कोल इंडिया में पैसे की कमी के कारण 5.34 लाख रिटायर कोलकर्मियों की पेंशन बंद, मई माह में बैंकों में नहीं आयी राशि
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 04 Jun 2018 12:38 AM
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आसनसोल : देश के सार्वजनिक प्रतिष्ठान ईसीएल एवं कोयला उद्योग सहित निजी कंपनियों यथा टाटा, इस्को (चासनाला) में कार्यरत करीब 5.34 लाख पूर्व कोलकर्मियों का पेंशन बंद हो गया है. इसमें सिर्फ कोल इंडिया के सवा चार लाख रिटायर कोलकर्मी शामिल है. फिलवक्त अमूमन एक साल में लगभग 14 हजार कोलकर्मी सेवानिवृत होते है जो […]
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आसनसोल : देश के सार्वजनिक प्रतिष्ठान ईसीएल एवं कोयला उद्योग सहित निजी कंपनियों यथा टाटा, इस्को (चासनाला) में कार्यरत करीब 5.34 लाख पूर्व कोलकर्मियों का पेंशन बंद हो गया है. इसमें सिर्फ कोल इंडिया के सवा चार लाख रिटायर कोलकर्मी शामिल है. फिलवक्त अमूमन एक साल में लगभग 14 हजार कोलकर्मी सेवानिवृत होते है जो फिर पेंशन के हकदार हो जाते है.
पूर्व कोलकर्मियों का अप्रैल माल का पेंशन राशि मई माह में संबंधित बैंकों में नहीं आया है. मालूम हो कि एसबीआई पेंशन का नोडल बैंक है जहां से फिर अन्य ब्रांच में पेंशन की राशि भेजी जाती है. मजदूर संगठन से जुडे नेताओं की माने तो वर्तमान में पेंशन की राशि न्यूनतम 300 रुपये से लेकर 40 हजार (अधिकारियों का) की राशि हर माह उनके खाते में भेजी जाती है.
अभी कोलकर्मियों का पेंशन भुगतान नहीं होने की आशंका है. मालूम हो कि गत 14 मार्च, 2018 को ट्रस्टी बोर्ड की हुई मीटिंग में कोल इंडिया को 255 करोड़ राशि सीएमपीएफ को देने का फैसला हुआ था. इस बावत कोल सचिव ने नर्दिेश भी दिया था. उक्त राशि कोल कर्मियों के सात फीसदी एवं प्रबंधन के सात फीसदी के मद में देना था, पर कोल इंडिया ने उक्त पैसा नहीं दिया.
सीएमपीएफ ने बहुत पहले नोटशीट बना कर मंत्रालय को भेजा, पर मंत्रालय ने इस पर आज तक नोटिफिकेशन जारी नहीं किया,जिस कारण पेंशन का यह संकट आ खड़ा हुआ है. पेंशन बचाने का मुद्दा पिछले कई सालों से लगातार उठ रहा है लेकिन सरकार पर इसका कोई असर नही पड़ रहा है. अब तो पेंशन में कटौती की भी बात कही जा रही है. पेंशन का मुद्दा पूरी तरह से केंद्र सरकार के जिम्मे है, क्योंकि पेंशन स्कीम केंद्र सरकार ने ही संसद से बनाया है. केंद्रीय कर्मियों को (2004 से पूर्व के कर्मियों) को सरकार 50 फीसदी पेंशन देती है, जिनका कोई अंशदान नहीं है. जबकि कोल कर्मियों का अंशदान भी जमा होता है.
प्रबंधन ने दिया कटौती का प्रस्ताव
गत 14 मार्च को कोल इंडिया मुख्यालय में आयोजित सीएमपीएफ ट्रस्टी बोर्ड के सब कमेटी की बैठक में प्रबंधन के पेंशन कटौती के प्रस्ताव को एक सिरे से खारिज करते हुए ट्रेड यूनियन नेताओं ने पेंशन फंड के लिए केंद्र सरकार से कोल इंडिया प्रबंधन को 25 हजार करोड़ रुपए देने की मांग की. यह बैठक पेंशन कटौती को लेकर थी. इस बैठक में पेंशन स्कीम में बदलाव पर चर्चा होनी थी,लेकिन यूनियन नेताओं का रुख देखते हुए बैठक में पेंशन फंड को लेकर चर्चा हुई. पेंशन कटौती के मुद्दे पर हंगामे के साथ संपन्न बैठक में पेंशन कटौती को लेकर प्रबंधन द्वारा दिए गए प्रस्ताव को यूनियन प्रतिनिधियों ने एक सिरे से खारिज कर दिया.
उन्होंने दो टूक कहा कि पेंशन कटौती से संबंधित किसी भी तरह के नियमावली को स्वीकार नहीं किया जायेगा. यूनियन नेताओं ने सीएमपीएफ के कोल इंडिया में विलय का प्रस्ताव भी रखा. कमेटी में शामिल यूनियन प्रतिनिधियों ने पेंशन फंड के लिए केंद्र सरकार से 25 हजार करोड़ रुपए देने की मांग करते हुए कहा कि सरकार कोल इंडिया को पेंशन फंड में 25 हजार करोड़ रुपए देने का निर्देश दे.
पेंशन फंड स्कीम बदहाली के दौर में : सीएमपीएफ: सीएमपीएफ का मानना है कि पेंशन फंड स्कीम बदहाली के दौर में है. इस फंड के लिए 25 हजार करोड़ और 18 प्रतिशत अंशदान की जरूरत है. कोयला कामगारों की सर्विस पीरियड के अंत में 10 माह के वेतन के औसत पर 25 प्रतिशत पेंशन देने का प्रावधान है. वेतन में कोई सीलिंग निर्धारित नहीं है. कोयला कामगारों के सर्विस पीरियड के अंत में 60 माह के औसत पर पेंशन फक्सि करना चाहती है. वेतन का सीलिंग भी 65 हजार रूपये करना चाहती है.
यूनियन प्रतिनिधियों ने कहा कि सीएमपीएफ का कोल इंडिया में विलय होना चाहिए. इससे कोल इंडिया द्वारा सीएमपीएफ को प्रशासनिक मद में हर माह भुगतान की जाने वाली 3 प्रतिशत रकम की बचत होगी, जिसे पेंशन फंड में जमा करने से फंड मजबूत होगा.सीएमपीएफ के कोल इंडिया में विलय पर प्रबंधन ने कहा कि सीएमपीएफ संसद के कानून से बना है. सब कमेटी को यह अनुशंसा करने का अधिकार नहीं है.
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