कृति पुरुष थे नथमल केडिया

Updated at : 09 Jul 2018 2:18 AM (IST)
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कृति पुरुष थे नथमल केडिया

कोलकाता : ज्ञान भारती शिक्षण संस्थान के संस्थापक सदस्य नथमल केडिया की स्मृति में विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के तरफ से स्मृति शोकसभा का आयोजन ज्ञान भारती विद्यापीठ के सभागार में आयोजित किया गया. शोकसभा का आयोजन ज्ञान भारती के तत्वावधान में अर्चना, अखिल भारतवर्षीय केडिया सभा ट्रस्ट कोलकाता, श्री श्याम प्रेम मंडल (बड़ाबाजार), श्री बड़ाबाजार […]

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कोलकाता : ज्ञान भारती शिक्षण संस्थान के संस्थापक सदस्य नथमल केडिया की स्मृति में विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के तरफ से स्मृति शोकसभा का आयोजन ज्ञान भारती विद्यापीठ के सभागार में आयोजित किया गया. शोकसभा का आयोजन ज्ञान भारती के तत्वावधान में अर्चना, अखिल भारतवर्षीय केडिया सभा ट्रस्ट कोलकाता, श्री श्याम प्रेम मंडल (बड़ाबाजार), श्री बड़ाबाजार कुमार सभा पुस्तकालय, भारतीय संस्कृति संसद, श्री केडिया​ सभा ट्रस्ट, मारवाड़ी रिलीफ सोसायटी, पश्चिम बंगाल प्रातीय मारवाड़ी सम्मेलन, संस्कृति, राणी सती प्रचार समिति, सुरभि सदन गोशाला, फतेहपुर शेखावटी प्रगति संघ, फतेहपुर शेखावटी नागरिक संघ, श्री केडिया सभा आदि सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारियों ने दिवंगत केडिया के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी.
विजय कुमार ढांढनिया ने कहा कि केडिया जी की साहित्य साधना विरल थी. बजरंग लाल तुलस्यान​ ने कहा कि वे ज्ञान भारती के लिए संस्थापक सदस्य थे. उनसे मैंने यही सीखा कि भूल को स्वीकार कर लेने से बहुत-सी समस्याओं का समाधान हो जाता है. पवन भालोटिया ने कहा कि ग्रंथ के समान थे. वसुंधरा मिश्र ने कहा कि समाज के पढ़े-लिखे महिलाओं को साहित्य सृजन के लिए वे प्रेरित करते थे. ज्ञान भारती एवं अर्चना की स्थापना उनके शिक्षा एवं संस्कृति​ के प्रति निष्ठा का परिणाम है. विश्वनाथ धानुका ने कहा कि वह मृदुल स्वभाव के थे. गोविंदराम अग्रवाल ने कहा कि उनमें समाजसेवा के प्रति निष्ठा थी. गोपीराम केडिया ने कहा कि हमेशा नये रचनाकारों को लिखने-पढ़ने के लिए प्रेरित करते थे. ब्रह्मदत्त बरड़िया ने कहा कि वह समाज सेवा के प्रति लोगों को प्रेरित करते थे.
महावीर प्रसाद बजाज ने कहा कि साहित्य के अलावा उनमें राष्ट्र की सेवा करने के प्रति हमेशा प्रेरित करते थे. बाबूलाल शर्मा ने कहा कि वह कृति पुरुष थे. उनमें साहित्यिक निष्ठा भरपूर थी. इसी के चलते वे मायूस नहीं होते थे. मनमोहन केडिया ने कहा कि वह बहुआयामी प्रतिभा संपन्न महापुरुष थे. राम कथा वाचक श्रीकांत शर्मा बाल व्यास ने श्री केडिया का कर्म हमारे लिए प्रेरक है. उनकी साहित्य साधना हमारे लिए पथ प्रदर्शक है.
शोकसभा की अध्यक्षता करते हुए ज्ञान भारती के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद पंसारी ने कहा कि उनकी साहित्यिक एवं सामाजिक सेवाएं हमारे लिए एक आदर्श प्रस्तुत करती है. मृदुला कोठारी, गुलाब वैद, चिराग चतुर्वेदी ने कविताओं के माध्यम से अपनी श्रद्धांजलि दी. इस अवसर पर ज्ञान भारती की तरफ से जगमोहन बागला, सुधीर कुमार पाटोदिया, अंजनी कुमार पोद्दार, रतन शाह, मीठालाल शर्मा, सुभाष जैन, गोपा वर्मन, मथुरा प्रसाद झा, शैली चौधरी, ललिता गांगुली एवं विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के तरफ से एवं यादव कुमार चन्नानी, काशीप्रसाद जायसवाल, सुरेंद्र कुमार चमड़िया, संजय मस्करा, गोपालदास चांडक आदि ने श्रद्धांजलि अर्पित की.
कार्यक्रम का संचालन करते हुए सुशीला चन्नानी ने कहा कि वह हमेशा महिलाओं को पढ़ने-लिखने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते थे. धन्यवाद ज्ञापन करते हुए ज्ञान भारती विद्यापीठ के अध्यक्ष शरद कुमार केडिया ने कहा कि यह हमारे लिए गौरव की बात है कि बाबूजी द्वारा स्थापित ज्ञान भारती एवं अर्चना की स्थापना के साथ ही विभिन्न सामाजिक संस्थाओं से जुड़े रहे.
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