कोलकाता : रेडलाइट इलाके से निकली लड़कियों के लिए बनी मिसाल

Updated at : 18 Nov 2018 8:48 AM (IST)
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कोलकाता : रेडलाइट इलाके से निकली लड़कियों के लिए बनी मिसाल

चकलाघरों से मुक्त करायी गयी लड़कियों को मुख्यधारा में लाने को प्रयासरत रोकैया कोलकाता : घर में आठ भाई बहनों का संसार. माता-पिता की गरीबी. उस पर से यौनपल्ली की अमानवीय यातना का दौर. फिर एड्स जैसी बीमारी से पीड़ित होना. इसके बाद भी दक्षिण 24 परगना की रहने वाली रोकैया ने लंबी कानूनी लड़ाई […]

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चकलाघरों से मुक्त करायी गयी लड़कियों को मुख्यधारा में लाने को प्रयासरत रोकैया
कोलकाता : घर में आठ भाई बहनों का संसार. माता-पिता की गरीबी. उस पर से यौनपल्ली की अमानवीय यातना का दौर. फिर एड्स जैसी बीमारी से पीड़ित होना. इसके बाद भी दक्षिण 24 परगना की रहने वाली रोकैया ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ते हुए दूसरी पीड़िताओं के लिए मिसाल कायम किया है. वह दक्षिण 24 परगना के बंधन मुक्ति नामक संगठन ने जुड़ कर विभिन्न चकलाघरों से मुक्त करायी गयी लड़कियों को समाज की मुख्यधारा में लाने का काम बखूबी कर रही हैं.
क्या थी घटना: रोकैया को वर्ष 2016 में मिस्ड कॉल के जरिये किसी युवक ने संपर्क किया था. उसी ने उसे मुबंई ले जाकर एक कोठे पर बेच दिया. जिसके बाद उसके साथ अमानवीय यातना का दौर जारी हुआ. वहीं पर उसे एड्स जैसी घातक बीमारी का दंश भी झेलना पड़ा. उसे महाराष्ट्र पुलिस ने रेस्क्यू किया. परंतु बांग्ला भाषी होने के कारण प्रथमदृष्टया उसे बांग्लादेशी समझा गया. मगर बाद में उसने अपने घर की जानकारी दी. जिसे पुलिस ने दक्षिण 24 परगना पुलिस को संपर्क किया.
पुलिस ने महिला तस्करी की पीड़िताओं को समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए स्थानीय स्तर पर कार्य कर रही संस्था गरानबोस ग्राम विकास केंद्र से संपर्क किया. और पीड़िता को डायमंड हार्बर थाने की पुलिस जब यहां लेकर आयी तो उसके माता-पिता ने उसे रखने से इंकार कर दिया. इसी संस्था की मदद से उसने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी. इस काम में राहुल पात्रा नामक वकील ने उसकी मदद की.
अंतत: सरकार की ओर से उसे करीब चार लाख रुपये की धनराशि मुआवजे के तौर पर मिली. जिससे वह अपना जीवन निर्वाह करने के साथ बंधन मुक्ति के सदस्यों में शामिल होकर रेडलाईट इलाके से छुड़ाकर लायी गयी लड़कियों को समाज की मुख्यधारा में लाने के काम में जुटी है. गरानबोस ग्राम विकास केंद्र की सचिव शुभोश्री रप्तान बताती है कि वह गांव की लड़कियों के लिए वह सचमुच एक मिसाल है.
जो एडस जैसी बीमारी से पीड़ित होने के बावजूद भी मानसिक अवसाद में जाने की बजाए अन्य लड़कियों को प्रेरणा प्रदान करने में जुटी है. जो कि मिसाल है. वह अपने साथ हुए अन्याय के लिए जिम्मेदार लोगों को सजा दिलाने के लिए कानूनी प्रक्रिया चला रही है. उसे विश्वास है कि वह अपने लक्ष्य में जरुर सफल होगी.
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