दुर्गापुर : रिमांड से लौटे बिल्लू क्याल को नहीं मिली कोर्ट से जमानत

Updated at : 22 Jan 2019 12:49 AM (IST)
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दुर्गापुर :  रिमांड से लौटे बिल्लू क्याल को नहीं मिली कोर्ट से जमानत

दुर्गापुर : कांकसा थाना पुलिस ने अवैध आग्नेयास्त्र रखने के आरोप में गिरफ्तार व्यवसायी कृष्ण मुरारी क्याल उर्फ बिल्लू क्याल की रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद उसे सोमवार को दुर्गापुर महकमा अदालत में पेश किया. एसीजेएम कोर्ट में सुनवाई के बाद कोर्ट ने उसकी जमानत नामंजूर कर दी तथा उसे न्यायिक हिरासत में जेल […]

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दुर्गापुर : कांकसा थाना पुलिस ने अवैध आग्नेयास्त्र रखने के आरोप में गिरफ्तार व्यवसायी कृष्ण मुरारी क्याल उर्फ बिल्लू क्याल की रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद उसे सोमवार को दुर्गापुर महकमा अदालत में पेश किया.
एसीजेएम कोर्ट में सुनवाई के बाद कोर्ट ने उसकी जमानत नामंजूर कर दी तथा उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया. अगली सुनवाई आगामी 28 जनवरी को होगी. आरोपी कृष्ण मुरारी क्याल (42) कोलकाता प्रगति मैदान के सिल्वर स्प्रिंग अपार्टमेंट का निवासी है.
पुलिस उसके खिलाफ विभिन्न मामलों को खंगालने की कोशिश कर रही है. कृष्ण मुरारी ट्रांसपोर्टिंग के व्यवसाय के साथ साथ कई तरह के कार्यों के साथ जुड़ा रहा है.
उसके प्रत्यक्ष –परोक्ष संबंध कोयला के ‘मगरमच्छों’ से भी रहने के दावे किये जा रहे हैं. हालांकि उसकी गिरफ्तारी के राजनीतिक कारण भी बताये जा रहे हैं. कांकसा थाना प्रभारी संदीप घोष ने बताया कि आरोपी के खिलाफ कुछ संगीन मामले भी है.
कृष्ण मुरारी रानीगंज का मूल निवासी है. उसकी गिरफ्तारी के राजनीतिक कारण भी बताये जा रहे हैं. दावा है कि कई वरीय पुलिस अधिकारियों के साथ उसके करीबी संबंध रहे हैं.
वामपंथी शासनकाल में भी उसकी काफी सक्रियता थी. उस समय कोयला तथा बालू तस्करी में मध्यस्थता की भूमिका होती थी. इस कारण कई वामपंथी नेताओं से बेहतर संबंध के दावे किया करता था.
विगत विधानसभा चुनाव 2016 के दौरान शिल्पांचल में वह अवैध कोयला व्यवसाय के सरगना का सहयोगी हुआ करता था. कांग्रेस तथा माकपा के बीच गंठबंधन होने के बाद उक्त ‘मगरमच्छ’ को लगने लगा था कि तृणमूल की सरकार नहीं बनेगी. उसने काफी राशि भी बहाया था.
इसका परिणाम भी सामने आया था. कुछ सीटों पर उसकी निर्णायक भूमिका थी. लेकिन सरकार गठित होने के बाद यह सिंडिकेट तृणमूल की नजर में आ गया तथा ‘मगरमच्छ’ को जेल भी जाना पड़ा. फिलहाल वह इस क्षेत्र से बाहर हो गया है. लेकिन उसके सहयोगी दूसरे राजनीतिक दल का संरक्षण तलाश रहे हैं.
डेढ़ वर्ष पूर्व बंगाल पुलिस के एसटीएफ ने कृष्ण मुरारी तथा उसके राजनीतिक मध्यस्थ को कोलकाता से काफी नगद राशि के साथ गिरफ्तार किया था. सनद रहे कि कृष्णा मुरारी ही वह व्यवसायी था,जिसने राज्य सरकार के शिष्टमंडल के साथ सिंगापुर के दौरे पर गया था. उसे केंद्र कर माकपा तथा अन्य विपक्षी पार्टियों ने सरकार को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया था. इन दिनों पुलिस उसकी नकेल कसने में लगी है.
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