अपनी धर्मसभा छोड़, मची पीएम को सुनने की होड़
Updated at : 03 Feb 2019 1:16 AM (IST)
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मोदी की सभा में मची भगदड़, कई घायल कोलकाता : राज्य के उत्तर 24 परगना जिले के गाइघाटा स्थित ठाकुरनगर में मतुआ महासम्मेलन की सभा में हिस्सा लेने के लिए जब प्रधानमंत्री पहुंचे, तो उस वक्त ठाकुरबाड़ी के मेलारमाठ में मतुआ संप्रदाय के दूसरे वर्ग की सभा हो रही थी. वह सभास्थल खचाखच भरा हुआ […]
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मोदी की सभा में मची भगदड़, कई घायल
कोलकाता : राज्य के उत्तर 24 परगना जिले के गाइघाटा स्थित ठाकुरनगर में मतुआ महासम्मेलन की सभा में हिस्सा लेने के लिए जब प्रधानमंत्री पहुंचे, तो उस वक्त ठाकुरबाड़ी के मेलारमाठ में मतुआ संप्रदाय के दूसरे वर्ग की सभा हो रही थी. वह सभास्थल खचाखच भरा हुआ था. उस वक्त वहां पर राज्य के खाद्यमंत्री और उत्तर 24 परगना जिला तृणमूल कांग्रेस के अध्यक्ष ज्योतिप्रिय मल्लिक भी मौजूद थे.
जैसे ही लोगों को पता चला कि प्रधानमंत्री गाइघाटा मैदान में सभा करेंगे, लोग तेजी से वहां से निकल पड़े. तृणमूल कांग्रेस की ओर से उन्हें रोकने की काफी कोशिश की गयी.
इसी बीच लोगों की हुजूम प्रधानमंत्री के पास पहुंचने की कवायद करने लगा. इस दौरान भगदड़ मच गयी, जिसमें कई लोग घायल हो गये. गैर आधिकारिक सूत्रों के अनुसार घायलों की तादाद सैकड़ों में है. लोगों का उत्साह देखकर प्रधानमंत्री को खतरे का अंदाजा हो गया था. लिहाजा उन्होंने अपना भाषण तय समय से 14 मिनट पहले ही खत्म कर दिया.
बड़ो मां से मिले प्रधानमंत्री
कोलकाता. मतुआ महासभा की प्रमुख बड़ो मां के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात को लेकर अंतिम समय तक संशय बना हुआ था. शनिवार सुबह जब प्रधानमंत्री ठाकुरबाड़ी स्थित हेलीपैड पर पहुंचे, तो उस वक्त बंगाल भाजपा के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय और मुकुल राय के साथ बड़ो मां के नाती शांतनु ठाकुर वहां पर उनके स्वागत के लिए मौजूद थे. शांतनु अपने साथ प्रधानमंत्री को लेकर सीधे बड़ो मां के घर पहुंचे. उस वक्त अस्वस्थ वीणापाणि देवी घर में अपनी सहायकों के साथ मौजूद थीं. प्रधानमंत्री ने झुककर उन्हें दोनों हाथ जोड़कर प्रणाम किया और उनकी सेहत के बारे में पूछा. उसके बाद वहां से सीधे मंच पर पहुंच गये.
..और बांग्ला में बोलने लगे पीएम
कोलकाता : मतुआ महासम्मेलन को बांग्ला में संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने सबसे पहले इस संप्रदाय के जनक हरिचांद-जय गुरु चांद के साथ गुरू गोसांइ को नमन करते हुए वैधनाथ ठाकुर, पद्यनभा ठाकुर को याद किया. उन्होंने मतुआ समाज के 200 साल पुराने इतिहास को दोहराते हुए कहा कि अब फिर से किसी को विस्थापित होने का दर्द नहीं झेलना पड़े, इसके लिए सभी को नागरिकता बिल का समर्थन करना चाहिए. प्रधानमंत्री ने बंगाल के गौरवशाली इतिहास को दोहराते हुए कहा कि रामकृष्ण परमहंस से लेकर स्वामी विवेकानंद से लेकर टैगोर और डाॅ श्यामा प्रसादमुखर्जी से लेकर प्रणब मुखर्जी के अवदान को याद करते हुए कहा कि देश के विकास में इस संप्रदाय के लोगों को आगे आना होगा.
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