RBI का नया Kill Switch फीचर क्या है? डिजिटल अरेस्ट और बैंकिंग फ्रॉड से बचाने की तैयारी

Published by : Rajeev Kumar Updated At : 30 May 2026 1:08 PM

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ऑनलाइन ठगी से बचाएगा RBI का Kill Switch / एआई-जेनरेटेड रिप्रेजेंटेशनल इलस्ट्रेशन

आरबीआई डिजिटल पेमेंट को और सुरक्षित बनाने के लिए किल स्विच और ऑन-ऑफ बैंकिंग फीचर लाने की तैयारी कर रहा है. इससे यूजर्स संदिग्ध स्थिति में तुरंत ट्रांजैक्शन रोक सकेंगे और साइबर ठगी से बचाव मजबूत होगा.

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डिजिटल पेमेंट्स ने लोगों की जिंदगी आसान जरूर बनाई है, लेकिन इसके साथ साइबर ठगी और ऑनलाइन फ्रॉड के मामले भी तेजी से बढ़े हैं. खासकर पिछले कुछ वर्षों में फर्जी पुलिस कॉल, डिजिटल अरेस्ट और बैंकिंग फ्रॉड जैसी घटनाओं ने लाखों लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचाया है. अब भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) एक ऐसे सुरक्षा सिस्टम पर काम कर रहा है जो किसी भी संदिग्ध स्थिति में बैंकिंग ट्रांजैक्शन को तुरंत रोक सकता है. इसे ‘किल स्विच’ नाम दिया गया है. अगर यह सुविधा लागू होती है तो यूजर्स को अपने खाते की सुरक्षा पर पहले से कहीं ज्यादा नियंत्रण मिल सकता है.

क्या है आरबीआई का ‘किल स्विच’ सिस्टम?

‘किल स्विच’ एक इमरजेंसी सुरक्षा फीचर होगा, जिसकी मदद से कोई भी ग्राहक अपने बैंक खाते से होने वाले सभी डिजिटल ट्रांजैक्शन को तुरंत रोक सकेगा. यदि किसी व्यक्ति को लगे कि वह साइबर ठगी का शिकार बन सकता है या उसके खाते से अनधिकृत लेनदेन होने का खतरा है, तो वह बैंकिंग ऐप के जरिए एक बटन दबाकर सभी वित्तीय गतिविधियों को अस्थायी रूप से बंद कर सकेगा.

इसका उद्देश्य फ्रॉड के दौरान होने वाले नुकसान को शुरुआती चरण में ही रोकना है, ताकि अपराधियों को पैसा ट्रांसफर करने का मौका न मिले.

डिजिटल अरेस्ट जैसे फ्रॉड ने बढ़ाई चिंता

हाल के वर्षों में डिजिटल अरेस्ट नाम का साइबर अपराध तेजी से सामने आया है. इसमें ठग खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल पर डराते हैं. फर्जी दस्तावेज, नकली गिरफ्तारी वारंट और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर पीड़ितों से बड़ी रकम ट्रांसफर करवाई जाती है.

ऐसे मामलों में कई लोग अपनी जीवनभर की बचत गंवा चुके हैं. इसी बढ़ते खतरे को देखते हुए सरकार और आरबीआई नये सुरक्षा उपायों पर विचार कर रहे हैं.

सभी डिजिटल पेमेंट्स के लिए आयेगा ऑन-ऑफ फीचर

आरबीआई सिर्फ किल स्विच तक सीमित नहीं रहना चाहता. केंद्रीय बैंक सभी प्रमुख डिजिटल पेमेंट माध्यमों के लिए स्विच ऑन-स्विच ऑफ सुविधा लाने की संभावना भी तलाश रहा है.

इस व्यवस्था के तहत ग्राहक अपनी जरूरत के अनुसार यूपीआई, इंटरनेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, एटीएम निकासी और अंतरराष्ट्रीय ट्रांजैक्शन जैसी सेवाओं को कभी भी बंद या चालू कर सकेंगे. उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति रोज यूपीआई का उपयोग नहीं करता है, तो वह इसे बंद रख सकता है और जरूरत पड़ने पर कुछ सेकंड में दोबारा सक्रिय कर सकता है.

ग्राहकों को मिलेगा ज्यादा नियंत्रण और सुरक्षा

वर्तमान में कई बैंक कार्ड ट्रांजैक्शन के लिए ऑन-ऑफ सुविधा देते हैं, जिससे ग्राहक अपने कार्ड को सुरक्षित रख पाते हैं. आरबीआई अब इसी मॉडल को पूरे डिजिटल बैंकिंग इकोसिस्टम तक विस्तार देने पर विचार कर रहा है.

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल धोखाधड़ी के मामलों में कमी आयेगी, बल्कि ग्राहकों का डिजिटल पेमेंट सिस्टम पर भरोसा भी मजबूत होगा. साथ ही यूजर्स अपनी जरूरत के हिसाब से बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल कर पाएंगे.

डिजिटल पेमेंट्स का भविष्य और नयी सुरक्षा रणनीति

भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल पेमेंट बाजारों में शामिल हो चुका है. यूपीआई ट्रांजैक्शन लगातार नये रिकॉर्ड बना रहे हैं. ऐसे में सुरक्षा को मजबूत बनाना समय की जरूरत बन गया है. किल स्विच और ऑन-ऑफ बैंकिंग कंट्रोल जैसी सुविधाएं आने वाले समय में डिजिटल बैंकिंग को ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बना सकती हैं.

यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या डिजिटल फ्रॉड की आशंका होने पर यूजर तुरंत अपने खाते को सुरक्षित मोड में डाल सकेगा और आर्थिक नुकसान से बच सकता है.

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लेखक के बारे में

By Rajeev Kumar

राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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