न्यूक्लियर पावर से भी ज्यादा ताकतवर होता है साहित्य

Updated at : 30 Dec 2019 6:40 AM (IST)
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न्यूक्लियर पावर से भी ज्यादा ताकतवर होता है साहित्य

कोलकाता : साहित्य वह विधा है, जिसमें पूरे देश को एकजुट करने की ताकत है. मेरा मानना है कि किसी देश को एक न्यूक्लियर पावर से भी ज्यादा पावर देनेवाला एक साहित्यकार ही होता है. साहित्यकार ही ऐसे व्यक्तित्व का धनी होता है, जो हमारी संस्कृति को हमें दिखाता है. संस्कृति के आगे पैसे का […]

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कोलकाता : साहित्य वह विधा है, जिसमें पूरे देश को एकजुट करने की ताकत है. मेरा मानना है कि किसी देश को एक न्यूक्लियर पावर से भी ज्यादा पावर देनेवाला एक साहित्यकार ही होता है. साहित्यकार ही ऐसे व्यक्तित्व का धनी होता है, जो हमारी संस्कृति को हमें दिखाता है. संस्कृति के आगे पैसे का कोई मोल नहीं, लेकिन यदि संस्कृति खत्म हो गयी, तो हमारी जड़ें खत्म हो जाएंगी.

दुनिया में यदि भारत का डंका बजता है, तो उसके पीछे हमारी चार हजार वर्ष पुरानी सभ्यता और संस्कृति ही है. यदि हम विश्व गुरु बनने के बारे में सोचते हैं, तो उसका आधार भी यही है. अंत में मैं यहीं कहूंगा कि कभी देश में यदि संकट आये और जनता को एक करने की अवश्यकता पड़ी, तो नेता काम नहीं आयेंगे, वहां तो साहित्यकार और कवि ही काम आयेगा. ये बातें राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने कहीं.
रविवार को भारतीय भाषा परिषद के सभागार में आयोजित नथमल केडिया साहित्य पुरस्कार समारोह 2019 को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा- मैं नथमल केडिया साहित्य पुरस्कार समारोह में आकर अभिभूत हूं.
वह देश की एक बहुत बड़ी विभूति थे. उन्होंने लिक से हट कर सामाजिक सुधार के लिए कार्य किया. नथमल जी ने जो कार्य समाज और देश के लिए किया, वह किसी ने नहीं किया. उन्होंने हमेशा ही समाज में महिलाओं को उच्च स्थान दिया. वह हमेशा ही महिलाओं को प्रत्साहित करते रहे.
कार्यक्रम में राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने डॉ बाबूलाल शर्मा को प्रशस्ति पत्र और श्रीफल देकर नथमल केडिया साहित्य पुरस्कार से सम्मानित किया. कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए समाजसेवी प्रह्लाद राय अग्रवाल ने कहा धनखड़ जी को अपनी माटी से काफी प्रेम है.
उन्होंने उसे बंगाल में भी जीवंत किया है. इस मौके पर मंच पर राज्यपाल की पत्नी सुदेश धनखड़, वरिष्ठ पत्रकार विश्वंभर नेवर, अर्चना के अध्यक्ष शरद केडिया व सचिव सुधीर पाटोदिया, जगमोहन बागला, अंजनि कुमार पोद्दार, सीताराम शर्मा, आरपी पंसारी, प्रमोद शाह, स्नेहलता पाटोदिया, नंदलाल सिंघानिया व अन्य उपस्थित थे. स्वागत भाषण शरद केडिया ने दिया, जबकि सुशीला चनानी ने संस्था के कार्यों की जानकारी दी. राज्यपाल ने मृदुला कोठारी ‘मृदु’ की पुस्तक हेलो हेत रो का विमोचन भी किया. संचालन समाजसेवी महावीर प्रसाद रावत ने किया.
राज्यपाल और राज्य सरकार, राज्य को चलाने के मजबूत पहिए : राज्यपाल
कोलकाता. सरकार चलाने के लिए कोई एक सिस्टम परफेक्ट नहीं है, मेरा मानना है कि राज्य को चलाने में एक पहिया राज्यपाल है, तो दूसरा मजबूत पहिया सरकार भी है. हाल के संकेत साकारात्मक हैं. मुख्यमंत्री द्वारा 26 दिसंबर को लिखा गया पत्र मिला है, वह सार्थक है. मैं कह सकता हूं कि मुख्यमंत्री का पत्र, सही सोच से सही दिशा में जाने वाला कदम है. मैं समझता हूं कि इसके अच्छे परिणाम होंगे.
उक्त बातें राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने कहीं. हालांकि इस दौरान उन्होंने राज्य के मंत्रियों को नसीहत देते हुए कहा कि इस पत्र को राज्य के मंत्रियों को समझने में थोड़ा समय लगेगा, लेकिन मेरा विश्वास है कि जब राज्य के मंत्री पत्र के शब्दों की गहरायी को समझेंगे, तो उन्हें बात समझ में आयेगी.
एक कार्यक्रम के बाद संवाददाताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कोई भी कार्य करते समय यदि दोषारोपण में पड़ेंगे, तो हम कभी भी आगे नहीं बढ़ पाएंगे. जो भी व्यक्ति संवैधानिक पद पर है, मेरा उससे निवेदन है कि करो, मरो की स्थिति ना लायें, इससे कार्य में बाधा आयेगी. हम सभी खुले मन से जनता की सेवा करने के लिए आगे बढ़ें. मैं एक राज्यपाल जैसे पद पर बैठ कर किसी को नहीं कह सकता कि आप के गिलास में आधा पानी है और आप में कमी है.
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