न मुकुल एक इंच जमीन छोड़ना चाहते हैं, न ही दिलीप

Updated at : 18 Jul 2018 2:02 AM (IST)
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न मुकुल एक इंच जमीन छोड़ना चाहते हैं, न ही दिलीप

कोलकाता : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा को लेकर भाजपा में क्रेडिट लेने की अप्रत्यक्ष होड़ मच गयी है. लड़ाई दिलीप घोष बनाम मुकुल राय के बीच है. तृणमूल कांग्रेस में नंबर दो की हैसियत रखनेवाले मुकुल राय मौजूदा समय भी दूसरे नबंर हैं.इसे साबित करने में दिलीप घोष के समर्थक लग गये हैं. हालांकि […]

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कोलकाता : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा को लेकर भाजपा में क्रेडिट लेने की अप्रत्यक्ष होड़ मच गयी है. लड़ाई दिलीप घोष बनाम मुकुल राय के बीच है. तृणमूल कांग्रेस में नंबर दो की हैसियत रखनेवाले मुकुल राय मौजूदा समय भी दूसरे नबंर हैं.इसे साबित करने में दिलीप घोष के समर्थक लग गये हैं. हालांकि पंचायत चुनाव में जंगलमहल इलाके में भाजपा को मिली सफलता का श्रेय मुकुल राय को दिया जा रहा था. मुकुल राय को पार्टी ने पंचायत चुनाव की कमान दे रखी थी, जिसका फल भी मिला था.
भाजपा मुख्य विपक्षी पार्टी के रूप में उभर कर सामने आयी थी. पुरुलिया की सभा में अमित शाह ने जिस तरह से मुकुल को तवज्जो दिया था, उससे मुकुल समर्थकों के हौसले बुलंद थे. लेकिन प्रधानमंत्री की सभा में जिस तरह फिल्डिंग करते हुए दिलीप घोष उभर कर सामने आये, उससे उनके समर्थकों का हौसले बुलंद हैं. इसके साथ ही अब नया सवाल उठ रहा है कि बंगाल में भाजपा लोकसभा की कमान किसके हाथ में देगी. पंचायत की तरह मुकुल पर ही भरोसा करेगी या फिर कमान दिलीप घोष के ही हाथ में रहेगी.
पश्चिम मेदिनीपुर के कृषक कल्याण समा में प्रधानमंत्री नेे एक तरह से लोकसभा चुनाव का उद्घोष ही कर दिया है.बंगाल उनके लिए कितना महत्वपूर्ण है, इसका जिक्र करते हुए उन्होंने अमित शाह की तरह ही बंगाल से 22 सीटों की मांग रख दी है. पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री के बाद दिलीप घोष ही पूरे मामले की कमान अपने हाथ में रखे हुए थे.
हालांकि जंगलमहल इलाके को मुकुल का गढ़ माना जाता है. लेकिन उन्हें लाइमलाइट में आने का मौका ही नहीं मिला. अगर कहा जाये कि दिलीप ने मुकुल राय के लिए एक इंच जगह भी नहीं छोड़ी, तो यह गलत नहीं होगा. मुकुल मंच पर मौजूद तो थे, लेकिन पहली कतार में वह नजर नहीं आये. एक तरह से वह पर्दे के पीछे ही रहे. कहा जा रहा है कि उन्हें वह सम्मान नहीं मिला, जो अमित शाह की सभा में मिला था. हालांकि भाजपा का अंतर्कलह भी लोगों के सामने उभर कर आ गया.
खुद केंद्रीय राज्य मंत्री बाबुल सुप्रियो और प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष शामियाना दुर्घटना के बाद एक दूसरे के साथ सार्वजनिक रूप से विवाद करने लगे. सवाल उठने लगे कि जिस मुकुल पर भरोसा करके ममता बनर्जी ने जंगलमहल छोड़ा था, उसी मुकुल ने भाजपा को सफलता दिलायी. तृणमूल कांग्रेस के संगठन में सेंधमारी की, लेकिन उन्हें ही तवज्जो नहीं देकर प्रदेश भाजपा क्या संदेश देना चाहती है. कुल मिलाकर अमित शाह की सभा में जहां आकर्षण के केंद्र मुकुल राय थे, तो प्रधानमंत्री की सभा में प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष रहे.
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