सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म का प्रदर्शन रोकने पर पश्चिम बंगाल सरकार पर लगाया 20 लाख का जुर्माना
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 11 Apr 2019 8:04 PM
नयी दिल्ली/कोलकाता : उच्चतम न्यायालय ने व्यंग्यात्मक बांग्ला फिल्म ‘भविष्योतेर भूत’ का प्रदर्शन नहीं होने देने के कारण बृहस्पतिवार को पश्चिम बंगाल सरकार पर 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया और राज्य पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा उसकी कार्रवाई व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी के लिए गंभीर खतरा है. न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चंद्रचूड़ […]
नयी दिल्ली/कोलकाता : उच्चतम न्यायालय ने व्यंग्यात्मक बांग्ला फिल्म ‘भविष्योतेर भूत’ का प्रदर्शन नहीं होने देने के कारण बृहस्पतिवार को पश्चिम बंगाल सरकार पर 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया और राज्य पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा उसकी कार्रवाई व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी के लिए गंभीर खतरा है.
न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की पीठ ने पश्चिम बंगाल पुलिस की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि सिनेमाघरों से फिल्म उतरवाने की उसकी कार्रवाई आवाज और मौजूदा संस्कृति के प्रति आलोचनात्मक दृष्टिकोण को दबाने का प्रयास है और यह कानून का पालन करने वाले नागरिकों को भयभीत करने वाला है. शीर्ष अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार को इस फिल्म का प्रदर्शन रुकवाने के लिए किसी भी तरह के संविधानेत्तर तरीकों का इस्तेमाल करने से भी रोक दिया और कहा कि सरकार विशेषरूप से यह सुनिश्चित करेगी कि सिनेमा घर के मालिकों की संपत्ति संरक्षित की जाये और दर्शकों की सुरक्षा का ध्यान रखा जाये.
पीठ ने कहा कि उसे इसमें कोई भी संदेह नहीं है कि यह लोक अधिकारों का दुरुपयोग है. पुलिस की कानून लागू करने की जिम्मेदारी है परंतु इस मामले में पश्चिम बंगाल पुलिस ने अपने वैधानिक अधिकारों से बाहर निकल कर आलोचनात्मक दृष्टिकोण और आवाज को दबाने का सतत प्रयास किया है. पीठ ने कहा कि 20 लाख रुपये की जुर्माना राशि का भुगतान अभिव्यक्ति और बोलने की स्वतंत्रता के अधिकार के हनन के लिए मुआवजे के रूप में फिल्म निर्माताओं तथा सिनेमाघर के मालिकों को किया जाना चाहिए. न्यायालय ने इसके अलावा फिल्म निर्माताओं को मुकदमे के खर्च के रूप में भी एक लाख रुपये देने का आदेश दिया. न्यायालय इंडिबिली क्रिएटिव प्रा लि और अन्य की याचिका पर सुनवाई कर रहा था. इस याचिका में राज्य सरकार और गृह विभाग सहित विभिन्न विभागों तथा पुलिस आयुक्त को इस फिल्म के प्रदर्शन में किसी प्रकार की बाधा पड़ने से रोके जाने का निर्देश देने का अनुरोध किया था.
सेंसर बोर्ड ने 19 नवंबर, 2018 को इस फिल्म को सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए यू/ए प्रमाण पत्र दिया है. पश्चिम बंगाल पुलिस की विशेष शाखा की ओर से एक निर्माता को यह संदेश मिला था कि फिल्म में जो कुछ दिखाया गया है उससे लोगों की भावनाएं आहत हो सकती हैं जिससे कानून व्यवस्था की समस्या खड़ी हो सकती है. याचिका के अनुसार, इस फिल्म को अधिकांश सिनेमाघरों ने हटा दिया गया है और इस समय 48 सिनेमाघरों में से सिर्फ दो में ही यह फिल्म दिखायी जा रही है. यह फिल्म प्रदर्शन के एक दिन बाद ही 16 फरवरी को एक पर्दे वाले सिनेमाघरों और मल्टीप्लेक्स से उतार ली गयी थी. अनिक दत्ता के निर्देशन में बनी यह फिल्म 15 फरवरी को रिलीज हुई थी. इस फिल्म में भूतों का एक समूह एक शरणार्थी शिविर में इकट्ठा होता है और वर्तमान समय में प्रासंगिक होने का प्रयास करता है. इन भूतों में राजनेता भी शामिल हैं.
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