कोलकाता : राज्य में बढ़ा सौर ऊर्जा उत्पादन : ममता

Published at :15 Dec 2018 4:36 AM (IST)
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कोलकाता :  राज्य में बढ़ा सौर ऊर्जा उत्पादन : ममता

कोलकाता : मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस के मौके पर दावा किया है कि उनकी सरकार गैर परंपरागत स्रोतों से उर्जा का उत्पादन बढ़ाने की ओर कदम बढ़ा रही है, जिसकी वजह से सौर ऊर्जा उत्पादन में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. शुक्रवार सुबह मुख्यमंत्री ने ट्वीटर के माध्यम से कहा है […]

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कोलकाता : मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस के मौके पर दावा किया है कि उनकी सरकार गैर परंपरागत स्रोतों से उर्जा का उत्पादन बढ़ाने की ओर कदम बढ़ा रही है, जिसकी वजह से सौर ऊर्जा उत्पादन में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. शुक्रवार सुबह मुख्यमंत्री ने ट्वीटर के माध्यम से कहा है कि पश्चिम बंगाल में हमारी सरकार गैर परंपरागत स्रोतों से ऊर्जा का उत्पादन बढ़ाने में तेजी से प्रगति कर रही है.
वाममोर्चा के शासन काल से उर्जा की क्षमता की तुलना करते हुए ममता ने कहा है कि साल 2011 में 1.2 मेगावाट (मेगावाट) से बढ़कर सौर ऊर्जा उत्पादन 2017-18 में 53.216 मेगावाट तक पहुंच गया है, जबकि इसी अवधि के दौरान बायोमास बिजली की उत्पादन 1.59 मेगावाट से बढ़कर 13.29 मेगावाट हो गया है. एक पवन ऊर्जा उत्पादन संयंत्र विकसित करने के लिए सागर द्वीप में भी एक सर्वेक्षण चल रहा है.
उल्लेखनीय है कि विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत ऊर्जा दक्षता ब्‍यूरो (बीईई) ऊर्जा दक्षता और संरक्षण के महत्‍व के बारे में जन जागरूकता फैलाने के लिए प्रतिवर्ष 14 दिसंबर को राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस मनाता है.
जागरूकता फैलाने के रूप में बीईई ऊर्जा उपभोग को कम करने में उद्योगों के प्रयासों को मान्‍यता प्रदान करने तथा उन्‍हें प्रोत्साहित करने के लिए राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार प्रदान करता है.
बंगाल में औद्योगिक बिजली इस्तेमाल में 27.2 फीसदी की बढ़ोतरी
विगत सात वर्षों में तृणमूल शासन के दौरान राज्य में वाणिज्यिक बिजली इस्तेमाल में 27.2 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि घरेलू खपत 80.74 प्रतिशत बढ़ी है. इससे विभाग के राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है.
इस अवधि में बड़ी संख्या में पश्चिम बंगाल में मध्यम सूक्ष्म और लघु उद्योगों की स्थापना हुई है, जिसके लिए औद्योगिक बिजली इस्तेमाल की मांग बढ़ी है. विभाग आने वाले वर्षों में अधिक उद्योगों को निर्बाध बिजली प्रदान करने के लिए बुनियादी ढांचा भी तैयार करने की ओर बढ़ चला है.
इस संबंध में इसका उल्लेख किया जा सकता है कि बांग्ला सरकार यूरोपीय देशों के मानकों के अनुसार बिजली उत्पादन पर विभिन्न रास्ते अपना रही है. विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि विद्युत विभाग संभवतः बिजली की सर्वोत्तम गुणवत्ता की आपूर्ति करने के लिए प्रतिबद्ध है.
कोलकाता : मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस के मौके पर दावा किया है कि उनकी सरकार गैर परंपरागत स्रोतों से उर्जा का उत्पादन बढ़ाने की ओर कदम बढ़ा रही है, जिसकी वजह से सौर ऊर्जा उत्पादन में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. शुक्रवार सुबह मुख्यमंत्री ने ट्वीटर के माध्यम से कहा है कि पश्चिम बंगाल में हमारी सरकार गैर परंपरागत स्रोतों से ऊर्जा का उत्पादन बढ़ाने में तेजी से प्रगति कर रही है.
वाममोर्चा के शासन काल से उर्जा की क्षमता की तुलना करते हुए ममता ने कहा है कि साल 2011 में 1.2 मेगावाट (मेगावाट) से बढ़कर सौर ऊर्जा उत्पादन 2017-18 में 53.216 मेगावाट तक पहुंच गया है, जबकि इसी अवधि के दौरान बायोमास बिजली की उत्पादन 1.59 मेगावाट से बढ़कर 13.29 मेगावाट हो गया है. एक पवन ऊर्जा उत्पादन संयंत्र विकसित करने के लिए सागर द्वीप में भी एक सर्वेक्षण चल रहा है.
उल्लेखनीय है कि विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत ऊर्जा दक्षता ब्‍यूरो (बीईई) ऊर्जा दक्षता और संरक्षण के महत्‍व के बारे में जन जागरूकता फैलाने के लिए प्रतिवर्ष 14 दिसंबर को राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस मनाता है. जागरूकता फैलाने के रूप में बीईई ऊर्जा उपभोग को कम करने में उद्योगों के प्रयासों को मान्‍यता प्रदान करने तथा उन्‍हें प्रोत्साहित करने के लिए राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार प्रदान करता है.
बंगाल में औद्योगिक बिजली इस्तेमाल में 27.2 फीसदी की बढ़ोतरी
विगत सात वर्षों में तृणमूल शासन के दौरान राज्य में वाणिज्यिक बिजली इस्तेमाल में 27.2 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि घरेलू खपत 80.74 प्रतिशत बढ़ी है. इससे विभाग के राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. इस अवधि में बड़ी संख्या में पश्चिम बंगाल में मध्यम सूक्ष्म और लघु उद्योगों की स्थापना हुई है, जिसके लिए औद्योगिक बिजली इस्तेमाल की मांग बढ़ी है.
विभाग आने वाले वर्षों में अधिक उद्योगों को निर्बाध बिजली प्रदान करने के लिए बुनियादी ढांचा भी तैयार करने की ओर बढ़ चला है. इस संबंध में इसका उल्लेख किया जा सकता है कि बांग्ला सरकार यूरोपीय देशों के मानकों के अनुसार बिजली उत्पादन पर विभिन्न रास्ते अपना रही है. विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि विद्युत विभाग संभवतः बिजली की सर्वोत्तम गुणवत्ता की आपूर्ति करने के लिए प्रतिबद्ध है.
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