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इसीएल के कर्मचारी को मिली 10 साल का कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा

Updated at : 11 Sep 2024 9:35 PM (IST)
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इसीएल के कर्मचारी को मिली 10 साल का कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा

50 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार इसीएल के क्लर्क पद के कर्मचारी संदीप साधुखां को आसनसोल सीबीआइ की विशेष अदालत ने बुधवार को 10 वर्षों के कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माना भरने की सजा सुनायी. जुर्माना नहीं भरने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास होगा.

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आसनसोल.

50 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार इसीएल के क्लर्क पद के कर्मचारी संदीप साधुखां को आसनसोल सीबीआइ की विशेष अदालत ने बुधवार को 10 वर्षों के कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माना भरने की सजा सुनायी. जुर्माना नहीं भरने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास होगा. यह फैसला आते ही अदालत में मौजूद आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया. अभियोजन पक्ष के वरिष्ठ लोक अभियोजक राकेश कुमार ने 13 गवाहों के गवाही और साक्ष्यों के आधार पर अदालत के समक्ष आरोप को सही साबित किया. जिसके उपरांत आठ साल तक चले इस मामले में बुधवार को न्यायाधीश राजेश चक्रवर्ती ने अपना फैसला सुनाया.

अदालत ने दोनों धाराओं में दी पांच-पांच साल की सजा, एक के बाद दूसरी शुरू

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और 13(2) दोनों धाराओं में एक से सात साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है. न्यायाधीश राजेश चक्रवर्ती ने दोनों ही धाराओं के तहत पांच-पांच साल के कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनायी. दोनों सजाओं का कार्यकाल अलग-अलग होगा. एक धारा के तहत पांच साल की सजा पूरी होने के बाद ही दूसरी धारा के तहत सजा के पांच साल की शुरुआत होगी. इस प्रकार इस मामले में आरोपी को 10 साल की सजा हुई. आसनसोल सीबीआइ अदालत के इतिहास में यह पहला मामला है, जहां किसी मामले में आरोपी को 10 साल की सजा हुई है.

क्या है पूरा मामला

वर्ष 2018 में इसीएल में अप्रेंटिस ट्रेनिंग के लिए ओडिशा के एक युवक अजय दास पनिका ने परीक्षा दी थी. परीक्षा का परिणाम कब आयेगा, यह जानने के लिए वह 26 अप्रैल 2018 को इसीएल मुख्यालय सांकतोड़िया में गया. वहां उसकी मनसा भुइयां नामक एक क्लर्क से मुलाकात हुई. शिकायत में उसने बताया कि श्री भुइयां ने उससे सेलेक्शन के लिए 70 हजार रुपये की मांग की. पैसा नहीं देने पर सेलेक्शन नहीं होने की बात कही. अजय ने इसकी शिकायत सीबीआइ एंटी करप्शन ब्रांच कोलकाता में की. जिसके उपरांत सीबीआइ ने क्लर्क को रंगे हाथ पकड़ने के लिए जाल बिछाया. दो मई को अजय सीबीआइ के प्लान के अनुसार इसीएल मुख्यालय पहुंचा. वहां मनसा भुइयां से बात करने के लिए जाने पर उसने उसे दूसरे क्लर्क संदीप साधुखां के पास भेज दिया. साधुखां ने अजय को कहा कि एक लाख रुपये का रेट चल रहा है. तोलमोल के बाद 90 हजार रुपये पर फाइनल हुआ. 50 हजार रुपये अभी और 40 हजार रुपये नियुक्ति के समय देने पर सहमति बनी. सीबीआइ के प्लान के तहत अजय के पास 50 हजार रुपये नकद थे, उसने वह पैसा साधुखां को दिया और तुरंत सीबीआइ की टीम ने आकर उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया. सीबीआइ ने आइपीसी की धारा 120बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 और 13(2) के तहत प्राथमिकी दर्ज की. आठ वर्षों तक इस मामले में अदालत में सुनवाई चली. गवाहों के बयान दर्ज हुए. बुधवार को अदालत ने अपना निर्णय सुनाया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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