कोडरमा में महुआ की लालच में जंगल में आग लगा रहे लोग

जंगल में आग लगाने की 34 घटना
Koderma News: कोडरमा वन प्रमंडल में इन दिनों महुआ चुनने के लिए जंगल में आग लगाने की घटनाएं सामने आई है. 12 फरवरी के बाद से 25 अप्रैल तक कुल 34 आग की घटनाएं सामने आ चुकी हैं. इससे करीब 67 हेक्टेयर वन भूमि प्रभावित हुई है. विभाग जंगल में आग की घटनाएं कम हो इसको लेकर प्रयास कर रहा है.
कोडरमा से विकास की रिपोर्ट
Koderma News: वन प्रमंडल कोडरमा इन दिनों जंगली हाथियों के आबादी वाले क्षेत्र में आने से इन्हें जंगल की ओर भगाने में जुटा है तो वहीं दूसरी ओर एक अलग चुनौती विभाग के सामने आ रही है. ग्रामीण इलाकों में इन दिनों महुआ चुनने और इसे जमा करने पर लोगों का जोर है तो कुछ लोग जंगल क्षेत्र में स्थित पेड़ से गिरने वाले महुआ को चुनने के लिए जंगल में आग लगा दे रहे हैं. जंगल में आग लगाने के बाद इसे तुरंत बुझाना वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती साबित हो रहा है. ऐसे समय में जब अधिकतर कर्मी हाथियों को आबादी वाले क्षेत्र से दूर जंगल में रखने और कंट्रोल रूम को सक्रिय रखने में जुटे हैं तो आग की घटनाएं काम को और बढ़ा रही है. हालांकि, इस दबाव के बावजूद विभाग आग की इन घटनाओं पर तुरंत काबू पाने में जुटा है.
ढाई महीने में 34 आग की घटनाएं
पिछले करीब ढाई माह में जंगल में महुआ चुनने को लेकर आग लगा देने की 34 घटनाएं सामने आ चुकी हैं. आग लगने की सूचना समय पर मिलने के बाद विभाग ने इन जगहों पर टीम भेजकर आग बुझा भी दी, पर जंगल क्षेत्र का नुकसान जरूर हुआ.
गांवों में जागरूकता अभियान
इस बीच जंगल क्षेत्र में महुआ चुनने के दौरान आग लगने की घटनाएं कम हो इसको लेकर विभाग कई स्तर से प्रयास कर रहा है. गांवों में जागरूकता अभियान चलाने के साथ ही अन्य कार्य किए जा रहे हैं. जानकारी के अनुसार वन प्रमंडल कोडरमा में इस साल महुआ चुनने को लेकर जंगल में आग लगा देने की पहली घटना 12 फरवरी 2026 को सामने आई़ इसके बाद जैसे-जैसे महुआ का सीजन बढ़ रहा है आग जनी की घटनाएं सामने आ रही हैं.
पहली बार महुआ मैपिंग के साथ झाड़ू वितरण अभियान
महुआ चुनने को लेकर आग की घटनाओं को देखते हुए वन प्रमंडल कोडरमा ने पहली बार महुआ मैपिंग का काम किया है. इसके तहत ऐसे जगह चिन्हित किए गए हैं जहां ज्यादातर महुआ के पेड़ हैं. इन इलाकों के पास स्थित गांव के लोगों के बीच विभाग ने झाड़ू का वितरण किया है, जिससे कि लोग महुआ चुनने से पहले झाड़ू लगा सकें और सुरक्षित तरीके से महआ चुना जा सके और आग लगाने की जरूरत न पड़े. इस तरह का प्रयोग चंदवारा के बेंदी और आसपास के क्षेत्र में किया गया है. इसके बाद इस इलाके में आग की घटनाएं कम हुई हैं. विभाग इसके अलावा अलग-अलग जगहों पर कंट्रोल बर्निंग को लेकर जागरूकता अभियान चला रहा है.
वन प्रमंडल पदाधिकारी ने क्या कहा?
कोडरमा के वन प्रमंडल पदाधिकारी सौमित्र शुक्ला ने कहा कि यह सही है कि महुआ ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार है, पर कुछ लोग महुआ चुनने के लिए जंगल में आग लगा दे रहे हैं. यह पूरी तरह गलत है. जंगल सुरक्षित रहेगा तो मानव जीवन पर नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा. लोग महुआ चुनें, पर जंगल को सुरक्षित भी रखें. विभाग वन अग्नि की घटनाओं पर तुरंत काबू पाने के लिए सक्रिय है. जागरूकता अभियान और अलग-अलग स्तर पर हुए प्रयास के बाद गत वर्ष की अपेक्षा वन अग्नि की घटनाएं कम हुई हैं, पर इसे पूरी तरह नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है.
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By Sweta Vaidya
श्वेता वैद्य प्रभात खबर में लाइफस्टाइल बीट के लिए कंटेंट लिखती हैं. वह पिछले एक साल से व्यंजन (Recipes), फैशन, ब्यूटी टिप्स, होम डेकोर, किचन टिप्स और लेटेस्ट मेहंदी डिजाइन्स जैसे विषयों पर लेख लिख रही हैं. उनका उद्देश्य पाठकों को रोजमर्रा की जिंदगी को आसान और स्टाइलिश बनाने के लिए प्रैक्टिकल टिप्स देना है.
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