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कोलकाता : पूर्व आइपीएस अफसर भारती घोष ने थामा भाजपा का दामन

Updated at : 05 Feb 2019 4:56 AM (IST)
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कोलकाता :  पूर्व आइपीएस अफसर भारती घोष ने थामा भाजपा का दामन

कोलकाता : कभी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की करीबी अधिकारियों में शुमार पूर्व आइपीएस भारती घोष ने सोमवार को नयी दिल्ली में भाजपा का दामन थाम लिया. उन्होंने केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद के हाथों भाजपा का झंडा थामा. भारती घोष को भाजपा में लाने का पूरा श्रेय पार्टी नेता मुकुल राय को जाता है. इस […]

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कोलकाता : कभी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की करीबी अधिकारियों में शुमार पूर्व आइपीएस भारती घोष ने सोमवार को नयी दिल्ली में भाजपा का दामन थाम लिया. उन्होंने केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद के हाथों भाजपा का झंडा थामा. भारती घोष को भाजपा में लाने का पूरा श्रेय पार्टी नेता मुकुल राय को जाता है. इस मौके पर पश्चिम बंगाल प्रदेश भाजपा के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय भी मौजूद थे.

भाजपा में शामिल होने के बाद भारती घोष ने ममता बनर्जी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वह धरने पर बैठकर जिस सत्याग्रह की बात कह रही हैं वह सत्याग्रह नहीं है. क्योंकि एक समय गांधी जी ने आम लोगों के लिए सत्याग्रह किया था. यहां पर आम लोगों का पैसा लूटने वाले लुटेरों को बचाने वाले पुलिस अधिकारी के लिए ममता बनर्जी सत्याग्रह का नाटक कर रही हैं.

उल्लेखनीय है की ममता बनर्जी की करीबी रहीं भारती घोष पश्चिम मेदनीपुर की पुलिस अधीक्षक थी. उस वक्त उन्होंने नक्सली आंदोलन को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. उस दौरान जंगल महल में आयोजित एक सभा में अपने संबोधन में मुख्यमंत्री को जंगल महल की मां का खिताब देकर वह सुर्खियों में आयी थीं . लेकिन मुख्यमंत्री और भारती घोष के संबंध ज्यादा दिन मधुर नहीं रहे.

ममता बनर्जी से नाराज होकर उन्होने आइपीएस की नौकरी से इस्तीफा दे दिया था. साल 2018 में उन्होंने जंगल महल छोड़ दिया. ममता बनर्जी से नाराज भारती घोष अब उनका राजनीतिक हथियार से मुकाबला करना चाहती हैं. इसके लिए वह चुनावी मैदान में उतरने को तैयार हैं. हालांकि बीते चुनाव के समय विरोधी दलों के आरोप पर चुनाव आयोग ने उनका तबादला कर दिया था.
लेकिन बाद में ममता बनर्जी ने उनको चुनाव बाद फिर से पुराने पद पर बहाल कर दिया था. उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे. राज्य सरकार ने उनको गैरजमानती धाराओं में ममला दर्ज किया था. तब से वह फरार चल रही थीं. तकरीबन सालभर बाद वह भाजपा के दफ्तर में सार्वजनिक रूप से देखी गयीं.
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