स्कूली छात्रों की सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन ने तैयार किया 7 सूत्री कार्यक्रम
Updated at : 10 Feb 2020 3:55 AM (IST)
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स्कूली वाहनों पर मार्च माह से कसी जाएगी नकेल, परिवहन विभाग के अधिकारी लगातार करेंगे जांच. सरकारी नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ाई से कार्रवाई का आदेश. छात्रों की सुरक्षा को लेकर स्कूल प्रबंधन, अभिभावक और पुलकार एसोसिएशन के साथ होगी बैठक, जिले में वर्कशॉप का होगा आयोजन. आसनसोल : विभिन्न प्रकार के वाहनों […]
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- स्कूली वाहनों पर मार्च माह से कसी जाएगी नकेल, परिवहन विभाग के अधिकारी लगातार करेंगे जांच.
- सरकारी नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ाई से कार्रवाई का आदेश.
- छात्रों की सुरक्षा को लेकर स्कूल प्रबंधन, अभिभावक और पुलकार एसोसिएशन के साथ होगी बैठक, जिले में वर्कशॉप का होगा आयोजन.
आसनसोल : विभिन्न प्रकार के वाहनों से स्कूल जाने वाले छात्रों की सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन ने सात सूत्री कार्यक्रम तैयार किया. मार्च माह से इसपर कड़ाई से अमल होगा. जिला शासक शशांक सेठी ने बताया कि छात्रों की सुरक्षा जिला प्रशासन के लिए एक अहम मुद्दा बन गया है. किसी भी प्रकार के वाहन से स्कूल जाने वाले छात्रों की सुरक्षा को जिला प्रशासन ने सात सूत्री कार्यक्रम तैयार किया है.
जिसे कड़ाई से लागू करने का निर्देश परिवहन विभाग के अधिकारियों को दिया गया है. इस मुद्दे पर पुलकार एसोसिएशन, स्कूल प्रबंधन और अविभावकों के साथ बैठक कर इसे कड़ाई से लागू किया जाएगा. माध्यमिक, उच्च माध्यमिक और स्कूलों की वार्षिक परीक्षा समाप्त होते ही परिवहन विभाग के अधिकारी अपना कार्य आरंभ करेंगे.
जिले के विभिन्न स्कूलों में पढ़ने वाले अधिकांश छात्र टोटो, ऑटो, पुलकार, स्कूल बस, टाटा मैजिक, मारुति ओमनी आदि वाहनों से स्कूल जाते हैं. सभी स्कूलों के पास अपनी निजी बस नहीं होने के कारण छात्रों को ऊक्त वाहनों का उपयोग करते है. पुलकार की संख्या भी जिले में पर्याप्त नहीं है.
मजबूरन अविभावकों को अपने बच्चे को ऊक्त वाहनों से ही स्कूल भेजना पड़ता है. यह वाहन बच्चों के लिए कितने सुरक्षित हैं इसकी जांच कभी नहीं होती है. जिला शासक ने इस मुद्दे पर पहल आरम्भ की.
छात्रों के स्कूल आने-जाने की जिम्मदारी स्कूल पर भी.
जिला शासक श्री सेठी ने कहा कि जिले के सभी स्कूलों में अधिकांश छात्र विभिन्न वाहनों के जरिये स्कूल जाते हैं. यह वाहनें छात्रों के लिए कितना सुरक्षित है, इसकी जांच अविभावक और स्कूल प्रबंधन कभी नहीं करते हैं. दुर्घटना होने के बाद पूरी जिम्मेदारी प्रशासन पर आती है. स्कूल यह कहकर पल्ला झाड़ देते हैं कि बच्चे कैसे स्कूल आएंगे यह उनकी जिम्मेदारी नहीं है.
जबकि बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन की भी है. स्कूल वाहनों को लेकर विभिन्न स्तर पर मिली शिकायतों के बाद जिला प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर सात सूत्री कार्यक्रम तैयार किया है. स्कूल प्रबंधन, सिटीजन्स फोरम और पुलकार एसोसिएशन के साथ इस मुद्दे पर बैठक कर मार्च माह से इसे लागू किया जाएगा.
क्या है सात सूत्री कार्यक्रम?
जिला शासक श्री सेठी ने बताया कि स्कूली वाहन चालकों को लेकर जिले के दोनों महकमा में चार वर्कशॉप किया जाएगा. जिसमें उन्हें सभी नियमों की जानकारी दी जाएगी. चालक का ड्राइविंग लाइसेंस है या नहीं. अनेकों मामलों में यह पाया गया है कि अंडरएज के बच्चे स्कूली वाहन चला रहे हैं.
गाड़ी का सम्पूर्ण कागजात सही है या नहीं, जिसमें वाहन का फिटनेस प्रमाण पत्र भी देखा जाएगा. वाहन में कितने बच्चों के बैठने की सीट है, अनेकों वाहनों में अलग से सीट बना दिया गया है.
निजी वाहनों का उपयोग इस कार्य में हो रहा है या नहीं. इससे राजस्व का नुकसान होता है. वाहन में सरकारी सभी नियमों का पालन हो रहा है या नहीं. अविभावकों और स्कूल प्रबंधन को भी यह देखने की जिम्मेदारी दी जाएगी. वर्कशॉप में इसकी जानकारी देने के बाद परिवहन विभाग के अधिकारी नियमित इसकी जांच करेंगे. इसे लेकर परिवहन विभाग का एक कैलेंडर बनाया जाएगा.
जिसमें विभिन्न इलाकों में परिवहन अधिकारियों को जांच का दायित्व दिया जाएगा. नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर कड़ाई से कार्रवाई की जाएगी. छात्रों के जीवन के साथ किसी प्रकार का कोई समझौता नहीं किया जायेगा. यह पूरा कार्य्रकम सेफ ड्राइव, सेव लाइफ परियोजना के तहत जिले में लगातार चलेगा.
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