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कोलकाता : पूर्व उद्योग मंत्री निरुपम सेन का निधन बुधवार को होगा अंतिम संस्कार

Updated at : 25 Dec 2018 4:26 AM (IST)
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कोलकाता :  पूर्व उद्योग मंत्री निरुपम सेन का निधन बुधवार को होगा अंतिम संस्कार

कोलकाता : राज्य में पूर्ववर्ती वाममोर्चा शासन के दौरान औद्योगिक विकास के प्रणेता के तौर पर पहचाने जाने वाले माकपा के वरिष्ठ नेता निरुपम सेन का सोमवार की सुबह शहर के एक अस्पताल में निधन हो गया. 72 साल के निरुपम सेन लंबे समय से बीमार चल रहे थे. पार्टी के पूर्व पोलित ब्यूरो सदस्य […]

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कोलकाता : राज्य में पूर्ववर्ती वाममोर्चा शासन के दौरान औद्योगिक विकास के प्रणेता के तौर पर पहचाने जाने वाले माकपा के वरिष्ठ नेता निरुपम सेन का सोमवार की सुबह शहर के एक अस्पताल में निधन हो गया. 72 साल के निरुपम सेन लंबे समय से बीमार चल रहे थे.
पार्टी के पूर्व पोलित ब्यूरो सदस्य सेन के परिवार में उनकी पत्नी, एक बेटा और एक बेटी है. अस्पताल के सूत्रों ने बताया कि सोमवार सुबह 5:10 बजे दिल का दौरा पड़ने से सेन का निधन हो गया. दिसंबर के शुरू में स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद से सेन जीवनरक्षक प्रणाली पर थे और उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी.
अस्पताल के एक अधिकारी ने बताया कि सेन गुर्दे की बीमारी से पीड़ित थे और 2013 में उन्हें मस्तिष्काघात हुआ था. माकपा नीत वाम मोर्चा के 2001 में सत्ता में आने के बाद बुद्धदेब भट्टाचार्य के मंत्रिमंडल के प्रमुख चेहरों में से एक सेन को वाणिज्य एवं उद्योग का प्रभार सौंपा गया.
श्री भट्टाचार्य एवं श्री सेन के नेतृत्व में ही वाममोर्चा ने राज्य में औद्योगीकरण का अभियान शुरू किया था और निजी निवेश की प्रक्रिया शुरू की थी. नीति में इस बदलाव ने उन्हें काफी फायदा पहुंचाया.
2006 के विधानसभा चुनाव में वाममोर्चा को जबर्दस्त जीत हासिल हुई. लेकिन, 2006 के अंत तक टाटा नैनो कार संयंत्र को लेकर सिंगूर में भूमि अधिग्रहण अभियान ने इस शासन को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया था.
जबरन भूमि अधिग्रहण के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के चलते अंतत: टाटा मोटर्स को कार संयंत्र को 2008 में सिंगूर से गुजरात ले जाना पड़ा था. तत्कालीन विपक्ष तृणमूल कांग्रेस की अगुवाई में सिंगूर एवं नंदीग्राम में भूमि अधिग्रहण रोधी प्रदर्शनों को 2011 में 34 साल पुरानी वाममोर्चा सरकार के गिर जाने के मुख्य कारणों में से एक माना जाता है.
पूरी तरह राजनीति से कर लिया किनारा
पार्टी के भीतर और बाहर खूब आलोचना झेलने वाले माकपा के तत्कालीन पोलित ब्यूरो सदस्य ने खुद को सक्रिय राजनीति से अलग कर लिया था. अगले कुछ सालों में खराब सेहत की वजह से वह पोलित ब्यूरो से, केंद्रीय समिति से और इस साल की शुरुआत में माकपा पार्टी कांग्रेस के दौरान वह राज्य समिति से भी हट गये थे.
26 दिसंबर को बर्दवान में होगा अंतिम संस्कार
वह बर्दवान दक्षिण निर्वाचन क्षेत्र से तीन बार विधायक रहे. पार्टी सूत्रों ने बताया कि सेन का पार्थिव शरीर उनके निवास ले जाया जायेगा और फिर इसे एक निजी शवगृह पहुंचाया जायेगा. बुधवार को सेन का शव यहां स्थित सीटू कार्यालय ले जाया जायेगा. इसके बाद इसे पार्टी के राज्य मुख्यालय पहुंचाया जायेगा, जहां लोग उनके अंतिम दर्शन कर सकेंगे. उसी दिन उनके गृहनगर बर्दवान में उनका अंतिम संस्कार कर दिया जायेगा.
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