राज्यसभा चुनाव: दो पार्टियों के वो छह विधायक, जो बताए जा रहे 'गेमचेंजर'!
एआई जेनरेटेड फोटो.
Rajya Sabha Election: झारखंड राज्यसभा चुनाव में आरजेडी और माले के छह विधायकों को गेमचेंजर माना जा रहा है. इंडिया गठबंधन और एनडीए के बीच कड़ा मुकाबला है. क्रॉस वोटिंग और दूसरी प्राथमिकता के वोट नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं. सभी दल जीत का दावा कर रहे हैं, नतीजे पर नजर है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.
रांची से आनंद मोहन की रिपोर्ट
Rajya Sabha Election: झारखंड विधानसभा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए मतदान पूरा होने के बाद सियासी माहौल अचानक और गर्म हो गया है. मतदान खत्म होते ही दोनों गठबंधन (इंडिया ब्लॉक और एनडीए) अपनी-अपनी जीत के दावे करने लगे. मतगणना से पहले ही दावे इतने आत्मविश्वासी हैं कि लगता है जैसे परिणाम पहले ही किसी ने व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी में तय कर दिया हो, बस मतगणना की औपचारिकता बाकी है.
आरजेडी-माले के 6 विधायक क्यों बने सबसे बड़ा फैक्टर
पूरे चुनावी गणित में सबसे ज्यादा चर्चा आरजेडी-माले के छह विधायकों की हो रही है. इन चारों को “गेमचेंजर” बताया जा रहा है, क्योंकि दोनों सीटों के समीकरण में इनका झुकाव निर्णायक असर डाल सकता है. 81 सदस्यीय विधानसभा में छोटी-छोटी टूट-फूट भी पूरे खेल को पलट सकती है और यही वजह है कि आरजेडी के हर मूव को राजनीतिक ज्योतिष की तरह पढ़ा जा रहा है.
इंडिया गठबंधन का 56 का मजबूत दावा
इंडिया गठबंधन के पास कुल 56 विधायकों का समर्थन बताया जा रहा है. इसमें झामुमो के 34, कांग्रेस के 16, आरजेडी के 4 और माले के 2 विधायक शामिल हैं. कागज पर यह आंकड़ा आराम से दो सीट निकालने के लिए पर्याप्त दिखता है, लेकिन राजनीति में “कागज” और “हकीकत” के बीच अक्सर वही फर्क होता है, जो प्लान और अराजकता के बीच होता है.
कांग्रेस का आत्मविश्वास और 28.97 वोट का दावा
कांग्रेस नेता राधाकृष्ण किशोर ने दावा किया कि पार्टी प्रत्याशी प्रणव झा को 28.97 वोट मिलेंगे. यह दावा सुनकर गणित के टीचर भी थोड़े असहज हो सकते हैं, क्योंकि वोट आमतौर पर इंसानी अंगुलियों पर गिने जाते हैं, दशमलव पर नहीं. इसके पीछे दूसरी प्राथमिकता के वोटों और ट्रांसफर मैकेनिज्म की रणनीति बताई जा रही है, जिससे कांग्रेस अपनी जीत सुनिश्चित मान रही है.
एनडीए का 24 वोटों पर भरोसा
दूसरी तरफ एनडीए के पास 24 विधायकों का समर्थन है. भाजपा के 21, आजसू, जदयू और लोजपा के एक-एक विधायक इस खेमे में हैं. एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी इस आधार पर मैदान में हैं. संख्या कम जरूर है, लेकिन राजनीति में आत्मविश्वास का अनुपात हमेशा आंकड़ों से मेल नहीं खाता.
‘अंतरात्मा की आवाज’ बना नया चुनावी हथियार
चुनाव के दौरान सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला शब्द इस बार “अंतरात्मा की आवाज” रहा. नेताओं ने इसे इतना घिस दिया है कि अब यह राजनीतिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक अभियान जैसा लगने लगा है. कहा जा रहा है कि क्रॉस वोटिंग की संभावना इसी “अंतरात्मा” के भरोसे टिकी है. यानी पार्टी लाइन एक तरफ और आत्मा दूसरी तरफ और बीच में झारखंड की राजनीति.
क्रॉस वोटिंग की आशंका और एजेंटों की भूमिका
कई रिपोर्ट्स में यह भी संकेत मिला कि क्रॉस वोटिंग का खतरा बना हुआ है. पार्टी एजेंटों की भूमिका इस पूरे खेल में बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि वोटिंग की निगरानी और रिपोर्टिंग सीधे नेतृत्व तक जा रही है. कांग्रेस, झामुमो और आरजेडी सभी अपने-अपने स्तर पर विधायकों पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं.
राजनीतिक बॉडी लैंग्वेज और सस्पेंस का खेल
मतदान के बाद नेताओं की बॉडी लैंग्वेज को भी संकेत के रूप में पढ़ा जा रहा है. कहीं आत्मविश्वास ज्यादा दिखा, कहीं हल्की बेचैनी दिखी. राजनीति में अब सिर्फ वोट नहीं गिने जाते, मुस्कान की चौड़ाई और हाथ मिलाने की मजबूती भी विश्लेषण का हिस्सा बन चुकी है.
इसे भी पढ़ें: इरफान अंसारी का बड़ा दावा, बोले- राज्यसभा चुनाव में 60 वोट तक पहुंचेगा महागठबंधन
नतीजों से पहले सस्पेंस चरम पर
अब पूरा मामला कुछ घंटों के इंतजार पर टिक गया है. दोनों सीटों का परिणाम न सिर्फ गणित पर, बल्कि क्रॉस वोटिंग और अंतिम समय के राजनीतिक समीकरणों पर निर्भर करेगा. इंडिया गठबंधन जहां अपने 56 के आंकड़े पर भरोसा जता रहा है, वहीं एनडीए उलटफेर की उम्मीद में मैदान में डटा है. राजनीति में आखिरी सच हमेशा मतपेटी ही बताती है, बाकी सब बस आत्मविश्वास की सजावट है, जो नतीजे आते ही या तो ताज बनती है या बस एक और भाषण.
इसे भी पढ़ें: राज्यसभा चुनाव: मतगणना से पहले राधाकृष्ण किशोर का दावा, प्रणव झा को मिलेंगे 28.97 वोट
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










