हार के कारणों की समीक्षा करेगी भाजपा : प्रकाश

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 03 Jun 2018 1:37 AM

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कोलकाता. केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने शनिवार को कोलकाता प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि इस हफ्ते हुए लोकसभा उपचुनाव में भाजपा के हारने के कारणों की समीक्षा किया जायेगी. हालांकि हार के लिए उन्होंने कम मतदान को जिम्मेवार ठहराया है. उन्होंने कहा कि भाजपा बूथ स्तर तक […]

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कोलकाता. केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने शनिवार को कोलकाता प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि इस हफ्ते हुए लोकसभा उपचुनाव में भाजपा के हारने के कारणों की समीक्षा किया जायेगी. हालांकि हार के लिए उन्होंने कम मतदान को जिम्मेवार ठहराया है.
उन्होंने कहा कि भाजपा बूथ स्तर तक हार के कारणों की जानकारी लेने के साथ कमियों को दूर करने की दिशा में आगे बढ़ेगी. हालांकि तीन सीटों पर चुनाव हुए, जिसमें दो पर भाजपा को जीत हासिल हुई थी. इसके पहले, आम चुनाव में इन सीटों पर मतदान का प्रतिशत 70 फीसदी से ज्यादा था.
लेकिन उप चुनाव में यह प्रतिशत गिरकर 50 फीसदी पर पहुंच गया. कम मतदान के कारण नतीजे भाजपा के पक्ष में नहीं गये.
श्री जावड़ेकर के मुताबिक भाजपा विचारोंवाली पार्टी है. यहां वंशवाद के लिए कोई जगह नहीं है. लिहाजा बूथ स्तर तक विश्लेषण करने के बाद आगे की कार्रवाई की जायेगी. क्योंकि पिछले चार वर्षों में भाजपा ने 14 राज्यों में अपनी जीत दर्ज करायी है. ऐसे में दो सीट पर हारे हैं, तो उसके कारणों की जरूर समीक्षा होगी.
क्योंकि देश में भाजपा जिस तेजी से उभरी है, उसे इन नतीजों से नहीं आंका जा सकता. लगे हाथ उन्होंने विपक्षी एकता को भाजपा के लिए खतरा मानने से इंकार करते हुए कहा कि वर्ष 2014 में भाजपा जब केंद्र की सत्ता में आयी थी, तो वह केवल छह राज्यों में शासन कर रही थी. लेकिन अब हम 20 राज्यों की सत्ता में हैं. रहा सवाल विपक्षी एकता का, तो पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के साथ भाजपा का मुकाबला है. उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी साथ हुए हैं. राजनीति में यह सब आम बात है. ऐसे में विपक्ष की एकता भाजपा के लिए कोई खतरा नहीं है.
राष्ट्रीय स्तर पर मुद्दा उठाकर तृणमूल को घेरेंगे : कैलाश
कोलकाता. वहीं भाजपा व पश्चिम बंगाल के प्रभारी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने पश्चिम बंगाल सरकार और पुलिस प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हुए ट्वीट कर कहा कि, ‘हम शर्मिंदा हैं! मैंने कल रात पश्चिम बंगाल के एडीजी (कानून -व्यवस्था) अनुज शर्मा से बहुत देर बात की. बलरामपुर के दुलाल की जान खतरे में है, यह बताते हुए उनसे किसी भी हाल में उसे बचाने के लिए कई बार कहा.
उन्होंने मुझसे कहा था कि पुलिस पूरी ताकत से कोशिश कर रही है और मैं स्वयं पूर्ण प्रयास करूंगा. एडीजी के पूर्ण प्रयास के बावजूद दुलाल की जान नहीं बचायी जा सकी, जिसके लिए हम शर्मिंदा हैं. इसके पहले त्रिलोचन महतो की हत्या के खिलाफ दिल्ली में बंग भवन पर प्रर्दशन करने के बाद राज्य के सभी थानों पर भाजपा ने विरोध प्रर्दशन शुक्रवार को किया था. अब वह एक बार फिर इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने के साथ तृणमूल कांग्रेस को उसके घर में में घेरेगी.
तृणमूल कांग्रेस भाजपा कार्यकर्ताओं की ‘लक्षित हत्या’ में शामिल
कोलकाता/अहमदाबाद. केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने शनिवार को तृणमूल कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा कार्यकर्ताओं के ‘लक्षित हत्या’ में शामिल है. मंत्री ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ संगठित विपक्ष में शामिल है और इसलिए यह ‘संगठित विपक्ष’ है जो भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या में शामिल है.
स्मृति ने संवाददाताओं से कहा कि वह उन लोगों की तरफ इशारा करना चाहती हैं कि पश्चिम बंगाल में न केवल लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है बल्कि वे भाजपा कार्यकर्ताओं के लक्षित हत्या में शामिल हैं. मंत्री ने यहां कहा कि पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी संगठित विपक्ष का हिस्सा है, जो नरेंद्र मोदी के खिलाफ लड़ रही है. इसलिए संयुक्त विपक्ष भाजपा कार्यकर्ताओं की लक्षित हत्या में शामिल है. भाजपा ने आरोप लगाया था कि पार्टी का जो कार्यकर्ता त्रिलोचन महतो (20 वर्ष) पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में 30 मई को मृत पाया गया था, उसकी हत्या सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने की है.
हालांकि तृणमूल ने इस आरोप से इंकार किया है और इसे आधारहीन बताया है. संबंधित जिले में आज एक और व्यक्ति भी मृत पाया गया. स्मृति यहां भाजपा सरकार की चार साल की उपलब्धियां गिनाने आयी हुई थीं. उन्होंने ईंधन की बढ़ती कीमतों के मुद्दे पर पूछे गये सवाल को टालते हुए कहा कि मैं पेट्रोलियम मंत्री नहीं हूं और न ही वित्त मंत्री हूं इसलिए मैं इस सवाल का जवाब नहीं दे सकती हूं.
मंत्री ने कहा कि पेट्रोलियम मंत्री का यह विचार था कि ईंधन के दामों को जीएसटी के दायरे में लाना चाहिए, ताकि इसके दाम घटाए जा सकें. उन्होंने दावा किया कि भाजपा के खिलाफ लड़ने के लिए विपक्ष का साथ आना प्रधानमंत्री की लोकप्रियता और राजीनीतिक शक्ति का संकेत है.
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