आसनसोल : द्र सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ आंदोलन ही एकमात्र रास्ता

Updated at : 19 Dec 2018 12:22 AM (IST)
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आसनसोल :  द्र सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ आंदोलन ही एकमात्र रास्ता

आसनसोल : इस्टर्न रेलवे मेंस यूनियन का 114 वां केंद्रीय परिषद की दो दिवसीय बैठक मंगलवार को स्थानीय नजरूल मंच में आयोजित हुई. बैठक की अध्यक्षता यूनियन के कार्यकारी अध्यक्ष अमित घोष ने की. महामंत्री सुरेंद्र कुमार बनर्जी ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कहा कि सरकार रेल कर्मचारी सह सभी केंद्रीय कर्मचारियों को बरगलाने […]

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आसनसोल : इस्टर्न रेलवे मेंस यूनियन का 114 वां केंद्रीय परिषद की दो दिवसीय बैठक मंगलवार को स्थानीय नजरूल मंच में आयोजित हुई. बैठक की अध्यक्षता यूनियन के कार्यकारी अध्यक्ष अमित घोष ने की. महामंत्री सुरेंद्र कुमार बनर्जी ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कहा कि सरकार रेल कर्मचारी सह सभी केंद्रीय कर्मचारियों को बरगलाने का काम कर रही है.
सातवें वेतन आयोग की घोषणा होने के बाद समस्त केंद्रीय कर्मचारी संगठनों ने रेल के निजीकरण, रेल में शत प्रतिशत एफडीइाई, विवेक देबराय कमेटी की रिपोर्ट को रद्दे करने, देश भर में रेल के 2.5 लाख पदों को भरने, नयी पेंशन निती को रद्द करने, न्यूनतम वेतन 26 हजार करने, वेतन निर्धारण प्रक्रिया को बदलने एवं सातवें वेतन आयोग की विसंगतियों को दूर करने के मांग को लेकर 11 जूलाई 2016 से अनिश्चित कालीन हड़ताल का नोटिस दिया गया .
उस समय सरकार ने केंद्रीय कर्मचारी फेडरेशन को लेकर एक समझौता किया और चार महीने में कुछ मुख्य मांगों के समाधान का आश्वासन दिया.
परंतु दो साल बीतने के बाद भी किसी मांग का पूर्ण समाधान नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि नयी पेंशन निती में आंशिक बदलाव किया गया है . जो कर्मचारियों को मंजूर नहीं है. इसके विपरीत रेल में निजीकरण को और तेज करने के साथ कर्मचारियों के भत्तों को समाप्त किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि रेलवे बोर्ड के साथ एआइआरएफ का समझौता होने के पश्चात जो सिद्धांत लिया गया कि रेल के रनिंग कर्मचारियों को भत्ता सातवां वेतन आयोग के अनुसार दिया जायेगा एवं ट्रेक मेंटेनेंस के केडर का पुनगर्ठन करेंगे. परंतु इस वादे को भी अभी तक लागू नहीं किया गया है.
उन्होंने कहा कि कोटा में हुए एआइआरएफ के वार्षिक अधिवेशन के बाद रेल बोर्ड ने एआइआरएफ के सभी पदाधिकारियों के साथ चार एवं पांच दिवंबर को मैराथन बैठक कर मामलों के समाधान के लिए कुछ दिनों का समय मांगा है.
उन्होंने सरकार की जनविरोधी नितीयों को लेकर अपने मांगों के पूरा होने को लेकर अंदेशा जताते हुए केंद्र सरकार पर पूंजीपतियों के समर्थन में काम करने का आरोप लगाया.
उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों से जनता त्रस्त है. बेरोजगारी और महंगाई बढ रही है. उन्होंने मजदूर विरोधी सरकार के खिलाफ तीव्र आंदोलन आरंभ किये जाने की मांग की.
उन्होंने रेलवे में मान्यता प्राप्ती के लिए होने वाले चुनाव में सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों को तैयार रहने का आग्रह किया. अवसर पर एआइआरएफ के जोनल सचिव एमकेपी सिंह, इआरएमयू के सहायक सचिव सुधीर रॉय, संयुक्त महासचिव एमएस मंडल आदि उपस्थित थे.
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