ePaper

कटवा में गंगा बन गयी है ‘डॉल्फिन’ के लिए मरण-कुंड, भागीरथी में बोट से गश्त और निगरानी बढ़ाने की दरकार

Updated at : 19 Dec 2024 9:37 PM (IST)
विज्ञापन
कटवा में गंगा बन गयी है ‘डॉल्फिन’ के लिए मरण-कुंड, भागीरथी में बोट से गश्त और निगरानी बढ़ाने की दरकार

पूर्व बर्दवान जिले के कटवा में गंगा नदी प्राकृतिक रूप से बेहद नाजुक व संवेदनशील डॉल्फिन मछली के लिए मानो मरण-कुंड बन गया है. एक के बाद एक डॉल्फिन मछली की हो रही मौतों को लेकर वन विभाग चिंतित है. गुरुवार को एक बार फिर वन विभाग ने कटवा शहर के गोलपाड़ा घाट से एक मरी डॉल्फिन बरामद की.

विज्ञापन

बर्दवान/पानागढ़.

पूर्व बर्दवान जिले के कटवा में गंगा नदी प्राकृतिक रूप से बेहद नाजुक व संवेदनशील डॉल्फिन मछली के लिए मानो मरण-कुंड बन गया है. एक के बाद एक डॉल्फिन मछली की हो रही मौतों को लेकर वन विभाग चिंतित है. गुरुवार को एक बार फिर वन विभाग ने कटवा शहर के गोलपाड़ा घाट से एक मरी डॉल्फिन बरामद की. मछुआरों के जाल में फंसने और धातुई हिस्से से चोटिल होकर यह मछली बेमौत मर रही है. इससे वन विभाग के माथे पर बल पड़ गये हैं.

संयोग से कुछ दिन पहले, वन विभाग ने कटवा के भागीरथी के काशीगंज घाट पर एक पूर्ण विकसित डॉल्फिन का सड़ा शव बरामद किया था. मृत डॉल्फिन के मुंह में मछली पकड़ने के जाल का एक टुकड़ा भी पाया गया था. स्थानीय सूत्रों के अनुसार मृत डॉल्फिन मादा थी. उसके शरीर पर चोटों के कई निशान पाये गये हैं. वन विभाग की प्रारंभिक जांच से पता चला है कि जाल में फंसने और फिर हार्ट अटैक से डॉल्फिन की मौत हो गयी. यह जानकारी मृत डॉल्फिन की ऑटोप्सी रिपोर्ट में सामने आयी है.

इस बीच, पूर्व बर्दवान जिले के एडीएफओ सौगत मुखोपाध्याय ने बताया कि गंगा डॉल्फिन की मौत दुर्भाग्यपूर्ण है. हमें अपनी निगरानी व चौकसी बढ़ाने के लिए कर्मचारियों की आवश्यकता है. स्थिति की गंभीरता से जिला मजिस्ट्रेट को सूचित करा दिया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि भागीरथी नदी में पेट्रोलिंग के लिए एक नाव है. और नाव चाहिए. इसके अलावा, उन्होंने इस दिन अजय व भागीरथी नदी का भी दौरा किया. उन्हें लगता है कि नदी में ढेर सारे डॉल्फिन, घड़ियाल हैं. इसलिए हमारी वहां विभिन्न योजनाएं हैं. कटवा में चल रहा डॉल्फिन का डेथ मार्च

उधर, पर्यावरण कार्यकर्ताओं के एक समूह ने कहा कि कटवा में डॉल्फिन का डेथ मार्च चल रहा है. जलीय जैव-विविधता का संतुलन बनाये रखने के लिए नदियों को प्रदूषण मुक्त करना और उसे डॉल्फिन के रहने लायक बनाना जरूरी है. गंगा को डॉल्फिन के अनुकूल बनाना आवश्यक है. भागीरथी के कुछ क्षेत्रों में देखी गयी डॉल्फिन मछलियों की संख्या पारिस्थितिक रूप से असंतोषजनक है. लेकिन उम्मीद है कि डॉल्फिन मछलियों की तादाद बढ़ेगी. लेकिन मौजूदा स्थिति ऐसी है कि ये संवेदनशील व नाजुक मछली अब दम तोड़ने लगी है.

वन विभाग से जुड़े सूत्रों की मानें, तो कटवा का भागीरथी डॉल्फिन अभयारण्य कल्याणपुर से पाटुली तक लगभग 32 किमी के क्षेत्र को कवर करता है. कुछ साल पहले, राज्य वन विभाग ने कटवा के शंखाई घाट पर एक गंगा डॉल्फिन संरक्षण केंद्र बनाया था. वे डॉल्फिन पर भी शोध कर रहे हैं. अलबत्ता, डॉल्फिन की मौत नहीं रुक रही है. मिली जानकारी के मुताबिक इस क्षेत्र में 35 से अधिक डॉल्फिन होने की बात कही जाती है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
Prabhat Khabar News Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar News Desk

यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola