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अमीरों को मिल गयी है सरकारी पट्टे की जमीन, अब उठने लगे हैं सवाल

Updated at : 09 Dec 2024 9:43 PM (IST)
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अमीरों को मिल गयी है सरकारी पट्टे की जमीन, अब उठने लगे हैं सवाल

सालानपुर प्रखंड में सरकारी पट्टा के जमीन आवंटन में भारी घोटाला होने की बात सामने आ रही है. जिसकी शिकायत विभिन्न जगहों पर हुई है. आचड़ा ग्राम पंचायत इलाके में सरकारी पट्टे की जमीन पर हो रहे एक कार्य को बीएलएंडएलआरओ कार्यालय के अधिकारियों ने जाकर रोक दिया है.

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आसनसोल/रूपनारायणपुर.

सालानपुर प्रखंड में सरकारी पट्टा के जमीन आवंटन में भारी घोटाला होने की बात सामने आ रही है. जिसकी शिकायत विभिन्न जगहों पर हुई है. आचड़ा ग्राम पंचायत इलाके में सरकारी पट्टे की जमीन पर हो रहे एक कार्य को बीएलएंडएलआरओ कार्यालय के अधिकारियों ने जाकर रोक दिया है. आरोप है कि एक नेता की पत्नी व उसके अन्य रिश्तेदारों, कुछ बड़े व्यवसायियों, कुछ झारखंड के नागरिकों को पट्टे पर जमीन मिल गयी है. जो किसी भी तरह नहीं मिलनी चाहिए थी. यह शिकायत काफी तूल पकड़ रही है. ब्लॉक में तृणमूल के नेताओं ने भी इससे अपना पल्ला झाड़ लिए है और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की है. जिलाधिकारी एस पोन्नमबलम ने कहा कि पूरे मामले की जांच के उपरांत उचित कार्रवाई की जायेगी. गौरतलब है सालानपुर प्रखंड में सरकारी जमीन हड़पने का मामला कई बार सुर्खियों में रहा है. इसबार सराकरी आवंटन में घोटाले का आरोप लगा है. नौ लोगों के नाम पर शिकायत की गयी है. जिन्हें सरकारी पट्टे की जमीन मिली है. शिकायत में सभी का विस्तृत ब्यौरा भी दिया गया है. जिसमें एक करोड़पति व्यवसायी के अलावा एक नेता की पत्नी और साला, दो ज्वेलरी शॉप के मालिक की पत्नी तथा झारखंड के कुछ लोगों के नाम शामिल हैं. सभी की जमीन का खतियान नंबर भी उल्लेख किया गया है. इसपर काफी हलचल मची हुई है. ऐसे ही एक पट्टे की जमीन पर निर्माण कार्य को बीएलएंडएलआरओ कार्यालय के अधिकारियों ने आकर रोक दिया है. सूत्रों के अनुसार सालानपुर बीडीओ कार्यालय में इस मुद्दे को लेकर बैठक भी हुई है. जिसमें तृणमूल के नेताओं ने उक्त लोगों का नाम हटाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.

कैसे मिलती है और किन्हें मिलती है सरकारी पट्टे की जमीन

राज्य सरकार खेती के लिए और आवास के लिए पट्टे पर जमीन देती है. आवास के लिए दो से तीन कट्ठा और खेती के लिए 10 कट्ठा या उससे अधिक जमीन भी दे सकती है. शिल्पांचल में खेती सिर्फ बारिश पर निर्भर है, इसलिए यहां लोग खेती के लिए जमीन की अपील नहीं करते हैं. यहां आवास के लिए ही लोगों को पट्टे पर जमीन दी जाती है. किन्हें आवास के लिए जमीन दी जायेगी, यह निर्णय वन व भूमि संस्कार स्थायी समिति की बैठक में होता है. आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को ही यह जमीन आवास के लिए मिलती है. सूची में शामिल लोगों की आर्थिक व सामाजिक स्थिति देखकर ही समिति प्रायोरिटी के आधार पर जमीन आवंटन की अनुशंसा करती है. इसके बावजूद भी अमीर व करोड़पति लोगों के नाम सूची में कैसे शामिल हुए हैं, इसकी सच्चाई जांच में ही सामने आयेगी.

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