जयपुर के राउतखंड इलाके की टूटी सड़क बनी प्रशासनिक उपेक्षा की मिसाल

Updated at : 03 Jun 2025 10:00 PM (IST)
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जयपुर के राउतखंड इलाके की टूटी सड़क बनी प्रशासनिक उपेक्षा की मिसाल

जिले के जयपुर प्रखंड अंतर्गत राउतखंड इलाके में प्रसादपुर से राउतखंड तक की करीब दो किलोमीटर लंबी सड़क आज प्रशासनिक उपेक्षा और राजनीतिक लापरवाही का प्रतीक बन चुकी है. गड्ढों, कीचड़ और बारिश के मौसम में पानी से लबालब इस सड़क पर चलना जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है.

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बांकुड़ा.

जिले के जयपुर प्रखंड अंतर्गत राउतखंड इलाके में प्रसादपुर से राउतखंड तक की करीब दो किलोमीटर लंबी सड़क आज प्रशासनिक उपेक्षा और राजनीतिक लापरवाही का प्रतीक बन चुकी है. गड्ढों, कीचड़ और बारिश के मौसम में पानी से लबालब इस सड़क पर चलना जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है. स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह सड़क राजशोल, प्रसादपुर, पदुमपुर, सुजारगढ़, श्यामदासपुर सहित कम से कम 10 गांवों के हजारों लोगों की एकमात्र संपर्क सड़क है, जिससे पंचायत कार्यालय तक पहुंचा जाता है. लेकिन 2011 से पहले, यानी तृणमूल कांग्रेस के सत्ता में आने से पहले इसका अंतिम मरम्मत कार्य हुआ था. इसके बाद करीब 15 वर्षों में इस महत्वपूर्ण सड़क पर एक बार भी मरम्मत नहीं करायी गयी.

मानसून में सड़क बन जाती है तालाब

बरसात के मौसम में सड़क पर पानी भर जाता है और वाहनों का आना-जाना लगभग बंद हो जाता है. जगह-जगह कीचड़ और फिसलन के कारण कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन को इसकी सूचना दी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे लोगों का सरकार पर से भरोसा टूटता जा रहा है.

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज

स्थानीय भाजपा नेतृत्व ने इस सड़क को लेकर तृणमूल सरकार पर तीखा हमला बोला है. भाजपा नेताओं का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस ने पंचायत चुनाव में विपक्ष को उम्मीदवार तक नहीं उतारने दिया और अब निर्विरोध सत्ता में आकर जनसेवा की जगह केवल लूट की राजनीति कर रही है. उनका आरोप है कि सड़क की हालत इतनी खराब है कि पिछले कई वर्षों से इस पर कोई वाहन भी नहीं चल सका है.

तृणमूल ब्लॉक अध्यक्ष की टिप्पणी से और भड़के लोग

इस बीच जब इस विषय में जयपुर ब्लॉक के तृणमूल अध्यक्ष कौशिक बटब्याल से सवाल किया गया तो उन्होंने नाराजगी में कहा, “सभी सड़कों को करना होगा? इसे करने का क्या मतलब है? ” उनकी यह टिप्पणी स्थानीय लोगों को और चुभ गयी है. ग्रामीणों का कहना है कि यह बयान तृणमूल के अहंकार और जनभावनाओं की अनदेखी को दर्शाता है. अब इलाके में सरकार और पार्टी के खिलाफ जनाक्रोश और गहरा होता जा रहा है.

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