक्षाकर्मियों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ सीसीटीवी निगरानी पर भी जोर देने की बात कही है. पहले ही डॉक्टरों की मांग पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्यों को अस्पताल में अंधेरे स्थानों की पहचान करने और अस्पताल के हर हिस्से में हाई रेजोल्यूशन वाला सीसीटीवी कैमरा लगाने का निर्देश दिया था.
राज्य सरकार अस्पतालों के बुनियादी ढांचे का विकास करते हुए सुरक्षा पर विशेष जोर दे रही है. इसमें सीसीटीवी की संख्या बढ़ाने, प्रकाश की समुचित व्यवस्था करने, पर्याप्त संख्या में सुरक्षा गार्ड तैनात करने, डॉक्टरों के लिए सुरक्षित रेस्ट रूम की व्यवस्था करने, पर्याप्त स्वच्छ पेयजल व शौचालय का इंतजाम करना शामिल है. बताया जा रहा है कि 24 सरकारी अस्पतालों ने कुल सात हजार नये सीसीटीवी कैमरे लगाने की मांग की है. प्रत्येक अस्पताल का कहना है कि उनके पास सीसीटीवी हैं, लेकिन वे पर्याप्त नहीं है. उन्होंने अस्पताल के कोने-कोने में हाई रेजोल्यूशन वाले सीसीटीवी कैमरे लगाये जाने का प्रस्ताव दिया है. वे छात्र होस्टल और नर्स क्वार्टर के सामने के हिस्से को अलग-अलग दिशाओं से सीसीटीवी की जद में लाना चाहते हैं. इस कारण जलपाईगुड़ी मेडिकल कॉलेज ने इस मुद्दे पर विशेषज्ञों से सलाह ली है.
जानकारी के अनुसार, सबसे अधिक सीसीटीवी लगाने का प्रस्ताव एनआरएस मेडिकल कॉलेज, बांकुड़ा मेडिकल कॉलेज, एसएसकेएम अस्पताल, मुर्शिदाबाद मेडिकल कॉलेज, आरामबाग मेडिकल कॉलेज से आये हैं. साथ ही लगभग तीन हजार सुरक्षा गार्ड तैनात करने की मांग की गयी है. सिर्फ शरतचंद्र चटर्जी मेडिकल कॉलेज ने सुरक्षा गार्ड को लेकर कोई स्पष्ट प्रस्ताव नहीं दिया है. वहीं, राज्य सचिवालय के सूत्रों के अनुसार, अस्पतालों द्वारा दिये गये प्रस्ताव को राज्य सरकार ने वित्त विभाग के पास आर्थिक अनुमोदन के लिए भेज दिया है.
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